खंडहरों में होने को है तब्दील शासकीय शिक्षा भवन हो रहा है लाखों का गबन
रिपोर्टर : अशोक सोनी
बरेली। शासकीय शिक्षा भवनों को वैसे तो शिक्षा का मंदिर कहा जाता है पर आज इनकी दुर्दशा पर शिक्षा की देवी भी आंसू बहा रही होगी बता दें कि दीपावली के अवसर पर शासकीय भवनों की पुताई और मरम्मत के लिए प्रदेश सरकार के द्वारा अच्छी खासी मोटी रकम आती है, लेकिन शिक्षक अधिकारियों की मिलीभगत से यह पुताई की राशि हजम कर ली जाती है जबकि शासकीय स्कूल प्राथमिक शालाओं में सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 30 से 35 हजार रुपए की राशि सरकार द्वारा दी जाती है जिस से शासकीय भवनों की पुताई और मरम्मत की जा सके। माध्यमिक शालाओं में 35 हजार रुपए से लेकर 40 हजार रुपए की राशि हर वर्ष आती है, लेकिन जिले के अधिकतर शासकीय स्कूलों के भवनों की पुताई 2 वर्ष से नहीं हुई तो सरकारी बजट कहां चला गया और सरकारी भवनों की पुताई एवं मरम्मत क्यों नहीं की गई गंभीर बात का विषय है ? दर असल जो राशि आती है वह नकली बिल लगाकर निकाल ली जाती है, जिसमें सभी अधिकारियों की मिलीभगत रहतीं हैं, शासकीय स्कूलों के शिक्षक अधिकारियों से तालमेल करके यह राशि गोलमाल कर देते हैं।
पुताई के नाम पर जो राशि आती है वह भी शासकीय स्कूलों में नहीं लगाई जाती, जबकि शिक्षकों की महीने की सैलरी लगभग 40 हजार से लेकर 70 हजार प्रतिमाह है उसमें भी शिक्षकों की आत्मा संतुष्ट नहीं होती जो शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले शासकीय स्कूल भवनों की राशि को डकारने से परहेज नहीं कर रहे और प्रदेश सरकार द्वारा दिए गए भवन निर्माण और सौंदर्यकरण की राशि का गबन सरकारी कर्मचारी कर रहे हैं। यदि ऐसा ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब शासकीय स्कूल भवन खंडहरो में तब्दील होते दिखाई देंगे।



