Aaj ka Panchang आज का पंचांग बुधवार, 18 अक्टूबर 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 18 अक्टूबर 2023
18 अक्टूबर 2023 दिन बुधवार को अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। आज अश्विन मास के शारदीय नवरात्र का चतुर्थ दिवस है। आज माता कुष्मांडा देवी के दर्शन एवं पूजन का बहुत पुण्य होता है। आज माता कुष्मांडा देवी को मधुपर्क एवं दोनों नेत्रों के बीच तिलक लगाने से माता की विशिष्ट कृपा एवं प्रशन्नता प्राप्त होती है। आज वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत है। आज की चतुर्थी को रथोत्सव चतुर्थी भी कहा जाता है। आप सभी सनातनियों को “शारदीय नवरात्र के चतुर्थ दिवस माता कुष्मांडा देवी के उपासना” की हार्दिक शुभकामनायें।।
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – आश्विन मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि : आश्विन मास शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि 01:12 AM तक उपरांत पंचमी
✏️ तिथि का स्वामी – चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणपति जी और पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता जी है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र अनुराधा 09:00 PM तक उपरांत ज्येष्ठा
🪐 नक्षत्र स्वामी : अनुराधा नक्षत्र का स्वामी शनि है, जो राशि स्वामी मंगल का शत्रु है।
🔕 योग : आयुष्मान योग 08:18 AM तक, उसके बाद सौभाग्य योग
⚡ प्रथम करण : वणिज – 01:22 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : विष्टि – 01:12 ए एम, अक्टूबर 19 तक
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:00 से 1:30 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:17:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:43:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:43 ए एम से 05:33 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:08 ए एम से 06:23 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
🔯 विजय मुहूर्त : 02:00 पी एम से 02:46 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:49 पी एम से 06:14 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:49 पी एम से 07:04 पी एम
💧 अमृत काल : 10:24 ए एम से 12:02 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:41 पी एम से 12:32 ए एम, अक्टूबर 19
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 06:23 ए एम से 09:01 पी एम
💦 अमृत सिद्धि योग : 06:23 ए एम से 09:01 पी एम
❄️ रवि योग : 06:23 ए एम से 09:01 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-किसी बटुक को कांस्य पात्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – मूल प्रारंभ/भद्रा/सर्वार्थसिद्धि योग/अमृत योग/ विनायक चतुर्थी/ माना चतुर्थी (बंगाल – उड़ीसा), प्रसिद्ध अभिनेता ओम पुरी जन्म दिवस, बिजली के खोजकर्ता थॉमस एडिसन पुण्य तिथि, भारत के प्रमुख क्रांतिकारी रामकृष्ण खत्री शहीद दिवस, साहित्यकार विश्वनाथ सत्यनारायण स्मृति दिवस, अज़रबैजान स्वतंत्रता बहाली दिवस, विश्व रजोनिवृत्ति दिवस
✍🏼 विशेष – चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं तथा यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है।
🗼 Vastu tips 🗽
बेडरुम डिज़ाइन करते समय ध्यान रखने वाली बातें:
बेड के सामने शीशा या टेलीविजन नहीं होना चाहिए। इसका कारण यह है कि बेड पर सोते समय प्रतिबिंब नहीं देखना चाहिए, क्योंकि इससे गृह क्लेश और झगड़े होते हैं।
बेडरूम की दीवारों को न्यूट्रल या हल्के रंगों से रंगना चाहिए, क्योंकि वे पॉजिटिव एनर्जी लाते हैं। दीवारें काली नहीं होनी चाहिए।
बेडरूम में मंदिर नहीं होना चाहिए।
बेडरूम में पानी या फव्वारे का चित्रण करने वाली पेंटिंग नहीं होनी चाहिए, क्योंकि वे भावनात्मक हानि का कारण बन सकती हैं।
मूड लाइटिंग का उपयोग किया जाना चाहिए, और शांत माहौल बनाने के लिए सुगंधित अगरबत्तियों को जलाया जा सकता है।
⏩ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
घर के झगड़े मिटाने और सुख-शांति पाने के उपाय
शनिदेव स्वयं कहते हैं कि ‘जो शनिवार को पीपल को स्पर्श करते है, उसको जल चढ़ाता है, उसके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उसको कोई पीड़ा नहीं होगी |’ ग्रहदोष और ग्रहबाधा जिनको भी लगी हो, वे अपने घर में 9 अंगुल चौड़ा और 9 अंगुल लम्बा कुमकुम का स्वस्तिक बना दें तो ग्रहबाधा की जो भी समस्याएँ है, दूर हो जायेगी |
स्नान के बाद पानी में देखते हुए ‘हरि ॐ शांति’ इस पावन मंत्र की एक माला करके वह पानी घर या जहाँ भी अशांति आदि हो, छिडक दे और थोडा बचाकर पी लें फिर देख लो तुम्हारा जीवन कितना परिवर्तित होता है |
🍂 आरोग्य संजीवनी 🍁
यह समझ होगी तो पेट ठीक रहेगा
वस्तुएँ तो मेजबान की हैं लेकिन जितनी जरूरत है उतना खा, एक ग्रास कम खा | ‘शादी-पार्टी का माल है’ ऐसा सोचकर ज्यादा खाया तो फिर रात को छाती तपेगी, ओ ओ ओ ….! वस्तुएँ तो उनकी हैं पर पेट तो अपना बिगड़ेगा | खाना चबा-चबा के खाना चाहिए | कब खाना, कितना खाना, कैसे खाना – इसकी थोड़ी समझ होगी तो ठीक रहेगा | स्वास्थ्य की कुंजी समझाने के लिए एक कहावत है :
पेट नरम, पैर गरम, सिर को रखो ठंडा |
घर में आये रोग तो मारो उसको ठंडा ||
फिर आये हकीम तो उसे दिखाओ डंडा ||
जो पचता नहीं हो, जो रुचता नहीं हो उसको न खायें तथा रुचता हो और पचना न हो उसको भी ढंग से खायें और थोडा खायें | किंतु जो रुचता नहीं है पर शरीर के लिए अच्छा है और पचता है , उसको चाह से खायें और जो रुचता है उसको सँभल के खायें |
🪔 गुरु भक्ति योग 🕯️
जगतजननी जगदम्बिका माता श्री दुर्गा जी का चतुर्थ रूप माता श्री कूष्मांडा देवी हैं। अपने उदर से अंड अर्थात् ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्मांडा देवी के नाम से जाना जाता है। नवरात्रि के नव दिनों में चतुर्थ दिन इनकी पूजा-आराधना की जाती है। श्री कूष्मांडा माता की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक नष्ट हो जाते हैं।
इनकी आराधना से मनुष्य त्रिविध तापों से मुक्त हो जाता है। माता कुष्माण्डा सदैव अपने भक्तों पर अपनी कृपादृष्टि बनाकर रखती हैं। इनकी पूजा आराधना से मनुष्य को हृदय की शांति एवं लक्ष्मी की प्राप्ति होती हैं। इन बातों का आधार दुर्गा सप्तशती को माना जाय अथवा देवी भागवत को माता कुष्मांडा वह देवी हैं, जिनके उदर में त्रिविध तापयुक्त सम्पूर्ण संसार स्थित है। माता कूष्माण्डा ही वह देवी हैं, जो इस सम्पूर्ण चराचर जगत की अधिष्ठात्री हैं।
जब सृष्टि की रचना नहीं हुई थी उस समय अंधकार-ही-अंधकार था। माता कुष्मांडा जिनका मुखमंड सैकड़ों सूर्य की प्रभा से प्रदिप्त है, उस समय प्रकट हुई। उनके मुख पर बिखरी मुस्कुराहट से सृष्टि की पलकें झपकनी शुरू हो गयी। तब इन्हीं माता की हंसी से सृष्टि में ब्रह्मण्ड का जन्म हुआ। शास्त्रानुसार इस देवी का निवास सूर्यमण्डल के मध्य में है। और यह सूर्यमंडल को अपने संकेत से नियंत्रित रखती हैं।
माता कूष्मांडा अष्टभुजा से युक्त हैं अत: इन्हें अष्टभुजी देवी के नाम से भी जाना जाता है। देवी अपने इन आठो हाथों में क्रमश: कमण्डलु, धनुष, बाण, कमल का फूल, अमृत से भरा कलश, चक्र तथा गदा धारण करती हैं। देवी के हाथों में कमलगट्टे की माला सदैव विद्यमान रहती है। जिससे माता अपने भक्तों के कल्याण की कामना सदैव करती रहती है। यह माला ही भक्तों को सभी प्रकार की ऋद्धि-सिद्धि देने वाला कहा जाता है।
माता कुष्मांडा अपने प्रिय वाहन सिंह पर सवार रहती हैं। जो भक्त श्रद्धा पूर्वक माता कुष्मांडा की उपासना नवरात्री के चौथे दिन करता है उसके सभी प्रकार के कष्ट रोग, शोक आदि का अंत हो जाता है। और उसे आयु एवं यश की प्राप्ति होती है। आदिशक्ति, सिद्धिदात्री माता दुर्गा का चतुर्थ दुर्गा माता श्री कूष्मांडा को कहा जाता है। अपने उदर से ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्मांडा देवी के नाम से जाना जाता है।
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⚜️ चतुर्थी तिथि में तिल कादान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति कीपूजा के उपरान्त मोदक,बेशन के लड्डू एवं विशेष रूपसे दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है।
ज्योतिष शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता हैवह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्तिबुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेमभाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करनापड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।


