02 फ़रवरी 2025: कब है बसंत पंचमी, क्या है शुभ मुहूर्त और पूजा विधि, जानें यहां

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री सरस्वती
⚜▬▬ஜ✵❀ श्री हरि: ❀✵ஜ▬▬⚜
🔮 02 फ़रवरी 2025: कब है बसंत पंचमी, क्या है शुभ मुहूर्त और पूजा विधि, जानें यहां
🔘 HEADLINES
🔹 सरस्वती पूजा का दिन अपने आप में बहुत शुभ माना जाता है।
🔹 इस दिन लोग ज्ञान की देवी माता सरस्वती की पूजा करते हैं।
🔹 इस साल यह पर्व 2 फरवरी को मनाया जाएगा।
🌤️ माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विद्या और बुद्धि की देवी मां सरस्वती की उपासना की जाती है. इसी उपासना के महापर्व को वसंत पंचमी कहते हैं. इस पर्व पर ज्ञान की देवी मां सरस्वती के पूजन का विशेष महत्व है. इस दिन लोग सरस्वती की पूजा-अर्चना कर ज्ञान प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं. बसंत पंचमी को वसंत पंचमी और श्री पंचमी के नाम से भी जाना जाता है. इस बार बसंत पंचमी 2 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी.
👉🏼 वर्ष के विशेष शुभ काल में से एक होने के कारण इसे अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है. इसमें विवाह और निर्माण तथा अन्य शुभ कार्य किए जा सकते हैं. ऋतुओं के इस संधिकाल में ज्ञान और विज्ञान दोनों का वरदान प्राप्त किया जा सकता है. इसके अलावा संगीत, कला, आध्यात्म का आशीर्वाद भी इस काल में लिया जा सकता है. अगर कुंडली में विद्या, बुद्धि का योग नहीं है तो इस दिन विशेष पूजा करके ठीक कर सकते हैं.
⚛️ बसंत पंचमी शुभ मुहूर्त
🌷 बसंत पंचमी की पंचमी तिथि की शुरुआत 2 फरवरी को सुबह 9 बजकर 14 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 3 फरवरी को सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर होगा.
🌸 बसंत पंचमी पर माता सरस्वती की पूजा का मुहूर्त- 2 फरवरी को सुबह 7 बजकर 09 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा. इस दिन पूजा के लिए सिर्फ 5 घंटे 26 मिनट का समय मिलेगा.
🌟 सर्वार्थ सिद्धि योग में सरस्वती पूजा 2025
⭐ इस वर्ष सरस्वती पूजा के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। यह योग प्रातः 07:09 बजे से शुरू होकर देर रात 12:52 बजे तक रहेगा। इस विशेष योग में किए गए शुभ कार्यों के सफल होने की संभावना अधिक होती है।
❄️ रवि योग सरस्वती पूजा के दिन रवि योग देर रात 12:52 बजे से प्रारंभ होगा और 3 फरवरी को प्रातः 07:08 बजे तक रहेगा।
🔱 शिव योग : पूजा के दिन यानी 2 फरवरी को प्रात:काल शिव योग का निर्माण होगा, जो सुबह 09:14 बजे तक रहेगा। इसके बाद सिद्ध योग का समय होगा, जो 3 फरवरी को सुबह 06:06 बजे तक चलेगा।
🙇🏻♀️ कैसे करें मां सरस्वती की उपासना
इस दिन पीले, बसंती और सफेद वस्त्र धारण करें, काले या लाल वस्त्र नहीं. इसके बाद पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ मुख करके पूजा की शुरुआत करें. सूर्योदय के बाद ढाई घंटे या सूर्यास्त के बाद के ढाई घंटे का प्रयोग इस पूजन के लिए करें. फिर, मां सरस्वती को श्वेत चंदन और पीले, सफेद फूल दाएं हाथ से अर्पित करें. प्रसाद में मिश्री, दही और लावा अर्पित करें, केसर मिश्रित खीर अर्पित करना सर्वोत्तम होगा. उसके बाद मां सरस्वती के मूल मंत्र ‘ऊं ऐं सरस्वत्यै नम:’ का जाप करें, जाप के बाद प्रसाद ग्रहण करें.
🗣️ सरस्वती पूजा मंत्र
ॐ सरस्वती मया दृष्ट्वा, वीणा पुस्तक धारणीम् ।
हंस वाहिनी समायुक्ता मां विद्या दान करोतु में ॐ ।।
ॐ शारदा माता ईश्वरी मैं नित सुमरि तोय हाथ जोड़ अरजी करूं विद्या वर दे मोय।
ॐ अर्हं मुख कमल वासिनी पापात्म क्षयम् कारी वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा।।
☄️ बसंत पंचमी पर करें ग्रहों को मजबूत
▪️ कुंडली में बुध कमजोर हो तो बुद्धि कमजोर हो जाती है, ऐसी दशा में अगर मां सरस्वती की उपासना हरे फल अर्पित करके करें तो लाभदायक होगा.
▪️ साथ ही, अगर बृहस्पति के कमजोर होने पर विद्या प्राप्त करने में बाधा आती हैं. ऐसे में वसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र धारण करके पीले फूल और फलों से मां सरस्वती की उपासना करें.
▪️ शुक्र कमजोर हो तो मन की चंचलता बढ़ जाती है और करियर का चुनाव भी नहीं हो पाता. ऐसी दशा में वसंत पंचमी के दिन मां की उपासना सफेद फूलों से करना लाभदायक होता है.
🤷🏻♀️ सरस्वती पूजा का महत्व_
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सरस्वती पूजा के दिन ज्ञान की देवी मां शारदा का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन को सरस्वती जयंती भी कहा जाता है। इस दिन मां सरस्वती ने अपनी वीणा की मधुर धुन से जीवों को स्वर प्रदान किया, जिससे वे बोलने में सक्षम हुए। सरस्वती पूजा का दिन बच्चों के शिक्षा की शुरुआत या अक्षर ज्ञान के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मां सरस्वती की कृपा से ज्ञान की प्राप्ति होती है।


