धार्मिकमध्य प्रदेश

स्वभाव से आदमी बड़ा होता है : कमलेश कृष्ण शास्त्री

सुल्तानगंज । अटा नई गड़ियां में चल रही श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के छटवे दिवस में पं कमलेश कृष्ण शास्त्री ने कहा कि मनुष्य धन और उच्च पद से नहीं, अपितु अपने स्वभाव व आचरण से बड़ा बनता है, इसलिए जीवन के श्रेष्ठ अनुभवों, सदुपदेशों को आचरण में उतारना सीखिए। अनुशासित जीवनशैली व अनवरत श्रम साधना ही जीवन में सफलता के सच्चे मानक हैं। आत्मानुशासन के द्वारा ही जीवन के उच्चतर लक्ष्यों की संसिद्धि होती है। प्रकृति में सर्वत्र अनुशासन है, सूर्य का नियत समय पर आना और अस्त होना वैसे ही ग्रीष्म, शीत, वर्षा और बसंत आदि ऋतुयें अपने निर्धारित समय पर आती हैं। अर्थात् जो संयमित और अनुशासित नही हैं, उन्हे बड़े लक्ष्य कभी प्राप्त नही होते। जीवन की सम्पूर्ण सिद्धियाँ, समाधान और प्रगति का मूल संयम और अनुशासन ही है। आइये ! समय, ऊर्जा और अपनी सम्पूर्ण मनोवृत्तियों को अनुशासित रखें ..! आदर्श, अनुशासन, मर्यादा, परिश्रम तथा उच्च मानवीय मूल्यों के बिना किसी का जीवन महान नहीं बन सकता है। अनुशासन, लक्ष्यों और उपलब्धि के बीच का सेतु है। भगवान को अनुशासन एवं सुव्यवस्थितपना प्रिय है। अतः उन्हें ऐसे लोग ही प्रिय लगतें हैं, जो सुव्यवस्था व अनुशासन को अपनाते हैं। बड़े होकर अनुशासन सीखना कठिन है। अनुशासन का पाठ बचपन से परिवार में रहकर सीखा जाता है। बचपन के समय मे अनुशासन सिखाने का दायित्व माता-पिता तथा गुरूओं का होता है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अनुशासन का महत्व है। अनुशासन से धैर्य और विवेक शक्ति का विकास होता है। समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। इससे कार्य क्षमता का विकास होता है तथा व्यक्ति में नेतृत्व की शक्ति जाग्रत होने लगती है। इसलिये हमे हमेशा अनुशासनपूर्वक आगे बढने का प्रयत्न करना चाहिए। अतः मानव जीवन की सफलता का एक मात्र ‘अनुशासन’ मंत्र है। अनुशासन ही मनुष्य को एक अच्छा व्यक्ति व एक आदर्श नागरिक बनाता है ।

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