डेढ़ सौ वर्षो से तीन दिन तक लगता है दो नदियों के संगम का मेला, मंदिर जाने वाले रास्ते को किया बंद, कैसे भरेगा मेला?

ब्यूरो चीफ : मनीष श्रीवास
जबलपुर। जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील अंतर्गत आने वाले ग्राम सिमरिया स्थित प्रसिद्ध द्वनाये मेला के रास्ते को बंद कर दिया गया है।
द्वनाए घाट का मेला पहली बार ऐसा हुआ है जब अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही परंपरा को एवं सार्वजनिक रूप से बने नदी के किनारे भगवान भोलेनाथ एवं वीरहनुमान के मंदिर में लगने वाले हर साल 14 जनवरी से 16 जनवरी तक इस मेला पर आवागमन को रोक दिया गया है क्या डेढ़ सौ वर्ष साल से चली आ रही मेला की परंपरा को व्यवस्थित बनाए रखा जाएगा या फिर दबंग लोगों के इस रास्ते को बंद करने वाले को समर्थन दिया जाएगा।
मंदिर तक जाने वाले रास्ते को लेकर रो पड़े पुजारी – द्वनाये मेला को लेकर पीड़ित पुजारी नंदकिशोर चौबे निवासी घाट सिमरिया स्थित ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि विगत 150 वर्षों से हमारे क्षेत्र सिमरिया गांव स्थित दो नदियों के संगम बरने नदी एवं हिरण नंदी के किनारे बने सार्वजनिक रूप से भगवान भोलेनाथ एवं वीरहनुमान जी के प्रसिद्ध द्वनाये घाट में प्रति वर्ष तीन दिन तक मकरसंक्रांति 14,15,16 जनवरी को हनुमान जी के प्रसिद्ध स्थान पर मेला का आयोजन होता चला आ रहा हैं। लेकिन इस बार यह मेला शायद ही लग पाए। इसका मुख्य कारण है मन्दिर तक पहुंचने वाले रास्ते को बंद कर दिया गया है। जिससे पीड़ित ने जिला प्रशासन से लेकर स्थानीय प्रशासन को लिखित रूप से आवेदन पत्र भी दिया था। लेकिन दस दिन बीत जाने के बाद भी स्थानीय प्रशासन ने कोई रुचि नहीं दिखाई है। क्या एक पीड़ित ब्लाइंड को इस प्रकार से रुलाना और हिन्दू धर्म के लिए उचित मांग रखना सही है या गलत। अब सवाल यह उठता है कि स्थानीय प्रशासन को लिखित रूप से आवेदन पत्र देने के बाद भी द्वनाये मेला मंदिर जाने वाले रास्ते को क्यों नहीं दिया गया है। एक भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर को लेकर सनातन धर्म की ले जा रहे हैं तो वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ जमीन के अंदर बने हुए मंदिरों का निर्माण कराने हेतु प्रयास जारी है। फिर ये तो अंग्रेजों के जमाने से नियंत्रण प्रथा चली आ रही हैं। अब सवाल उठता है कि स्थानीय प्रशासन कोई उचित कार्रवाई करेगा या फिर पीड़ित को प्रसिद्ध द्वनाये मेला मंदिर जाने से वंचित होना पड़ेगा।
इस समस्या को लेकर जब स्थानीय प्रशासन मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत सिहोरा से फोन पर सम्पर्क किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।



