यूनिफॉर्म के अभाव में चालक परिचालक की पहचान गायब

रिपोर्टर : कुन्दनलाल चौरसिया
गौरझामर । यहां सार्वजनिक यात्री बसों में चालक परिचालकों को उनकी वैध ड्रेस के अभाव में पहचानना मुश्किल हो रहा है परिवहन नियमों के तहत जब चालक परिचालक क्लीनर के लिए डैस कोड नेम प्लेट बैज बिल्ला अनिवार्य हैं फिर इस प्रकार का खुला उल्लंघन कर चालक परिचालकों को बसों में बिना वैध ड्रेस के क्यों चलाया जा रहा है यात्रियों ने हमारे संवाददाता को शिकायत करते हुए बताया है कि जबसे राज्य परिवहन निगम बंद हुई है उसके बाद निजीकरण के दौर में प्राइवेट बसें संचालित की जाने लगी हैं इन बसों में चालक परिचालको द्वारा मनमानी बरती जा रही हैं अधिकृत ड्रेस के बिना ही डिस्कों परिधान में चालक परिचालक मटरगश्ती करते हुए बसों में चल रहे है चिंता का विषय तो यह है कि सागर में संभागीय क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय आरटीओ ऑफिस होते हुए इसका कोई प्रभाव यहां चलने वाली निजी यात्री बसों में दिखलाई नहीं दे रहा है। यात्रियों की बार-बार शिकायत के बाद भी आरटीओ विभाग भ्रष्टाचार की कुंभकर्णी निद्रा में इस प्रकार सो रहा है कि उसे यात्रियों की तनिक भी चिंता नहीं है देखा जाता है कि कोई भी गैर व्यक्ति ड्राइवर बनकर बस संचालित करने लगता है जिसके दुष्परिणाम यात्रियों को दुर्घटना के रूप में भुगतना पड़ रहे हैं इसी प्रकार कोई भी व्यक्ति परिचालक बनाकर बसों में भेज दिया जाता है जिसके पास कोई भी ड्रेस बैज बिल्ला नेम प्लेट आदि कुछ नहीं होता ऐसे नकली परिचालक यात्रियों के साथ मनमानी व दुर्व्यवहार कर मनमाना किराया वसूलते हैं यात्री बिना नेम प्लेट बैज बिल्ला के पहचान के अभाव में शिकायत भी नहीं कर पाते और न ही इनकी पुलिस में रिपोर्ट ही कर पाते है यात्रियों ने क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी एवं जिला पुलिस अधीक्षक, कलेक्टर से अनुरोध किया है कि यात्री बसों में चलने वाले चालक परिचालक क्लीनर की ड्रेस अनिवार्य की जाए एवं ड्रेस पर नेम प्लेट व बैच बिल्ला लगाए जाएं जिससे यात्रियों को इनकी पहचान सुनिश्चित हो सके और इनसे यात्रियों को होने वाली परेशानी दूर हो सके।



