नबी से सच्ची मोहब्बत उनके बताए तरीके पर अमल करना है: सामिद नदवी
व्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । जैसा कि आज के जमाने में जन्म प्रमाण पत्र बनवाए जाते हैं पुराने जमाने में ऐसा नहीं होता था जन्म को याद रखने के लिए किसी न किसी घटना से उसे जोड़ लिया जाता था पैगंबर इस्लाम की पैदाइश आमुल फील से जोड़ी जाती है आप की पैदाइश से पहले अबराह नाम का एक बादशाह जो काबा शरीफ को ढहाने के लिए आया था खुदा ने अबाबील नामक परिंदों से उसके लश्कर के ऊपर कंकरिया बरसवा कर काबा शरीफ की हिफाजत की थी। उससे जोड़ा जाता है अमूमन 12 रबीउल अव्वल आपकी पैदाइश का दिन है। हमें नबी के बताए तरीके पर अपनी जिंदगी गुजार कर अपनी मोहब्बत का इजहार करना चाहिए और मनगड़त कामों से बचना चाहिए। जो काम स्वयं नबी और सहाबा से साबित नहीं है उन्हें नहीं करना चाहिए।
उक्त बात जुमे की नमाज से पहले मरकज मस्जिद मैं मौलाना सामिद खां नदवी ने उपस्थित लोगों के समक्ष व्यक्त करते हुए पैग़ंबरे इस्लाम की पैदाइश से लेकर वफात तक की जिंदगी पर रोशनी डालते हुए आपकी सीरत के मुताबिक जिंदगी गुजारने का आव्हान किया।
इसके अलावा मस्जिद मदीना पठान वाली में मुफ्ती रुस्तम खां नदवी, मक्का मस्जिद बालाई टेकरी पर मौलाना नजर मो. गोंडवी, मस्जिद अमीर दाद खां में मौलाना सैयद ज़ैद मस्जिद नूर हिदायतपुर में मौलाना जुनैद खां, मोहम्मदी मस्जिद में मौलाना अदनान बारी नदवी सहित दीगर अन्य मस्जिदों में उलेमाओं ने पैग़ंबरे इस्लाम की जीवनी पर रोशनी डालते हुए आप की पैदाइश के दिन किए जाने वाले कामों को बताया।



