बतर मिलते ही बोनी में जुटा किसान, लगभग 100 फ़ीसदी बौनी क्लियर
रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर । लगातार बरसात होने से चिंता में डूबा किसान खरीफ बोनी की तैयारी में बैठा था लेकिन बतर नहीं मिलने के कारण वह बोनी नहीं कर पा रहा था कहते हैं की आषाढ़ का चूका किसान और डार को चूका बंदरा, इस कहावत पर अमल करते हुए किसान खाद बीज लेकर बोनी की फिराक में बैठा था जिसे बतर मिलते ही वह अपनी खरीफ की बोनी में जुट गया समाचार लिखे जाने तक किसान अपनी लगभग सौ फीस दी बोनी करने में सफल हो गया है इस बार किसानों ने मिली जुली फसल बोने पर जोर दिया है जिसमें मूंगफली मक्का ज्वार उड़द मूंग राहर धान और सोयाबीन प्रमुख हैं , पिछले कुछ वर्षों में सोयाबीन से आशातीत नुकसान उठा चुके किसानों को सोयाबीन से मोह भंग हो गया है परिणाम स्वरूप अब किसानों ने सोयाबीन को दरकिनार करते हुए पुरानी परंपरागत खेती को अंजाम देना शुरू कर दिया है पिछले कुछ दिनों से अच्छी बारिश होने की कारण किसानों ने राहत महसूस करते हुए खरीफ की बुवाई कर दी है।



