सिध्द चक्र महामंडल विधान में मुनि श्री के सानिध्य में तीर्थंकर बालक के जन्म की खुशियां मनाई गई
ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
दमोह । श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के तृतीय दिवस पूज्य मुनिश्री विलोक सागर जी महाराज मैं अपने मांगलिक प्रवचनों में कहा की तीर्थ कर भगवान ने जन्म लेकर हजारों जीवों का कल्याण किया हम सभी को अपना जन्म दिवस ना मना कर भगवान का जन्म कल्याणक मनाना चाहिए जिन्होंने हम जैसे जीवो को मोक्ष के मार्ग पर चलने का रास्ता प्रशस्त किया। भगवान का जन्म के समय सौधर्म इंद्र के द्वारा अभूतपूर्व उत्साह के साथ भक्ति की गई थी। उसी उत्साह के साथ आज भी नंदीश्वर दीप में विराजमान सिद्ध परमेष्ठी भगवानों की पूजन एवं भक्ति देव करते हैं। मुनि श्री ने कहा कि उसी उत्साह एवं भक्ति के साथ हमें भी यह सिद्ध परमेष्ठीयों की आराधना करना चाहिए। विधान के तृतीय दिवस 32 अर्घ्य समर्पित किए गए साथ ही भगवान के जन्म कल्याण का मंच पर कलाकारों द्वारा सोधर्म इंद्र श्रेयांश लहरी सची इंद्राणी नें तीर्थंकर भगवान को लेकर भक्ति आराधना की। आज नेमी नगर जैन मंदिर से आये भक्तों के द्वारा समवसरण में द्रव्य समर्पित की गई। पूज्य मुनि श्री के पाद प्रक्षालन का सौरभ जैन परिवार एवं नेमी नगर जैन मंदिर से पधारे भक्तजनों ने किया।
इस अवसर पर कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के पूर्व अध्यक्ष संतोष सिंघई, चक्रेश सराफ, संजय सराफ, राजेश हिनौती, सुनील क्राकरी, मनीष बजाज, नवकार महिला मंडल की स्मिता जैन, रिंकी, सरिता जैन, शील रानी नायक, रिंकी निराला एवं अन्य सभी समाज जनों की उपस्थिति रही। सभी भक्तजनों ने भगवान की स्तुति आराधना कर पुण्य अर्जन किया।



