श्रीमद् भागवत, गीता, रामायण आदि धर्म ग्रंथ मनुष्य को भगवान से मिलाने का कार्य करते है : पडित रेवाशंकर शास्त्री
जव तक इंसान की मन, वाणी व क्रियाए एक नही होगी तव तक भगवान की प्राप्ति होंना संभव नही है
भागवत कथा के प्रथम दिवस पर साधु संतों की अगुवाई में निकाली भव्य कलश शोभा यात्रा
साईंखेड़ा । ग्राम सांईखेड़ा में प्राचीन श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में पंडित रेवाशंकर शास्त्री के मुखारविंद्र से श्रीमद् भागवत कथा का श्रद्धालुओं को रसास्वादन किया जायेगा ।
कथा प्रारभं होने से पूर्व ग्राम में कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा विभिन्न मार्गो से होती हुई प्राचीन श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर कार्यक्रम स्थल तक पहुंची। यहां पर कथा वाचक ने माता को बालक की प्रथम गुरु बताया तथा कहा कि माता पिता ही बालक को संस्कारित बनाते है। यदि माता पिता बालक को संस्कार नही दे सके तो बड़ा होकर बालक गलत रास्ते को आत्मसात कर सकता है। बालक के ऐसा किए जाने से अभिभावको को आत्मग्लानि का सामना करना पड़ता प्रारंभ में श्रीमद् भागवत कथा कराने वाले यजमान धनराजसिंह रघुवंशी उनके परिजनों एव श्रद्वालुओं के द्वारा व्यास गादी की पूजा अर्चना के साथ कथावाचक पंडित रेवाशंकर शास्त्री को शाल श्रीफल भेंट कर तिलक लगाकर स्वागत किया गया।
भागवत कथा के प्रथम दिवस के अवसर पर कथा व्यास पंडित रेवाशंकर शास्त्री ने हुए कहा कि श्रीमद् भागवत, गीता, रामायण आदि धर्म ग्रंथ मनुष्य को भगवान से मिलाने का कार्य करते है। पडित रेवाशंकर शास्त्री ने कहा कि परमात्मा इंसान क प्राणों का स्वामी होता है। ऋषि, मुनियों, साधु संतो आदि महापुरुषों की शरण में जाए बगैर भगवत भक्ति तथा कृपा प्राप्त नही हो सकती है, मनुष्य कितना ही भजन, पूजन, जप, तप कर ले। लेकिन उसे महापुरुषों की कृपा प्राप्त करना ही पड़ेगी। जव तक इंसान की मन, वाणी व क्रियाए एक नही होगी तव तक भगवान की प्राप्ति होंना संभव नही है।
श्रीमद भागवत कथा की सार्थकता जब ही सिध्द होती है जब इसे हम अपने जीवन में व्यवहार में धारण कर निरंतर हरि स्मरण करते हुए अपने जीवन को आनंदमय, मंगलमय बना कर अपना आत्म कल्याण करें। अन्यथा यह कथा केवल मनोरंजन कानों के रस तक ही सीमित रह जाएगी । भागवत कथा से मन का शुद्धिकरण होता है। इससे संशय दूर होता है और शांति व मुक्ति मिलती है। इसलिए सद्गुरु की पहचान कर उनका अनुकरण एवं निरंतर हरि स्मरण, भागवत कथा श्रवण करने की जरूरत है यह उद्गार पंडित रेवाशंकर शास्त्री द्वारा भागवत कथा के प्रथम दिवस पर कथा श्रवण कर रहे भक्तों कथा का महत्व बताते हुए कहा कि श्रीमद भागवत कथा श्रवण से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट होकर प्राणी मात्र का लौकिक व आध्यात्मिक विकास होता है। जहां अन्य युगों में धर्म लाभ एवं मोक्ष प्राप्ति के लिए कड़े प्रयास करने पड़ते हैं, कलियुग में कथा सुनने मात्र से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। सोया हुआ ज्ञान वैराग्य कथा श्रवण से जाग्रत हो जाता है।कथा कल्पवृक्ष के समान है, जिससे सभी इच्छाओं की पूर्ति की जा सकती है।



