01 फरवरी 2023 : कब है जया एकादशी व्रत, जानें डेट, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🚩 01 फरवरी 2023 : कब है जया एकादशी व्रत, जानें डेट, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
पुराणों में माघ महीने को बड़ा ही पुण्यदायी माना गया गया है. इस माह में स्नान और दान करना बेहद उत्तम माना जाता है. माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को जया एकादशी है. इस एकदशी में भगवान विष्णु की पूजा करने का विशेष विधि-विधान है. ऐसी मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत रखने से आपके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को पिशाच योनि से भी मुक्ति मिल जाती है. धर्म शास्त्रों में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का भी विशेष महत्व बताया गया है. आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से जया एकादशी व्रत की तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और पारण समय…
👉🏻 जानें कब है जया एकादशी 2023?
हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 31 जनवरी दिन मंगलवार को सुबह 11 बजकर 55 मिनट से हो रही है. ये तिथि अगले दिन 01 फरवरी, बुधवार को दोपहर 02 बजकर 01 मिनट तक रहेगी. ऐसे में उदयातिथि को देखते हुए जया एकादशी व्रत 01 फरवरी बुधवार को रखा जाएगा.
⚛️ जया एकादशी 2023 तिथि और शुभ मुहूर्त
जया एकादशी का व्रत- 01 फरवरी 2023
जया एकादशी तिथि का आरंभ- 31 जनवरी 2023 को रात 11 बजकर 53 मिनट पर
जया एकादशी का समापन- 01 फरवरी 2023 को दोपहर 02 बजकर 01 मिनट तक
सर्वार्थ सिद्धि योग-1 फरवरी सुबह 07 बजकर 10 मिनट से 2 फरवरी की आधी रात 03 बजकर 23 मिनट तक
जया एकादशी को इंद्र योग-एक फरवरी को प्रात:काल से लेकर सुबह 11 बजकर 30 मिनट तक
🌊 जया एकादशी व्रत पारण समय
02 फरवरी को जया एकादशी व्रत का पारण किया जाएगा. सुबह 07 बजकर 09 मिनट से सुबह 09 बजकर 19 मिनट तक पाऱण समय है.
🍱 जया एकादशी व्रत विधि
एकादशी व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहने. फिर व्रत का संकल्प लें और फिर श्री विष्णु जी की आराधना करें. श्रीहरि को पीले रंग के फूल अर्पित करें. पूजा स्थल पर घी में हल्दी मिलाकर भगवान विष्ण़ु का दीपक करें. इसके बाद पीपल के पत्ते पर दूध और केसर से बनी मिठाई रखकर भगवान को चढ़ाएं. शाम को तुलसी के पौधे के सामने दीपक जलाएं. एकादशी के दिन दान पुण्य भी करना चाहिए. भगवान को केले चढ़ाएं और गरीबों को भी केले बांटें. श्रीहरि को के साथ लक्ष्मी का पूजन करें और गोमती चक्र और पीली कौड़ी भी पूजा में रखें. आरती करें.
🧘🏻♀️ जया एकादशी पूजा का फल
जया एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति नीच योनि जैसे भूत, प्रेत, पिशाच की योनि से मुक्त हो जाता है।
🗣️ जया एकादशी की कथा
नंदन वन में उत्सव चल रहा था। इस उत्सव में सभी देवता, सिद्ध संत और दिव्य पुरूष वर्तमान थे। उस समय गंधर्व गायन कर रहे थे और गंधर्व कन्याएं नृत्य प्रस्तुत कर रही थीं। सभा में माल्यवान नामक एक गंधर्व और पुष्पवती नामक गंधर्व कन्या का नृत्य चल रहा था। इसी बीच पुष्यवती की नज़र जैसे ही माल्यवान पर पड़ी वह उस पर मोहित हो गयी। पुष्यवती सभा की मर्यादा को भूलकर ऐसा नृत्य करने लगी कि माल्यवान उसकी ओर आकर्षित हो। माल्यवान गंधर्व कन्या की भंगिमा को देखकर सुध बुध खो बैठा और गायन की मर्यादा से भटक गया जिससे सुर ताल उसका साथ छोड़ गये।
इन्द्र को पुष्पवती और माल्यवान के अमर्यादित कृत्य पर क्रोध हो आया और उन्होंने दोनों को श्राप दे दिया कि आप स्वर्ग से वंचित हो जाएं और पृथ्वी पर निवास करें। मृत्यु लोक में अति नीच पिशाच योनि आप दोनों को प्राप्त हों। इस श्राप से तत्काल दोनों पिशाच बन गये और हिमालय पर्वत पर एक वृक्ष पर दोनों का निवास बन गया। यहां पिशाच योनि में इन्हें अत्यंत कष्ट भोगना पड़ रहा था। एक बार माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन दोनो अत्यंत दु:खी थे उस दिन वे केवल फलाहार रहे। रात्रि के समय दोनों को बहुत ठंढ़ लग रही थी अत: दोनों रात भर साथ बैठ कर जागते रहे। ठंढ़ के कारण दोनों की मृत्यु हो गयी और अनजाने में जया एकादशी का व्रत हो जाने से दोनों को पिशाच योनि से मुक्ति भी मिल गयी। अब माल्यवान और पुष्पवती पहले से भी सुन्दर हो गयी और स्वर्ग लो में उन्हें स्थान मिल गया।
देवराज ने जब दोनों को देखा तो चकित रह गये और पिशाच योनि से मुक्ति कैसी मिली यह पूछा। माल्यवान के कहा यह भगवान विष्णु की जया एकादशी का प्रभाव है। हम इस एकादशी के प्रभाव से पिशाच योनि से मुक्त हुए हैं। इन्द्र इससे अति प्रसन्न हुए और कहा कि आप जगदीश्वर के भक्त हैं इसलिए आप अब से मेरे लिए आदरणीय है आप स्वर्ग में आनन्द पूर्वक विहार करें।
कथा सुनकार श्री कृष्ण ने यह बताया कि जया एकादशी के दिन जगपति जगदीश्वर भगवान विष्णु ही सर्वथा पूजनीय हैं। जो श्रद्धालु भक्त इस एकादशी का व्रत रखते हैं उन्हें दशमी तिथि से को एक समय आहार करना चाहिए। इस बात का ध्यान रखें कि आहार सात्विक हो। एकादशी के दिन श्री विष्णु का ध्यान करके संकल्प करें और फिर धूप, दीप, चंदन, फल, तिल, एवं पंचामृत से विष्णु की पूजा करे।



