पांचवे दिन राजकुमार चौरसिया का शव बुधनी पुल के पास मिला, एक की तलाश जारी
नर्मदा नदी में डूबे थे विदिशा के दो युवक
रिपोर्टर : राजकुमार रघुवांशी
उदयपुरा । उयदपुरा थाना क्षेत्र में नर्मदा के केतोघान घाट पर 12 नवंबर रविवार को विदिशा के पांच युवक नहाने के लिए रुके थे, इनमें से दो युवक डूब गए थे। इनमें से एक युवक राजकुमार चौरसिया का शव गुरुवार को पांचवे दिन दोपहर बुधनी पुल के पास सीहोर जिले में मिला है । राजकुमार चौरसिया विदिशा के डंडापुरा का रहने वाला था। जबकि चेतन राजपूत के लिए गुरुवार को रेस्क्यू चलाया गया। इसके अलावा महाजाल को लेकर भी प्रयास किए गए लेकिन मजदूरों की कमी की चलते महाजाल नर्मदा में नहीं डाला जा सका है। हालांकि राजकुमार चौरसिया का शव लंबी दूरी पर मिलने को लेकर अब रणनीति बदली जा रही है। अब मांगरोल से लेकर मोतलसिर और मोतलसिर से लेकर नांदोर तक नर्मदा में रेस्क्यू चलाकर चेतन राजपूत की तलाश की जाएगी। हालांकि नर्मदा का बहाव तेज होने के कारण भोपाल से आए गोताखोर भी सफल नहीं हो पाए । इसलिए वे वापस चले गए हैं । अब रायसेन एसडीआरएफ की टीम ही रेस्क्यू के लिए काम करेगी।
विदिशा निवासी शिवनारायण चौरसिया के राजकुमार चौरसिया का अंतिम संस्कार शुक्रवार को दोपहर में किया गया।
पूरा मामला यह है
रविवार को छींद वाले हनुमानजी के दर्शन करने निकले 5 दोस्त हादसे का शिकार हो गए थे। 5 दोस्तों में से 2 दोस्त नर्मदा में डूब गए. पांचों युवक नर्मदा घाट पहुंचे जहां 3 युवा नदी में नहाने उतर गए जबकि 2 दोस्त बाहर ही बैठे रहे। नहाने उतरे 3 में से 2 दोस्त गहरे पानी में डूब गए।
उदयपुरा थाना मुख्यालय से 12 किमी दूर ग्राम केतोघान के नर्मदा घाट पर यह हादसा हुआ था। जानकारी के अनुसार यहां विदिशा निवासी दो युवक नर्मदा नदी के गहरे पानी में डूब गए। रविवार की दोपहर विदिशा से छींद धाम के दर्शन करने आए ये युवक केतोघान घाट पर नहाने पहुंचे थे।
घटना के बाद से पुलिस और प्रशासन के अधिकारी गोताखारों की मदद से दोनों युवकों की तलाश में लगे रहे हैं।
बता दें कि पांच दोस्तों में से तीन राजकुमार पुत्र शिवनारायण चौरसिया निवासी पान बाग विदिशा, चेतन पुत्र राकेश राजपूत निवासी पान बाग विदिशा, तथा अंशुल नेमा पुत्र अशोक निवासी डंडापुरा विदिशा नहाने के लिए नदी में उतरे। जबकि महेंद्र अहिरवार पुत्र भुजवल अहिरवार निवासी राजपूत कॉलोनी और प्रथम राजपूत पुत्र सुरेंद्र राजपूत निवासी नीमताल विदिशा बाहर घाट पर ही बैठे रहे।



