नीलकंठेश्वर धाम : लगभग 500 साल पहले खुदाई के दौरान मिला था 11सौ रूद्रधारी शिवलिंग
गैरतगंज तहसील के ग्राम पाटन में स्थित है
रायसेन । महाकाल की नगरी में आगामी 11 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महाकाल लोक के लोकार्पण से पूरे प्रदेश में आस्था और श्रद्धा की गंगा प्रवाह मान है। ऐसे में प्रदेश के विख्यात शिव मंदिरों की चर्चा न हो यह संभव नहीं है। इनमें रायसेन जिले की गैरतगंज तहसील में स्थित नीलकंठेश्वर धाम का भी विशेष महत्व है।
जिले की गैरतगंज तहसील मुख्यालय से 15 किमी की दूरी पर ग्राम पाटन में स्थित श्री नीलकंठेश्वर धाम शिवभक्तों के लिए आस्था का विशेष केन्द्र है। लगभग 500 साल पहले राजा मगर सेन के शासन काल में खुदाई के दौरान यह प्राचीन मंदिर एवं यहां स्थापित 11 सौ रूद्रधारी शिवलिंग मिला था। यहां प्रत्येक वर्ष बसंत पंचमी पर्व पर मेला लगता है, जिसमें दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों श्रृद्धालु शामिल होते हैं तथा नीलकंठेश्वर के ग्यारह सौ रूद्र धारी शिवलिंग के दर्शन कर पूजा आराधना करते हैं। बसंत पंचमी पर यहां महारूद्र यज्ञ का आयोजन भी किया जाता है। इसी दिन पाटन में श्री सिद्ध देवनारायण मंदिर पर दरबार लगता है। यहां लगने वाले मेले में झूले प्रदर्शनियां एवं रामलीला आकर्षण के केन्द्र रहते हैं। मंदिर के पास प्राचीन ऐतिहासिक बावडी है, जिसका जल कभी समाप्त नही होता पर भी जलाभिषेक का आयोजन होता है।

