सिद्व चक्र महामंडल विधान के तहत नगर में निकली गई भव्य भरत चक्रवर्ती दिग्विजय यात्रा
साधु व श्रावक व एक दूसरे के पूरक होते हैः- मुनि विलोक सागर महाराज।
सिलवानी । श्रावक व साधु का एक जोडा होता है। दोनो ही एक दूसरे के पूरक होते हैं। साधु के बगैर श्रावक का जीवन अर्थहीन होता है बल्कि श्रावक ना हो तो साधु ना तो धर्म उपदेश दे सकता है और ना ही भगवान की वाणी का प्रचार प्रसार ही कर सकता है। साधु व श्रावक एक रस्सी के दो सिरे होते है।
यह उद्गार आचार्य विद्यासागर, आचार्य आर्जव सागर महाराज के शिष्य मुनि विलोक सागर महाराज ने व्यक्त कए। वह सिद्व चक्र महामंडल विधान के तहत शनिवार को कार्यक्रम में मौजूद समाजजनो को संबोधित कर रहे थेे। मुनिश्री ने कहा कि श्रावक के संयम की परीक्षा उस समय होती है जव साधु, श्रावक के यहां आहार लेने जाता है। संयमी श्रावक ही साधु को आहार देने का अधिकारी होता है। संयमहीन श्रावक के मन मे कभी भी साधु केा आहार देने के विचार नही आ सकते है। संयम एक साधना है। जिस पर सात्विक व्यक्ति ही चल सकता है। श्रावक को हमेशा संयमी रह कर धर्म कार्य करते रहना चाहिए ।
उन्होने भरत चक्रवर्ती की दिग्विजय यात्रा को लेकर बताया कि भरत को जैन ब्रह्माण्ड विज्ञान के वर्तमान आधे चक्र का पहला चक्रवर्ती माना जाता है । भगवान ऋषभनाथ ने जब जैन मुनि बनकर दीक्षा ली उसके पूर्व अपने सौ पुत्रों को अपना राज्य वितरित किया था भरत को अयोध्या का राज्य मिला जबकि बाहुबली को पोदनापुर का राज्य मिला । भरत राज्याभिषेक के पश्चात विश्व विजय की लंबी यात्रा पर निकल गये और सभी दिशाओं में जीत हासिल कर सबसे अनमोल खजाने चौदह रत्नों के साथ अपनी विश्व विजय यात्रा पूरी करने के बादए अपनी राजधानी अयोध्यापुरी के लिए एक विशाल सेना और दिव्य चक्र.रत्न के साथ बापिस लौट कर आऐ । तो चक्र रत्न रूक गया और संकेत मिला कि अभी अपने 99 भाई पर भी विजय प्राप्त करो और भरत ने अपने सभी को संदेश दिया कि आप हमारी अधीनस्थता स्वीकार करें उनमें से 98 भाइयों ने अपना राज्य भाईयों भरत को सौंपकर दीक्षा धारण कर मुनि वन जंगल चले गये लेकिन बड़े भाई बाहुबली ने आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया तो भरत ने उनको युद्ध के लिये ललकारा। दोनों भाईयों के युद्ध में आम जन मानस और सैन्यवल के रक्तपात से बचने के लिये भरत और बाहुबली के बीच नेत्र. युद्ध, जल. युद्ध और माला. युद्ध हुआ। अंत में बाहुबली ने तीनों मुकाबले जीत जाते हैं ।
निकली गई भव्य भरत चक्रवर्ती दिग्विजय यात्रा:- दोपहर के समय नगर में भव्य भव्य भरत चक्रवर्ती दिग्विजय यात्रा निकाली गई। भरत चक्रवर्ती बने निर्मल बजाज व सुलोचना बजाज राजसी भेषभूसा में रथ पर सवार होकर शाही अंदाज में नगर भ्रमण पर निकले। इस मौके पर अनेको स्थानो पर यात्रा का स्वागत किया गया। रात्रि में महाआरती का कार्यक्रम संपन्न किया गया ।

