नहाय खाय संग आस्था के महापर्व छठ की हुई शुरुआत, पूर्वांचल के लोगों में उत्साह
सिलवानी । छठ सूर्योपासना का पर्व है. ब्रह्मांड का चराचर जीव भगवान सूर्य से ऊर्जा पाते हैं। पृथ्वी पर जीवन भगवान भास्कर के कारण ही संभव है। पूर्वांचल ही नहीं, अब दूसरे प्रदेशों में भी जहां पूर्वांचल के लोग बसे हैं वहां पूरे भक्ति भाव से छठ त्योहार मनाया जाता है। सौभाग्य, आरोग्य, शांति, खुशहाली, संतान प्राप्ति की कामना के पासना का पर्व है। सौभाग्य, आरोग्य, शांति, खुशहाली, संतान प्राप्ति की कामना के साथ छठ व्रती चार दिनों तक उपासना में लीन रहते हैं।
छठ महापर्व बना राष्ट्रीय त्यौहार: यह महापर्व सिर्फ बिहार एवं उत्तर प्रदेश का त्यौहार नहीं है, बल्कि इसने राष्ट्रीय एवं वैश्विक रूप ले लिया है। हजारों किमी दूर स्थित पूर्वांचल के लोगों में भी पर्व के प्रति अगाध श्रद्धा है। विदेशों तथा देश के विभिन्न भागों में रह रहे पूर्वांचल के लोगों को अब उन्हें छठ पूजन सामग्री भी ऑनलाइन उपलब्ध होने लगी है।
चार दिवसीय छठ महोत्सव की शुरुआत 28 अक्टूबर (शुक्रवार) को नहाय खाय से हुई। इस दिन छठ व्रतियों एवं उनके परिजनों द्वारा घर की सफाई कर शुद्ध किया। इसके बाद छठव्रती स्नान कर शुद्ध सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत की शुरुआतकी. व्रत का भोजन ग्रहण करने के बाद घर के बाकी सदस्य भोजन ग्रहण करेंगे. छठ महापर्व के दूसरे दिन 29 अक्टूबर (शनिवार) को खरना का आयोजन हुआ। जिसके बाद सुबह व्रती स्नान ध्यान करके पूरे दिन का व्रत रखा . इस दिन संध्याकाळ व्रतियों द्वारा मिट्टी के बने नए चूल्हे आम की लकड़ी से पूजा के लिए गुड़ से बनी खीर एवं गेहूं की रोटी का प्रसाद का भोग लगाया। इस प्रसाद को ग्रहण करने के बाद छठ व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास होगा. खरना के अगले दिन छठ व्रतियों के घरों में भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए प्रसाद भी बनाया गया
छठ महापर्व के तीसरे दिन 30 (रविवार) कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को व्रती महिलाएं एवं पुरुष अस्ताचलगामी सूर्य देव को अर्घ्य दिया। छठ महापर्व का समापन 31 अक्टूबर (सोमवार) को श्रद्धालुओं द्वारा उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के पश्चात समाप्त होगा।
नगर के टेकरी मंदिर पर छठ महापर्व का आयोजन हुआ । कोरोना महामारी के दो साल बाद इस वर्ष नगर में छठ महापर्व का आयोजन बिना किसी प्रतिबंध के आयोजित किया जा रहा है. जिसके कारण नगर के पूर्वांचल के निवासियों में विशेष उत्साह है।


