पौष पुत्रदा एकादशी कब ? जानें डेट, शुभ मुहूर्त और इससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🔮 पौष पुत्रदा एकादशी कब ? जानें डेट, शुभ मुहूर्त और इससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी
🥏 *_HIGHLIGHTS_*
▪️ पौष शुक्ल एकादशी यानी पुत्रदा एकादशी व्रत 21 जनवरी को रखा जाएगा।
▪️ पुत्रदा एकादशी पुत्र और ऐश्वर्य और मोक्ष देने वाली मानी गई है।
▪️ संतान सुख देती है पुत्रदा एकादशी।
👉🏽 जनवरी के महीने में पड़ने वाली दूसरी एकादशी को पौष पुत्रदा एकादशी कहते हैं। पौष पुत्रदा एकादशी पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। पंचांग के अनुसार, यह पर्व 21 जनवरी को पड़ रहा है। रविवार को पूरे विधि-विधान से विष्णु भगवान की उपासना की जाएगी। श्रीहरि को प्रसन्न करने के लिए यह दिन बहुत ही खास और महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने से संतान सुख का वरदान मिलता है। इसलिए आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से पौष पुत्रदा एकादशी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत पारण का समय-
🐚 *कब है पौष पुत्रदा?*
इस साल पौष पुत्रदा एकादशी जनवरी 21, 2024 को मनाई जाएगी। आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, 20 जनवरी के दिन 07:26 पी एम से एकादशी तिथि की शुरुआत होगी, जो 21 जनवरी के दिन 07:26 पी एम मिनट तक रहेगी।
⚛️ *_मुहूर्त-_*
➡️ एकादशी तिथि प्रारम्भ – जनवरी 20, 2024 को 07:26 पी एम बजे
➡️ एकादशी तिथि समाप्त – जनवरी 21, 2024 को 07:26 पी एम बजे
🌊 पारण (व्रत तोड़ने का) समय – 06:56 ए एम से 09:05 ए एम, 22 जनवरी
💦 पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय – 07:51 पी एम, 22 जनवरी
🤷🏻♀️ *पौष पुत्रदा एकादशी व्रत का महत्व*
इस व्रत को करने से श्रीहरि विष्णु के अलावा मां लक्ष्मी की भी कृपा प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यता है कि यदि कोई जातक इस व्रत को विधि पूर्वक करता है, तो जल्द ही उसे संतान सुख की प्राप्ति होती है। इसके अलावा लंबे समय से रुके हुए कार्य भी पूरे हो सकते हैं।
✡️ *पौष पुत्रदा एकादशी शुभ योग*
इस बार की पौष पुत्रदा एकादशी बेहद खास मानी जा रही है क्योंकि इस दिन द्विपुष्कर योग, शुक्ल योग और रोहिणी नक्षत्र का संयोग बनने जा रहा है.
🍱 *पौष पुत्रदा एकादशी पूजन विधि*
पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने वाले लोगों को व्रत से पहले दशमी के दिन एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए. व्रती को संयमित और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. प्रातःकाल स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु का ध्यान करें. इसके बाद गंगा जल, तुलसी दल, तिल, फूल पंचामृत से भगवान नारायण की पूजा करनी चाहिए. इस व्रत में व्रत रखने वाले बिना जल के रहना चाहिए. यदि व्रती चाहें तो संध्या काल में दीपदान के पश्चात फलाहार कर सकती हैं. व्रत के अगले दिन द्वादशी पर किसी जरुरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन कराकर, दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करना चाहिए.
💁🏻♀️ *पौष पुत्रदा एकादशी के दिन भूलकर न करें ये गलतियां*
🔹 *एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें. तुलसी के पत्तों को एकादशी से एक दिन पहले तोड़ सकते हैं और इसे ताजा रखने के लिए रात भर पानी में रख सकते हैं.*
🔹 *मांसाहारी भोजन, प्याज और लहसुन का सेवन न करें क्योंकि यह भोजन तामसिक खाने में आता है.*
🔹 *इस दिन शराब और सिगरेट का सेवन न करें.*
🔹 *दूसरों के बारे में बुरा न बोलें.*
🔹 एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि चावल का सेवन करना अशुभ माना जाता है.
📖 *पौष पुत्रदा एकादशी व्रत कथा*
प्राचीन समय में भद्रावती नगरी में सुकेतुमान नाम का एक राजा राज्य करता था.उसकी पत्नी का नाम शैव्या था. सारी सुख-सुविधाएं होने के बाद भी राजा संतुष्ट नहीं था क्योंकि उसके कोई संतान नहीं थी. पुत्रहीन राजा के मन में इस बात की बड़ी चिंता थी कि उसके बाद उसे और उसके पूर्वजों को कौन पिंडदान देगा. उसे चिंता थी कि बिना पुत्र के पितरों और देवताओं से ऋण चुकता नहीं हो सकता.
एक दिन इन्हीं विचारों में डूबा हुआ वह घोड़े पर सवार होकर वन को चल दिया. वह पानी की तलाश में एक सरोवर के पास पहुंच जहां ऋषिगण भी मौजूद थे. राजा सरोवर के किनारे बैठे हुए ऋषियों को प्रणाम करके उनके सामने बैठ गया. राजा ने मुनियों को अपनी व्यथा बातई और कहा ऋषिगण मेरा भी कोई पुत्र नहीं है, यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो कृपा कर मुझे एक पुत्र का वरदान वीजिए. ऋषि बोले हे राजन, आज पुत्रदा एकादशी है. आप इसका उपवास करें. भगवान श्रीहरि की अनुकम्पा से आपके घर अवश्य ही पुत्र होगा.
राजा ने मुनि के वचनों के अनुसार उस दिन उपवास किया और द्वादशी को व्रत का पारण किया. भगवान श्रीहरि की कृपा से कुछ दिनों बाद ही रानी ने गर्भ धारण किया और नौ माह के पश्चात उसके अत्यंत वीर, धनवान, यशस्वी पुत्र को जन्म दिया. तभी से पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान प्राप्ति के लिए किया जाता है.


