वर्षा ऋतु के समापन का संकेत देते हैं कांस के फूल
ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज। इन दिनों कास के फूल खूब इतरा रहे हैं, सफेद रंग का फूल लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है कांस का फूल वर्षा ऋतु के समापन को बताता है। पहाड़ी क्षेत्र, नदी- तालाब के तट, खेतों के मेढ़ों से लेकर बांध, पोखर, पगडंडियां इस समय कांस के फूलों से सजकर इतराते रहीं हैं। बलखाते कांस के फूल लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं, चारागाह की जमीन हो, खेतों के मेड़ हो, गांवों की पगडंडिया हो या जलाशयों के किनारा हो जैसे सबने कांस के घास और फूलों का तोरण-द्वार तैयार कर रखा है, हरियाली की चादर में टांके गये कास के सफेद फूलों का गोटा प्रकृति की अपने अनुपम श्रृंगार की सुंदर झलक है।
कांस के फूलों के साथ खूब हो रहा फोटो सेशन:- यही रंग उत्सव का है, चहुंओर खुशी का है, खुशहाली का है यही दो रंग में धन, धान्य, वैभव, शांति और उन्नति का भाग्य निहित है, बड़ी संख्या में लोग इन कांस के फूलों के साथ फोटो सेशन भी कर रहे हैं। अमूमन देखा जाता है कि कांस के ये फूल सितंबर के आखिर से लेकर अक्टूबर माह में उगते हैं। कांस के फूल वर्षा ऋतु के समापन और शरद ऋतु के आगमन का संकेत देते हैं।
श्री रामचरितमानस की पंक्ति वर्षा विगत शरद रितु आई, देखहूं लक्ष्मण परम सुहाई, फूले कांस सकल मही छाई, जनु बरसा कृत प्रकट बुढा़ई “में भी इसका उल्लेख है। इसका अर्थ है कि बारिश अब बूढ़ी हो चुकी है। आमतौर पर कांस के फूल खाली जमीन पर खुद ही उग जाते हैं। यह कहीं भी एक साथ इतने अधिक मात्रा में नहीं पाए जाते हैं। 15-20 पौधों की झुंड में निश्चित दूरी पर इन्हें देखा जा सकता है। क्षेत्र में अलग अलग एरिया में इस तरह कांस के फूलों को देखा जा सकता है। कांस एक तरह की गन्ने की प्रजाति है। इसका वैज्ञानिक नाम वाइल्डशुगरकेन है। यह एक ऐसा पौधा है जिसे जानवर भी नहीं खाते और यह स्वत: ही खाली जमीन पर उग आते हैं। पुराने जमाने में कांस के फूलों से गद्दा बनाने का काम किया जाता था।



