मध्य प्रदेश

कैलाश मकवाना होगे एमपी के नए डीजीपी, आदेश जारी

सीएम के विदेश जाते ही आधी रात को आदेश
1 दिसंबर को संभालेंगे पदभार

भोपाल । मध्यप्रदेश के नए डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी कैलाश मकवाना होंगे। सीएम डॉ. मोहन यादव के विदेश यात्रा पर जाने के बाद शनिवार देर रात गृह विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए है।
वे एक दिसंबर को कार्यभार ग्रहण करेंगे। वह एमपी के 32 वे डीजीपी होगे।
कैलाश मकवाना 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. उनकी नियुक्ति 30 अगस्त 1988 को हुई थी. अब जब मध्य प्रदेश के डीजीपी सुधीर सक्सेना का कार्यकाल 30 नवंबर को खत्म हो रहा है। इसके बाद मकवाना कार्यभार संभालेंगे।
मूल रूप से मध्य प्रदेश के रहने वाले कैलाश मकवाना काफी पढ़े-लिखे हैं. ips.gov.in पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कैलाश मकवाना ने बीई किया है. इसके अलावा एमटेक की भी पढ़ाई की है. कैलाश मकवाना के एक्स प्रोफाइल पर उन्होंने खुद को आईआईटी से एमटेक बताया है।
कैलाश मकवाना वर्तमान में मप्र पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन के चेयरमैन हैं। अब वे एमपी के 32 वें डीजीपी होंगे। आदेश के मुताबिक मकवाना 1 दिसंबर 2024 को प्रदेश के नए पुलिस मुखिया के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे। वे वर्तमान डीजीपी सुधीर सक्सेना की जगह लेंगे। मकवाना दिसंबर 2025 में रिटायर होंगे।
बता दें कि वर्तमान डीजीपी सुधीर सक्सेना 30 नवंबर 2024 को सेवानिवृत हो रहे हैं। सुधीर सक्सेना को 4 मार्च 2020 को डीजीपी नियुक्त किया गया था।
सीएम डॉ. मोहन यादव 24 नवंबर से 30 नवंबर तक यूके और जर्मनी की यात्रा पर रहेंगे। संभावना जताई जा रही है कि सीएम के विदेश दौरे से लौटने के बाद ही कैलाश मकवाना विधिवत पदभार ग्रहण करें।
कैलाश मकवाना इस समय मप्र पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन के चेयरमैन है। शिवराज सरकार के कार्यकाल में मकवाना लोकायुक्त के डीजी थे। हालांकि वे छह महीने ही इस पद पर रहे। दरअसल, मकवाना ने लोकायुक्त में डीजी बनते ही भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई में तेजी ला दी थी। उन्होंने ठंडे बस्ते में पड़ीं कई लंबित जांचों की फाइल खोली और जांच शुरू की।
उन्होंने अपने एसीआर ( गोपनीय चरित्रावली) सुधरवाने के लिए मप्र शासन से 9 महीने पहले अपील की थी। उन्होंने रिप्रेजेंटेशन भेजते हुए सरकार से कहा था कि लोकायुक्त संगठन में डीजी रहने के 6 महीने के दौरान उनकी एसीआर खराब कर दी गई। दुर्भावना पूर्वक खराब की गई एसीआर पर शासन को उचित निर्णय लेना चाहिए।
डीजीपी की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होने के कुछ महीने पहले ही वरिष्ठ सचिवों की कमेटी ने इसे दुरुस्त कर दिया था।
कैलाश मकवाना का साढ़े तीन साल के अंदर सात बार तबादला हुआ था। कमलनाथ सरकार के दौरान ही वे तीन बार इधर से उधर किए गए थे।

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