
रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
ग़ौरझामर । शासकीय नौकरियों के अभाव में बढ़ती बेरोजगारों की फौज के पलायनको देखते हुए मध्य प्रदेश एवं केंद्र सरकार रोजगारोन्मुखी व्यवस्था को बढ़ावा दें जिससे बेरोजगार युवक अपने ही प्रदेश में निजी व्यापार व्यवसाय में हाथ बटाकर अपने कारोबार को संचालित कर सकें देखा जाता है कि लोगों के परंपरागत धंधे जो सनातन काल से चले आ रहे थे उन्हें प्रोत्साहन सुविधाएं और बैंकों से ऋण नहीं मिलने के कारण वह व्यवसाय धीरे-धीरे समाप्त होते चले गए यदि शासन लोगों के सामाजिक पुरातन पुस्तैनी व्यापार व्यवसाय को महत्त्व दे तो जिस प्रकार चौरसिया समाज अपने पुश्तैनी धंधे पान बरेजा को सुविधाओं के अभाव में छोड़ता जा रहा है यदि शासन पान बरेजा के लिए कुरैया बॉस सनोरा इत्यादि लगने वाली सामग्री मुहैया कराए तो इस पुस्तैनी पान के धंधे में लगे सैकड़ों हजारों चौरसिया परिवारों को बेरोजगारी का शिकार नहीं होना पड़ेगा इसी प्रकार प्रजापति समाज द्वारा अपने मिट्टी के बर्तन बनाने के पुश्तैनी धंधे में शासन उच्च गुणवत्ता युक्त मिट्टी बर्तन पकाने के लिए ईंधन एवं तैयार व कच्चे माल के परिवहन हेतु वाहन आदि मुहैया कराता है तो ऐसे सैकड़ों हजारों बेरोजगारों को घर पर ही धंधे की व्यवस्था की जा सकती है बढ़ई समाज भी उपेक्षा सुविधाओं के अभाव के चलते आज ना जाने कितने सामाजिक परिवार के युवा वर्ग के बेरोजगार दर-दर की ठोकरें खाते हुए भटक रहे हैं विडंबना यह है कि मध्यप्रदेश शासन अभी तक बेरोजगारों को रोजगार मुहैया नहीं करा पाई है जिसके परिणाम स्वरूप बेरोजगारों की फौज दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है शासन नामदेव दर्जी समाज को यदि सिलाई मशीनें प्रशिक्षण एवं बैंक ऋण कम ब्याज पर बिल्कुल सहज सरल प्रक्रिया के अंतर्गत मुहैया कराता है तो इस परिवार के लोगों को स्वरोजगार मिल जाएगा और उसे अलग से व्यवस्था बनाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी ऐसे कई परिवार हैं जो अपने सामाजिक धन्धो को सुविधाओ के अभाव में भूल चुके हैं पटेल समाज के लोग कछवाडा जिसमें वह तरह-तरह की सब्जियों का उत्पादन करते हैं साहू तेली समाज जो कोल्हू के माध्यम से तेल निकालने का व्यवसाय चलाते थे आज वह व्यवसाय ठप पड़े हुए बुनकर समाज बुनाई के धंधे से परंपरागत कपड़े तैयार करते थे जो उनके व्यवसाय को चार चांद लगाया करते थे ऐसी अनेकों जातिगत व्यवसाय परंपरागत पुश्तैनी रूपसे होते आ रहे थे जिनसे परिवार की पीढ़ी दर पीढ़ी रोजगार से लगी हुई थी शासन ने इनके पुस्तैनी धन्धो की ओर कोई ध्यान नहीं दिया परिणाम स्वरूप लोग कर्ज में दबते चले गए और यह व्यवसाय नष्ट होते रहे आज आलम यह है कि हर परिवार में कई बेरोजगार हैं जो रोजी रोटी के लिए मोहताज हैं शासन ने पूर्व में एक परिवार एक नौकरी का नारा दिया था जिससे लोगों को काफी आशाएं अपेक्षाएं बंधी थी लेकिन इस पर अमल नहीं होने के कारण आज बेरोजगारी से परेशान लोग पलायन करने को मजबूर हो गए हैं शासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।



