निजी प्रकाशकों की किताब खरीदना मजबूरी मांगने पर भी स्टेशनरी विक्रेता नहीं दे रहे जीएसटी बिल
तीन हजार से लेकर आठ हजार रुपए तक बेचे जा रहे किताबों के सेट
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन । जुलाई माह शुरू होते ही एनसीईआरटी और सीबीएसई पाठ्यक्रम का नया सत्र शुरू हो गया है। वहीं कुछ स्कूलों में अपने मन मुताबिक प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें भी इन कोर्सों के साथ लगाई जा रही है। बच्चों के अभिभावकों पर मुंह मांगे दाम पर किताब खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। इतना ही नहीं प्राइवेट स्कूल संचालक ,सीबीएसई स्कूल संचालक उनकी खुद की चयनित किताब दुकान से किताब खरीदने का निर्देश अभिभावकों को दे रहे हैं। जहां 3000 रुपए से लेकर 8000 रुपए तक के किताबों के सेट मिल रहे हैं।
यहां बता दें कि शहर में दो दर्जन से अधिक थोक और खुदरा किताब दुकान संचालित है। जहां प्राइवेट स्कूल संचालक अभिभावकों से किताबें खरीदवा रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि दुकानदार किताब खरीदने पर न तो किसी प्रकार छूट दे रहे हैं और न ही जीएसटी वाला पक्का बिल दे रहे हैं। किताब खरीदने पर हाथ से लिखा कच्चा बिल दिया जा रहा है। जबकि सरकार की गाइडलाइन के अनुसार जीएसटी बिल देना अनिवार्य है। कुल मिलाकर प्राइवेट स्कूल संचालक अभिभावकों का शिक्षा के नाम पर पूरी तरह दोहन कर रहे है। मजे की बात यह है कि इसमें जिला शिक्षा विभाग के अधिकारी भी रुचि नहीं ले रहे हैं। इस कारण किताब दुकानदारों का मनोबल बढ़ा हुआ है।
नहीं दिए जा रहे जीएसटी बिल…
नियमों का पालन नहीं कर रहे पुस्तक विक्रेता सरकार ने भले ही किताब खरीदने पर पक्का बिल देना अनिवार्य कर दिया है। लेकिन नगर के किताब दुकानदार इसका पालन नहीं कर रहे हैं। पुस्तक विक्रेता किताब कॉपी खरीदने पर पक्का बिल न देकर सादा पर्ची पर सिर्फ किताब का दाम जोड़कर दे देते हैं। पक्का बिल मांगने पर मना कर देते हैं। हैरानी इस बात की है जीएसटी इंस्पेक्टर भी इस दिशा में जांच पड़ताल करने में रुचि नहीं ले रहे। इससे सरकार को लाखों रुपए की राजस्व क्षति हो रही है। इसके बाद भी अधिकारी अभिभावकों की सुनवाई नहीं कर रहे है और न ही शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इन निजी स्कूला संचालकों को गाइडलाइन का पालन करने का आदेश दे रहे है।
इनका कहना है…..
नोटिस जारी किए जा रहे हैं रायसेन शहर में जो स्कूल संचालक व पुस्तक विक्रेता शासन के नियमों का पालन नहीं कर रहा है। प्रथम चरण में उन्हें आज नोटिस जारी किए जा रहे हैं। संतोषजनक जवाब न मिलने पर जांच प्रतिवेदन बनाकर कार्रवाई के लिए कलेक्टर को भेजा जाएगा। एसके उपाध्याय डीपीसी रायसेन
कोई भी पुस्तक विक्रेता पक्का बिल नहीँ देते……
शिक्षा विभाग की सुस्ती से पुस्तक विक्रेता हुए बेखौफ नगर में दो दर्जन से अधिक थोक और खुदरा की किताब दुकानें हैं। लेकिन इनमें कोई भी दुकानदार ग्राहकों को पक्का बिल भी नहीं दे रहा हैं। जबकि बिलिंग के आधार पर ही सरकारी खजाने में टैक्स जमा होता है। व्यापारी द्वारा टैक्स चोरी करने के लिए बिल नहीं काटा जा रहा है। आयकर और वाणिज्य कर विभाग द्वारा पहले समय-समय पर अभियान चलाकर टैक्स चोरी करने वाले पर कार्रवाई की जाती थी, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद कारोबारियों के यहां विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
हर साल बदल जाता है पाठ्यक्रम, संशोधन की समय सीमा तय नहीं ….
अभिभावक गोविंद सिंह राम प्रताप सैय्यद बाबर अली एडवोकेट ने बताया कि उनके दो बच्चे हैं। दोनों में एक साल का फर्क है। बावजूद इसके बड़े बेटे की किताब को छोटा बेटा इस्तेमाल नहीं कर पाता। हर साल किताबों में कोई न कोई बदलाव हो जाता है। इसकी कोई समय सीमा तय नहीं है कि कितने समय के बाद पुस्तक में संशोधन किया जाता है।



