क्राइम

वनांचल में अवैध शराब सहित नशे का कारोबार जोरों पर

आबकारी और पुलिस विभाग की संलिप्तता के बगैर मुमकिन नहीं
सिलवानी। देश के भावी नागरिक माने जाने वाले युवा और किशोर तो पहले से ही व्यसनों के शिकंजे में आकर पतन की राह पर अग्रसर हो रहे थे लेकिन अब यही नशा मासूम बचपन को अपनी चपेट में लेता जा रहा है। सिलवानी तहसील के हर गांव में देशी, विदेशी शराब सहित सभी प्रकार का नशा आसानी से उपलध हो सकता है, जिसे देखकर कहने में कोई गुरेज नहीं कि अवैध नशे का फलता फूलता व्यापार बिना पुलिस अमले और आबकारी विभाग के संरक्षण के चलते संभव हो? लेकिन जन प्रतिनिधियों से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों का इस ओर कोई ध्यान नहीं है, और जिसका खामियाजा कई बार गरीब आदिवासियों को अपनी जान देकर उठाना पड़ता है। देशी-विदेशी शराब जैसे मादक पदार्थों के उपयोगकर्ताओं की संख्या पिछले दो दशकों से लगातार बढ़ रही है लेकिन दूसरी ओर नशे के ऐसे-ऐसे अनुभूत नुस्खे खोजे और सुझाए जाने की परंपरा भी चल पड़ी है जो हालातों को नियंत्रण से बाहर बनाने का काम कर रही है। जहां तक युवा और किशोर वर्ग का सवाल है मोटे तौर पर माना जा सकता है कि किशोर वर्ग से तरूणाई की ओर बढ़ते तथा तरूणाई से युवावस्था की ओर अग्रसर होते 50 से 60 फीसदी नौजवान किसी न किसी तरह के नशे का शिकार बन चुके हैं। फिलहाल, जो नजारे नजरों के सामने आ रहे हैं वह चैंकाने वाले भी हैं और चेताने वाले भी। पूरे वनांचल में जगह जगह देशी, विदेशी शराब, जैसा अवैध और जानलेवा नशा बिकने की खबर सामने आती रहती है बावजूद पुलिस और आबकारी विभाग द्वारा कोई ठोस पहल नहीं की जाती है, और नशे के फैले जाल के चलते जहां कई घर बर्बाद हो रहे है वहीं नवयुवक इसके जाल में फंसकर गुनाहों की दुनिया में पहुंच जाते हैं। साथ ही जहरीली शराब के सेवन से लोगों को अपनी जान तक गंवाना पड़ जाती है।
जनप्रतिनिधि करें जनता को जागरूक
इन व्यसनों से दूर करने के लिए वनांचल के वाशिन्दों और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों को आगे आकर क्षेत्र में फैली बुराई को मिटाने का संकल्प लेते हुए जनता को जागरूक करना होगा। इस लत को युवाओं से दूर करने के लिए अब केवल प्रशासन पर आश्रित होने से कुछ हासिल होने वाला नहीें। बाल, किशोर तथा युवा पीढ़ी में व्यसनों के प्रति बढ़ता आकर्षण समाप्त होना मुश्किल है लेकिन अभिभावक अपने बच्चों पर निगरानी रखते और समयोचित समझाइश देते हुए व्यसनियों की संख्या में होने वाली बढ़ोत्तरी को काफी हद तक कम कर सकते हैं। घर-परिवार और समाज के प्रबुद्ध लोगों को जागरूकता बरतते हुए युवाओं तथा किशोरों पर सत निगाह रखनी चाहिए ताकि वे आजादी को उन्मुक्तता समझने से बचें और उस हद तक मदहोश व संकोचहीन न हों जितने कि आज प्रत्यक्षतः दिखाई दे रहे हैं। पूरे समाज और परिवेश को कोई भी नहीं सुधार सकता। सुधार और निगरानी की पहल और प्रयास अपने घर-परिवार और आसपास से शुरू हों तो अभ्यस्त तरूणाई को किसी स्तर तक काबू में लाते हुए भावी पीढ़ी को नशे के अभिशाप से बचाया जाना संभव है। व्यसनों का सीधा संबंध स्वास्थ्य से है। नई नस्ल में नशे का लगातार बढ़ता आकर्षण भयावह स्थिति को जन्म दे रहा है। इससे पहले कि हालात विस्फोटक हों शासन-प्रशासन और समाज को सामूहिक रूप से पहल करते हुए काबू पाने का प्रयास करना होगा।
पुलिस ओर आबकारी पर भी लगे अंकुश
युवाओं में फैली नशे की लत को मिटाने के लिए शासन और प्रशासन को भी वनांचल के अलग अलग क्षेत्र में पदस्थ जिम्मेदार आबकारी और पुलिस विभाग के नुमाईन्दों को भी पाबंद करना होगा कि यदि उनके क्षेत्र से नशे का कारोबार पकड़ा जाता है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। तो मुमकिन है कि नशे पर कुछ हद तक रोक लगाने में सफलता हासिल हो सके।
सार्वजनिक दुष्परिणाम
छुटपुट आपराधिक घटनाओं और बाल अपराधियों की संख्या में इजाफा।
नाकारा और रोगग्रस्त नागरिकों की तादाद में बेतहाशा बढ़ोत्तरी।
सार्वजनिक सपत्तियों सहित आम नागरिकों की जान-माल को संभावित खतरा। घर-परिवार में कलेश और समाज तथा क्षेत्र में हिंसक घटनाओं में वृद्घि।
तनाव और कुंठाग्रस्त लोगों की दिनों-दिन बढ़ती तादाद और त्रासदियों की आशंकाएं।
सामाजिक, आर्थिक व पारिवारिक अपराधों सहित सड़क दुर्घटनाओं को बढ़ावा।
इस संबंध में थाना प्रभारी भारत सिंह ने बताया कि अवैध शराब बिक्री की सूचना होने पर लगातार कार्यवाही की जाती है । कल ही अवैध प्रकरण के तीन प्रकरण बनाए गए है

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