रंग-बिरंगे कपड़ों में बीत गया पूरा सत्र, शैक्षणिक सत्र समाप्ति की ओर पर अब तक यूनिफॉर्म नहीं मिली छात्रों को
रंग-बिरंगों कपड़ों में पढ़ाई करते स्कूली बच्चे, पांच साल से पहन रही एक ही पुरानी ड्रेस
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन । शासकीय प्राईमरी मिडिल स्कूल के गरीब छात्र छात्राओं को यूनिफार्म वितरित नहीं की गई है।जिससे जब मीडियाकर्मियों ने जब कन्या प्राथमिक स्कूल पाटनदेव, मिडिल स्कूल कलेक्ट्रेट कॉलोनी वार्ड 4 रायसेन जैसे कई स्कूलों में बच्चे रंग-बिरंगे कपड़ों में बैठे मिले। छात्र-छात्राओं का कहना था कि हम भी प्राइवेट स्कूल की तरह अच्छी यूनिफॉर्म क्यों नहीं पहन सकते। हमारी इच्छा है कि हम भी स्कूल की पहचान दिलाने वाली यूनिफॉर्म पहनें पर ऐसा क्यों नहीं हो पा रहा। थोड़ी बहुत राशि हमारे घर के लोग भी मिला सकते हैं। यहां एक छात्रा ने बताया कि उसे दो वर्ष पूर्व कक्षा तीन में यूनिफॉर्म मिली थी और उसी पुरानी यूनिफॉर्म को पहनकर वह अब कक्षा आठवीं में आ रही है।
रायसेन जिले के किसी भी ब्लॉक या शहर के सरकारी प्राइमरी और मिडिल स्कूल में चले जाओ आपको अधिकतर बच्चे बगैर स्कूल ड्रेस के मिल जाएंगे। इसकी वजह ये है कि शैक्षणिक सत्र 17 जून से शुरू हो गया था और अब समाप्ति की ओर आ गया है। इसके बाद भी अभी तक न तो छात्र-छात्राओं को ड्रेस मिल पाई है और न ही उनको ड्रेस का पैसा।
प्राप्त जानकारी अनुसार, रायसेन जिले में एक से आठ तक के शासकीय स्कूलों की संख्या , रायसेन जिले में शासकीय प्रायमरी स्कूलों की संख्या-1330
मिडिल स्कूलों की संख्या-555
कुल संख्या-1885 है कक्षा 6 से 8 तक के स्कूल में 80 हजार बच्चे पढ़ते हैं और शासकीय प्रायमरी स्कूलों में लगभग लगभग 70 हजार से अधिक बच्चे पढ़ने आते हैं। इस वर्ष लगभग डेढ़ लाख बच्चों को ड्रेस बांटे जाने का निर्णय हुआ था।
इस संबंध में एसके उपाध्याय डीपीसी का कहना है कि इस बार यूनिफॉर्म एनआरएलएम के जरिए बंटना है। अगले सत्र के लिए ड्रेस बांटने का काम अभी से शुरू हो गया है।


