मेहका की बेटी हीमा जगेत ने रचा सफलता का नया अध्याय

आर्थिक तंगी के बीच 12वीं के बाद नौकरी का लक्ष्य, सरकारी सेवा के साथ पढ़ाई जारी रखकर MPPSC से असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर चयन
सिलवानी। तहसील के छोटे से आदिवासी अंचल के गांव मेहका की बेटी हीमा जगेत ने संघर्ष, मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर सफलता की नई मिसाल कायम की है। आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच 12वीं के बाद नौकरी को अपना लक्ष्य बनाने वाली हीमा ने सरकारी सेवा के साथ पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी। अब उनका चयन मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के माध्यम से असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर हुआ है।
हीमा जगेत के पिता रतनसिंह जगेत और माता संतोषरानी हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा विद्या निकेतन सलैया में हुई। पढ़ाई के दौरान उनका चयन जवाहर नवोदय विद्यालय बाड़ी के लिए हुआ, जहां उन्होंने कक्षा 6वीं से 12वीं तक की शिक्षा पूरी की।
कम उम्र में आई परिवार की जिम्मेदारी
हीमा जब करीब 12-13 वर्ष की थीं, तभी उनकी बड़ी बहन का निधन हो गया। इस घटना के बाद परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ गईं। आर्थिक परिस्थितियां ऐसी थीं कि लंबे समय तक केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना उनके लिए आसान नहीं था। ऐसे में उन्होंने 12वीं के बाद नौकरी हासिल कर परिवार को संभालने का लक्ष्य बनाया।
उच्च शिक्षा के लिए रुरल डेवलपमेंट सर्विस सोसाइटी (RDSS) के सहयोग से उन्होंने भोपाल के एक कॉलेज में प्रवेश लिया। पढ़ाई के साथ ही सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू कर दी। भोपाल में रहकर शिक्षा जारी रखने के साथ उन्होंने अपने भाई-बहनों की पढ़ाई में भी जिम्मेदारी निभाई।
पांच साल के प्रयास के बाद मिली सरकारी नौकरी
परिवार की परिस्थितियों के बावजूद हीमा ने हार नहीं मानी। करीब पांच वर्षों के लगातार प्रयास के बाद उनका चयन सहकारिता विभाग में उप अंकेक्षक के पद पर हुआ। उनकी पदस्थापना विंध्याचल भवन, भोपाल में हुई।
सरकारी सेवा के दौरान उन्हें विभिन्न अधिकारियों के साथ काम करने का अवसर मिला। इससे उन्हें प्रशासनिक कार्यप्रणाली को समझने के साथ आगे की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मार्गदर्शन भी मिला।
असफलताओं के बावजूद जारी रखा प्रयास
सरकारी नौकरी मिलने के बाद भी हीमा ने अपने आगे बढ़ने का लक्ष्य नहीं छोड़ा। उन्होंने लगातार तीन वर्षों तक लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में हिस्सा लिया। कई प्रयासों में सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने तैयारी और प्रयास जारी रखा।
वर्ष 2025 में MPPSC के माध्यम से उनका चयन वाणिज्यिक कर विभाग (GST) में कराधान सहायक के पद पर हुआ। नौकरी के साथ पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन कार्यालय के सहकर्मियों का सहयोग भी उन्हें मिलता रहा।
सरकारी सेवा के साथ जारी रखी पढ़ाई
हीमा ने नौकरी के साथ अपनी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को जारी रखा। लगातार मेहनत और धैर्य का परिणाम अब MPPSC से असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर चयन के रूप में सामने आया है।
हीमा जगेत के अनुसार, मैंने गरीबी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि उसे अपनी ताकत और मोटिवेशन का स्रोत बनाया। कठिन परिस्थितियों ने मुझे हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
वह अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, कार्यालय के सहकर्मियों और करीबी मित्रों को देती हैं। उनका कहना है कि इन सभी के निरंतर सहयोग ने उनके संघर्ष के सफर को आसान बनाया।
ग्रामीण युवाओं के लिए बनीं प्रेरणा
मेहका जैसे छोटे से गांव से निकलकर शिक्षा, पारिवारिक जिम्मेदारियों और सरकारी नौकरी के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हुए हीमा जगेत ने सफलता हासिल की है। उनकी उपलब्धि ग्रामीण और आदिवासी अंचल के उन युवाओं के लिए प्रेरणादायी है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से अपने भविष्य को बेहतर बनाने का सपना देखते हैं।



