मध्य प्रदेश

स्कूलों की मरम्मत का खेल : नया शिक्षा सत्र 20 जून से, जर्जर स्कूल भवनों में ही लगेंगी कक्षाएं

रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन । स्कूल शिक्षा विभाग हर साल शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रहा है।लेकिन सरकारी स्कूलों की हालत ठीक नहीं है। कहीं भवन की छतों से प्लास्टर झड़ रहा है तो कुछ की दीवारें क्षतिग्रस्त हो गई है। किसी में बारिश का पानी टपकता है। लापरवाही का आलम यह है कि हर माैसम में विद्यार्थियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई गांवाें के स्कूलों में तो उचित क्षमता वाले भवन तक नहीं हैं।ऐसी समस्या से जूझ रहे इन स्कूलों में ही फिर से नया सत्र 20 जून से शुरू होने वाला है।
मीडियाकर्मियों ने रायसेन शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में पहुंचकर इन स्कूलों का जायजा लिया तो उनकी यह स्थिति सामने आई है। स्कूल खुलने से पहले शिक्षकों ने आना पशुरू कर दिया है, जो अपने स्तर पर स्कूलों की साफ सफाई करवा रहे है। स्कूलों में मिले शिक्षकों ने बताया कि किसी स्कूल में प्लास्टर गिर रहा तो कहीं दीवारों में आईं दरारें, बारिश के दिनों में छत से टपकता है पानी ।
जिले के स्कूलों के ऐसे हैं हालात: जहां मरम्मत या पुताई हुई, वहां भी स्थिति ठीक उलट
प्राथ. शाला खरगावली: दो अतिरिक्त कक्षों में लगती हैं पांच कक्षाएं
खरगावली गांव का प्राथमिक स्कूल भवन 60 साल पुराना है, जो पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। इसमें अब कक्षाएं नहीं लगाई जा रही है। 15 साल पहले दो अतिरिक्त कक्ष बनाए गए थे। इन्हीं दाे कक्षाें में पहली से 5 वीं तक की कक्षाएं एक साथ लग रही हैं।इसी तरह भादनेर की पठार पर भी अतिरिक्त मिडिल स्कूल भवन खंडहर में बदल चुका है।यहां पर 65 बच्चे अध्ययनरत हैं, लेकिन इन कक्षाें की छत से भी प्लास्टर गिर रहा है। स्कूल के शिक्षक मोहर सिंह ने बताया कि पांच साल से न तो भवन की मरम्मत हुई है और न ही पुताई। बारिश में छत से पानी टपकता है।पुराने भवन को तोड़ने के लिए कई बार पत्र लिख चुके हैं, लेकिन उसे अब तक नहीं तोड़ा जा सका है।
माध्य. स्कूल कलेक्ट्रेट काॅलोनी: बनने के साथ ही भवन में आईं दरारें….
शहर के अंदर कलेक्ट्रेट काॅलोनी में एक ही परिसर में प्राथमिक, माध्यमिक और हाईस्कूल का संचालन किया जा रहा है। 2019 में माध्यमिक स्कूल के लिए दो अतिरिक्त कक्ष बनाए गए थे, जो बनने के साथ ही दरक गए हैं। कोरोना काल में स्कूल बंद रहे, जैसे ही एक साल पहले स्कूल खुले तो उसमें पांच महीने भी कक्षाएं नहीं लगाई जा सकीं। खतरा भांपकर स्कूल के प्राचार्य ने उनके कमरे में ताले डलवा दिए हैं और उसमें कक्षाएं लगाना बंद करवा दिया है। माध्यमिक स्कूल की कक्षाएं प्राथमिक स्कूल में लगाना पड़ रही हैं।
तीन-तीन लाख रुपए में सिर्फ पुताई की औपचारिकता में ही पूरी राशि खर्च……
जिले के 185 हाईस्कूल और हायर सेकंडरी स्कूलों की रंगाई-पुताई व मरम्मत के लिए 3-3 लाख रुपए की राशि शासन से मिली है।लेकिन इस राशि से स्कूलों में सिर्फ पुताई की औपचारिकता ही गई है और पूरी राशि खर्च होना दर्शा दिया गया है। खरगावली के हाइस्कूल में पुताई करने वाले ठेकेदार को 1.50 लाख से ज्यादा का भुगतान हो गया है। स्कूल की पुताई देखकर लगता ही नहीं है कि उसकी पुताई हुई है। प्राचार्य ज्योति जैन ने बताया कि ठेकेदार को काम के अनुसार भुगतान किया गया है।
130 स्कूलों को ही मिली डेढ़ करोड़ की राशि……
जिले भर में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के करीब 2073 स्कूल हैं। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा जिले के सिर्फ 140 माध्यमिक स्कूलों के लिए 3 करोड़ 48 लाख 86 हजार रुपए की राशि मरम्मत के लिए स्वीकृत की गई है।लेकिन इसमें से भी 130 माध्यमिक स्कूलों को 1 करोड़ 44 लाख 20 हजार रुपए की पहली किस्त ही मिल पाई है।जबकि 1933 स्कूलों को किसी प्रकार की राशि नहीं मिली है। ऐसी स्थिति में नया शिक्षा सत्र खस्ता हाल भवनों में ही शुरू करने की तैयारियां चल रही हैं।
एसके उपाध्याय, डीपीसी रायसेन का कहना है कि जिले भर में 118 स्कूल भवन खंडहर हालत में है, जिन्हें जमींदोज किया जाना है।जिसके लिए लोनिवि भी पत्र भी लिख चुके है। जिले के 140 माध्यमिक स्कूलों की मरम्मत के लिए पहली किस्म के रूप में डेढ़ करोड़ की राशि प्राप्त हुई है।उससे स्कूलों में काम करवाने के लिए प्रधानाध्यपकों को निर्देश दिए गए हैं।
इस संबंध में एमएल राठौरिया, जिला शिक्षा अधिकारी रायसेन का कहना है कि जिले के 185 हाईस्कूल और हायर सेकंडरी स्कूलों में पुताई व मरम्मत के लिए तीन-तीन लाख रुपए की राशि प्राप्त हुई थी। इसमें से 90 फीसदी स्कूलों में काम पूर्ण करा लिया है। शेष बचे स्कूलों में प्राचार्यों को जल्द काम करवाने के निर्देश दिए हैं।

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