मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 181 पर दर्ज शिकायत 18711988 को किया कर्मचारियों ने मनमाने तरीके से बंद

रिपोर्टर : भगवत सिंह लोधी
दमोह/तेंदूखेड़ा । एमपी वन मित्र पोर्टल पर दर्ज वन भूमि दावा फार्मों के क्रियान्वयन में जिला स्तरीय बन अधिकार समिति जिला दमोह ने किया आदिवासियों को गुमराह, वन में निवास करने वाली ऐसी अनुसूचित जनजातियों ओर अन्य परम्परागत वन निवासियों के जो ऐसे वनो में पीढियों से निवास कर रहे हैं किन्तु उनकों अभिलिखित नहीं किया जा सका है वन अधिकारो ओर वन भूमि में अधिभोग को मान्यता देने के लिए भारत सरकार राज्य सरकारों ने अनुसूचित जनजाति ओर अन्य परम्परागत वन निवासी वन अधिकारों की मान्यता अधिनियम 2006-2007 एवं 2008 संशोधित नियम 2012 लागू किया जिसमें वन भूमि ओर वन में निवास करने वाले लोगों ने ब्यक्तिगत वन भूमि दावा फार्म लगाये वन अधिकार समितियों के पास विधिवत् जिला स्तरीय वन अधिकार समिति के पास आवेदन पहुंचे ओर बडे़ पैमाने पर दावा फार्मों को जिला स्तरीय बन अधिकार समिति ने अमान्य किये। उन अमान्य आवेदनों का पुनः परीक्षण 21-10-2020 इसे प्रारंभ किया गया तथा 15-12-2020 तक दर्ज कराकर निराकरण करें लेकिन जिस प्रकार से जिला स्तरीय वन अधिकार समिति ओर आदिम जाति कल्याण विभाग ने खेल खेला वह शर्मनाक है 8408 आवेदनों में से 406 लोगों को ही वन भूमि अधिकार पत्र दिये। सात ब्लाकों में जिसमें एमपी वन मित्र पोर्टल पर दर्ज दावा फार्मों की वर्तमान स्थिति निम्न प्रकार है NI 46263000012. NI 46253700026. NI46248000028. NI46248000008. NI46283900002. NI46273100001 इन समस्त आनलाइन प्रकरणों की बर्तमान स्थिति देखेंगे तो अलग ही क्रियान्वयन की कार्यवाही नजर आयेगी । इस काली करतूतें छुपाने के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शिकायत नंबर 18711988 को मनमाने तरीके से बंद कर दिया गया है इसलिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 181 को मजाक बना कर रख दिया है कर्मचारियों ने बुन्देलखण्ड में एक कहावत है अंधे पीसे कुत्ते खाये वाली कहावत के लिए कर्मचारियों ने चरितार्थ किया है।



