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कब है मार्गशीर्ष अमावस्या ? जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🔮 कब है मार्गशीर्ष अमावस्या? जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व

मार्गशीर्ष मास भक्ति और समर्पण से भरा होता है। इस मास में भगवान श्रीकृष्ण का विशेष महत्व होता है। इस मास में भगवान श्रीकृष्ण का विशेष महत्व होता है। भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण स्वयं कहते हैं कि वे समस्त मासों में मार्गशीर्ष मास हैं। सतयुग में देवता मार्गशीर्ष मास के प्रथम दिन को वर्ष का प्रारंभ मानते थे। इस महीने में नदियों में स्नान करना चाहिए और तुलसी और तुलसी के पौधे की जड़ों का उपयोग करना चाहिए। इस पूरे माह में भजन, कीर्तन आदि में भक्तों को शामिल देखा जा सकता है। माना जाता है कि इस महीने की अमावस्या में पितृ पूजा करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। जो लोग श्राद्ध करने में सक्षम नहीं थे वे इस महीने की अमावस्या को मृत पूर्वजों की मुक्ति के लिए तर्पण कर सकते हैं। प्राचीन शास्त्रों के अनुसार, सर्वशक्तिमान ईश्वर के समक्ष मृत पूर्वजों को प्रसन्न करना बहुत महत्वपूर्ण है। जिन लोगों की कुण्डली में पितृ दोष हो, संतान सुख की कमी हो या राहु नवम भाव में नीच का हो उन्हें इस अमावस्या का व्रत अवश्य करना चाहिए। इस व्रत को करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। विष्णु पुराण के अनुसार इस व्रत को करने से ब्रह्मा, इंद्र, रुद्र, अश्विनी कुमार, सूर्य, अग्नि, पक्षी, पशु और दुष्टों सहित सभी देवी-देवता इस व्रत को करने से मृत पूर्वजों को प्रसन्न किया जा सकता है। आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से मार्गशीर्ष अमावस्या की तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि।
⚛️ मार्गशीर्ष अमावस्या तिथि और शुभ मुहूर्त
मार्गशीर्ष अमावस्या की तिथि: 23 नवंबर 2022, बुधवार
अमावस्या तिथि आरंभ: 23 नवंबर 2022, बुधवार, प्रातः 06:56 मिनट से
अमावस्या तिथि समाप्त: 24 नवंबर 2022, गुरुवार, प्रातः 04:29 मिनट पर
स्नान-दान का शुभ मुहूर्त: प्रातः 06:56 से लेकर प्रातः 08:01 मिनट तक
🤷🏻‍♀️ इस महीने की अमावस्या में पितृ पूजा करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
✍🏽 मार्गशीर्ष अमावस्या योग
शोभन योग: 22 नवंबर, सायं 06:37 मिनट से 23 नवंबर दोपहर 03:39 मिनट तक
अतिगण्ड योग: 23 नवंबर,दोपहर 03:39 मिनट से 24 नवंबर,दोपहर 12:19 मिनट तक
अमृत काल: 23 नवंबर, दोपहर 01: 24 मिनट से दोपहर 2:53 मिनट तक
💁🏻‍♀️ मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व
मार्गशीर्ष या अगहन हिंदू महीना है जो अत्यधिक धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। इस धार्मिक महीने का नाम नक्षत्र मृगशीर्ष के नाम पर रखा गया है और यह भगवान कृष्ण को समर्पित है। मार्गशीर्ष अमावस्या प्रबल भक्ति और श्रद्धा का दिन है। इस दिन भक्त भगवान कृष्ण की पूजा करने के अलावा पितरों का सम्मान करते हैं। ऐसा माना जाता है कि मृत पूर्वजों को सम्मान देने से सभी दोष दूर हो जाते हैं और आपके और आपके परिवार के लिए आनंदमय जीवन का आश्वासन मिलता है। इस शुभ अमावस्या की रात में की जाने वाली प्रत्येक धार्मिक गतिविधि का गहरा महत्व है और भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती है।
इस महीने की अमावस्या में पितृ पूजा करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
🙏🏼 मार्गशीर्ष अमावस्या पूजा विधि
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पितरों के तर्पण के लिए इस अमावस्या का बहुत महत्व है।
मान्यता है कि इस दिन पितरों का पूजन और व्रत रखने से पितरों का आशिर्वाद मिलता है।
प्रातः जल्दी उठे और किसी पवित्र नदी में स्नान करें और फिर सूर्य को अर्घ्य दें।
उसके बाद जल में काला तिल मिलकर उसे नदी में प्रवाहित करें।
भगवान विष्णु और शिव की पूजा करें।
इस दिन व्रत रखने वाले को दिन में जल नहीं ग्रहण करना होता है।

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