माता पिता की सेवा करना ही तीर्थ है : श्री महेश गुरुजी उज्जैन
रिपोर्टर : राजकुमार रघुवंशी
सिलवानी। अंचल के ग्राम पठा पौड़ी में चल रही श्री शिव महापुराण कथा में छटवें दिवस में महेश गुरुजी उज्जैन ने बताया पुत्र के लिए माता पिता पत्नी के लिए पति और शिष्य के लिए गुरु यह घर में ही तीर्थ स्थान है। अपने समीप के तीर्थ स्थान हैं जो इनकी सेवा कर लेता है इनको संतुष्ट प्रसन्न कर लेता है उसको सारे तीर्थों का फल और पूर्ण घर में ही प्राप्त हो जाता है। उदाहरण देते हुए बताया कि पुंडरीक ने अपने माता-पिता की सेवा की तो भगवान पंढरीनाथ उनको दर्शन देने के लिए स्वयं वहां पर आए। अनुसूइया ने अपने पति की सेवा चित्रकूट के गहन बन अपनी घास फूस की झोपड़ी में ही की उससे ब्रह्मा विष्णु महेश तीनों देवता प्रसन्न होकर के उनके पुत्र बने और शबरी ने अपने गुरु मतंग ऋषि की सेवा वहीं पर अपने आश्रम में ही की उस से प्रसन्न होकर के भगवान श्री राम जी ने शबरी को जाकर के वहां पर दर्शन दिया तो शास्त्र में जैसा धर्म जो जिसके लिए कहा गया है उसका पालन अगर हम लोग करते हैं तो निश्चित रूप से कम परिश्रम में कम समय में हम ज्यादा धर्म लाभ कमा सकते हैं और भगवान के कृपा भाजन बन सकते हैं, श्री महेश गुरु जी ने कहा की भारतवर्ष की माताएं सदा सदा के लिए पूजनीय है जो देश और राष्ट्र के हित के लिए अपने बच्चो को निछावर कर देती है। वही गुरुजी ने कहा की पत्नी का धर्म सिर्फ उसका पति है, बेटियो दो कुल का नाम रोशन करती है। बेटियो को कभी ऐसे कदम नहीं उठाना चाइए की जिस से की माता पिता को नीचा देखना पड़े ये भारतवर्ष है मर्यादा और संस्कारो से भरा पड़ा है। जिस ने धर्म और भारत की संस्कृति के रूप से जीना सीख लिया उसका कल्याण हो जाता है।




