मध्य प्रदेश

सरपंच पति की तानाशाही से महिला मेट परेशान, महिला मेट को निकालकर अपनी लड़की को दिया रोजगार

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत सनकुई इन दिनों सुर्खियां बटोर रही है। महिला मेट सुनीता विश्वकर्मा को निकालकर सरपंच माया बाई लोधी ने अपनी लड़की को रोजगार दे दिया। जो कि नियमानुसार अपने- सगे संबंधियों को कम फायदा एवं जनता को ध्यान में रखते हुए ज्यादा योजनाओं एवं मनरेगा का काम देना चाहिए ताकि जनता ने जिस माध्यम से आपको चुना है उसका चुनना आपको सार्थक लगे। लेकिन ग्राम पंचायत सनकुई में तो कुछ और देखने को मिल रहा है। सूत्रों ने बताया कि सुनीता विश्वकर्मा को मेट से इसलिए निकाल दिया क्यूँकि सुनीता विश्वकर्मा जागरूक महिला है। ना भ्रष्टाचार करती और ना ही भ्रष्टाचार करने देती इसलिए सरपंच ने होशियारी पूर्वक मेट सुनीता विश्वकर्मा को निकाल दिया और अपनी लड़की को मेट के रूप में रख लिया ताकि भ्रष्टाचार होता भी रहेगा तो कानो कान किसी को खबर नहीं लगेगी और सरकार को लाखों का चूना भी लगता रहेगा। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की शुरुआत बेरोजगार गरीबों के कल्याण के लिए की गई थी, लेकिन सरकार के विकास की यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। कहीं फर्जी जाब कार्ड बनाकर गरीबों के हक की रकम अमीरों के हवाले कर दी गई, तो कहीं कागजों में विकास की गंगा बहाकर धन का गबन हुआ। आम तौर पर माना जाता है कि नरेगा कार्य की निगरानी से अनियमितता एवं भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सकता है. लेकिन निगरानी की एक सीमा है और इस तरह की निगरानी में समुदाय की भागीदारी नहीं होती. समय-समय पर सोशल ऑडिट या जमीनी स्तर पर कभी-कभी सक्रिय कार्यकर्ताओं द्वारा जांच के माध्यम से अनियमितता का खुलासा होता है. लेकिन इस तरह की निगरानी में ठेकेदार- बिचौलियों से टकराहट की संभावना ज्यादा रहती है और चूंकि निगरानी में समुदाय की भागीदारी नहीं रहती इसलिए जांच के कुछ दिनों बाद फिर से अनियमितता वैसे ही होने लगती है। मनरेगा में भ्रष्टाचार करने वालों पर केंद्र सरकार सीधे कार्रवाई करेगा। इसके तहत आरोपियों से भ्रष्टाचार के तहत हड़प की गई रकम की वसूली की जाएगी।खास बात यह है कि रकम वसूली के लिए यदि राज्य सरकार आनाकानी करती है तो केंद्र न सिर्फ सीधे रकम वसूली करेगा बल्कि दोषियों को कानूनी सजा भी देगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मनरेगा में भ्रष्टाचार की शिकायत और जांच के बाद मामला सही पाए जाने के बाद भी अभी तक कार्रवाई के लिए केंद्र को राज्य सरकार पर निर्भर रहना पड़ता है।हालांकि केंद्र सरकार कई दफा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए राज्यों को जारी होने वाले फंड को कुछ समय तक के लिए रोक देता है। लेकिन यह कार्यवाही मामले का हल नहीं है क्योंकि इससे मनरेगा कामगारों को काम मिलना ही बंद हो जाता है। राज्यों को केंद्र पर राजनीतिक हमला करने का मौका भी मिल जाता है। मेट सुनीता विश्वकर्मा के द्वारा बताया गया कि मैंने प्रशिक्षण भी प्राप्त किया है लेकिन इसके बावजूद भी मुझे मेंट से निकाल दिया गया हैं। सूत्रों के द्वारा बताया गया कि सरपंच तो ग्राम पंचायत में महिला है पर सारे काम सरपंच पति के द्वारा किए जा रहे है जहां सरकार महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए तरह-तरह की योजनाएं निकाल रही है पर जमीनी स्तर पर देखा जाए तो हर जगह पर महिलाओं की जगह पर उनके पति उनके पदभार को संभाल रहे हैं।

Related Articles

Back to top button