Aaj ka Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 12 दिसम्बर 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 12 दिसम्बर 2023
12 दिसम्बर 2023 दिन मंगलवार को मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है। आज स्नान-दानएवं श्राद्ध आदि की अमावस्या है। आज मंगलवार की भौमवती अमावस्या है। इसके विषय में लिखा है:- अमायाञ्च यदावारो भवेद् भूमि सुतस्यवै। गंगायाम् यदि लभ्यते कोटि सूर्यग्रहै समा। पापवारान्विते दशे दुर्भिक्षं च प्रजा भयम्। अर्थात पापवार मंगलवार की अमावस्या के वजह से दुर्भिक्ष एवं प्रजा में भय का योग बनता है। यदि गंगा स्नान किया जाय तो भय से मुक्ति संभव होता है। आप सभी सनातनियों को “भौमवती अमावस्या” की हार्दिक शुभकामनायें।।
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌚 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि : मार्गशीर्ष मास कृष्ण पक्ष दिन मंगलवार अमावस्या तिथि 06:24 AM तक उपरांत प्रतिपदा
✏️ तिथि स्वामी : अमावस्या तिथि के देवता हैं अर्यमा जो पितरों के प्रमुख हैं। अमावस्या के स्वामी पितर देवता माने गए हैं।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र अनुराधा 11:56 AM तक उपरांत ज्येष्ठा
💫 नक्षत्र स्वामी : अनुराधा नक्षत्र का स्वामी शनि है, जो राशि स्वामी मंगल का शत्रु है।
📢 योग : धृति योग 06:51 PM तक, उसके बाद शूल योग
⚡ प्रथम करण : चतुष्पाद – 05:47 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : नाग – 05:01 ए एम, दिसम्बर 13 तक
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:13 बजे से 16:35 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:46:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:16:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:53 ए एम से 05:45 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:19 ए एम से 06:36 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:48 ए एम से 12:32 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:01 पी एम से 02:45 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:41 पी एम से 06:07 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:43 पी एम से 07:00 पी एम
💧 अमृत काल : 02:36 ए एम, दिसम्बर 13 से 04:09 ए एम, दिसम्बर 13
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:44 पी एम से 12:36 ए एम, दिसम्बर 13
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-हनुमान मंदिर में शहद चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – देवपितृकार्य अमावस्या/मूल प्रारंभ/ दर्श अमावस्या/ अमावस्या प्रारंभ सुबह 06. 24, धारावाहिक ‘रामायण’ के निर्माता रामानन्द सागर स्मृति दिवस, भारत के क्रिकेट खिलाड़ी युवराज सिंह जन्म दिवस, स्वदेशी दिवस, तटस्थता का अंतर्राष्ट्रीय दिवस, केन्या जम्हूरी दिवस, राजनीतिज्ञ गोपीनाथ मुंडे जन्म दिवस, अभिनेता रजनी कान्त जन्म दिवस, हवाई सुरक्षा दिवस (सप्ताह), अखिल भारतीय हस्तशिल्प सप्ताह (08-14 दिसम्बर)
✍🏼 विशेष – अमावस्या को मैथुन एवं प्रतिपदा को कद्दू और कूष्माण्ड के फल का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य होता है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि को सम्भोग वर्जित तिथि बताया गया है। अमावस्या तिथि एक पीड़ाकारक और अशुभ तिथि मानी जाती है। अमावस्या तिथि पितृगणों को समर्पित तिथि है अर्थात इसके स्वामी पितृगण हैं। यह केवल कृष्ण पक्ष में ही होती है तथा अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
🚰 Vastu tips 🗽
नल से पानी का टपकना नहीं होता है शुभ वास्तु के अनुसार अगर आपके घर के किसी भी हिस्से में पानी का नल टपकता है तो ये शुभ नहीं माना जाता है। घर में टपकता पानी का नल बेवजह के खर्चों की ओर इशारा करता है। खासकर यदि आपके घर की रसोई का नल टपकता है तो ये वास्तु के लिहाज बिल्कुल ठीक नहीं है। क्योंकि रसोई में अग्नि का निवास होता है और जहां आग और पानी एक साथ हो वहां परेशानियां शुरू हो जाती है। इसके चलते घर के सदस्यों की सेहत खराब हो सकती है, बिजनेस में नुकसान या किसी टूट-फूट में धन हानि हो सकती है। इसी के साथ पानी के फिजूल बहने से वरूण देव का दोष भी लगता है और घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ता है। अतः इस तरह की परेशानियों से बचने के लिए, घर में टपकते नल को जल्द से जल्द ठीक करा लें।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
सुरक्षा घेरा क्यूँ बनाते है ?
कुछ साधनए एवं उनके स्थान ऐसे होते है जहां साधक को साधना काल मे अधिक खतरा होता है ।
स्थान की नकारात्मक शक्तियों से
जिस देवता या देवी की साधना कर रहे है उसकी शक्तियों से ।
हिंसक पशुयों से
साधना स्थान पर बाहरी लोगो की द्र्श्ति से बचने के लिए ।
अब बात करते है की घेरा कैसे बनाते है ?
घेरा बनाने की कई विधियाँ है वो विधि ज्यादा उपयुक्त होती है जो गुरु द्वारा निर्देशित हो ।
साधारणता सुरक्षा मंत्र से अभिमंत्रित कर चाकू , त्रिशूल आदि मंत्र पढ़ते हुये अपने चरो तरफ एक गोल घेरे का निर्माण किया जाता है । इस गोल घेरे मे साधक अपना आसान लगा कर अपनी साधना पूर्ण करता है ।
ये तरीका बहुत सरल है । इसके अलावा और भी तरीके है जिनके द्वारा घेरे का निर्माण किया जाता है ।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
सर्दियों में क्यों बढ़ जाता है सर्वाइकल पेन-सर्दियों में सर्वाइकल पेन की समस्या इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि तापमान गिरने के साथ फिजिकल एक्टिविटी कम होने लगती है, ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ने लगता है और इसकी वजह सेहत से जुड़ी कई समस्याएं बढ़ने लगती हैं। होता ये है कि ब्लड सर्कुलेशन जब धीमा पड़ता है तो शरीर का तापमान कम होने लगता है और मांसपेशियों में अकड़न और दर्द बढ़ने लगता है।
इसके अलावा ठंडी हवा हमारे तंत्रिका तंत्र को ट्रिगर करती है, जिससे हमारी मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं, हमारी रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं और रक्त प्रवाह सीमित हो जाता है। गर्मी के नुकसान को कम करने के लिए यह हमारे शरीर की एक और प्राकृतिक प्रतिक्रिया है। लेकिन बदले में, खराब ब्लड सर्कुलेशन मांसपेशियों में दर्द का कारण बनता है, इसलिए गर्दन में दर्द होता है। इस प्रकार से ये सर्वाइकल पेन का कारण बनता है।
🪔 गुरु भक्ति योग 🕯️
हिंदू धर्म में प्रत्येक महीना और उसकी तिथि का अपना एक विशेष महत्व होता है। यह मार्गशीर्ष का महीना चल रहा है इस महीने की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि अपने आप में बहुत विशेष महत्व रखती है। शास्त्रों में जितना महत्व पूर्णिमा के दिन को बताया है उतनी ही महत्व अमावस्या तिथि का भी होता है।
स्नान, दान-पुण्य, जप और तप से भी ज्यादा महत्व अमावस्या तिथि में पितृों के निमित्त किए जाने वाले तर्पण को सर्वाधिक श्रेष्ठ माना गया है। महीने की अमावस्या तिथि या पितृ पक्ष का दिन ही सिर्फ पितृों को समर्पित होता है। आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से साल 2023 और मार्गशीर्ष मास की आखिरी अमावस्या तिथि कब पड़ रही है और क्या है इसका शुभ मुहूर्त।
🌚 मार्गशीर्ष माह की अमावस्या तिथि मुहूर्त
मार्गशीर्ष मास कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि- 12 दिसंबर 2023 दिन मंगलवार
मार्गशीर्ष मास की अमावस्या तिथि प्रारंभ- 12 दिसंबर 2023 सुबह 6 बजकर 24 मिनट से शुरू।
मार्गशीर्ष मास की अमावस्या तिथि समापन- 13 दिसंबर 2023 दिन बुधवार सुबह 5 बजकर 1 मिनट पर समाप्ति।
मार्गशीर्ष अमावस्या में क्या करें
मार्गशीर्ष अमावास्या में प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठ कर स्नान करना शुभ माना जाता है।
यदि आप अपने पूर्वजों को कुछ भेंट करना चाहते हैं तो अमावस्या तिथि को शास्त्रों में पितृों की शांति के लिए सबसे उत्तम बताया गया है।
अमावस्या तिथि में पितृों को जल से तर्पण देना चाहिए जिससे वह प्रसन्न हो कर आशीर्वाद देते हैं।
मान्यता है कि इस दिन मंत्र जाप सिद्धि, दान और तीर्थ स्नान ऐसे पुण्यकारी कर्म करने से उसका कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है।
इस दिन भूल से भी मास-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए ऐसा करने से पाप लगता है।
पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए अमावस्या के दिन अपने पितृों को जल अर्पित करना चाहिए और उनके निमित्त किसी ब्राह्मणों को दान दक्षिणा देना चाहिए जिससे उनकी पारलौकिक यात्रा सुगम हो।
※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※
⚜️ अमावस्या को दूध का दान श्रेष्ठ माना जाता है। किसी कुआँ, तलाब, नदी अथवा बहते जल में दो-चार बूंद दूध डालने से कार्यों में आनेवाली परेशानियाँ दूर होती है। जौ दूध में धोकर नदी में प्रवाहित करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस तिथि को पीपल में जल देना परिक्रमा करना मिश्री दूध में मिलाकर अर्घ्य देना अत्यन्त शुभ फलदायी माना जाता है।
ऐसा करने से शनिदेव का प्रकोप कम होता है तथा भगवान नारायण एवं माँ लक्ष्मी कि पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। अमावस्या को तुलसी और बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिये। आज घर की सफाई करना और कबाड़ बेचना शुभ माना जाता है। अमावस्या को भूलकर भी सम्भोग (स्त्री सहवास) नहीं करना चाहिये। घर के मन्दिर एवं आसपास के नजदीकी मन्दिर में तथा तुलसी के जड़ में सायंकाल में घी का दीपक जलाना चाहिये इससे लक्ष्मी माता प्रशन्न होती हैं।

