08 मई 2023: आज है विकट संकष्टी चतुर्थी, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🔮 08 मई 2023: आज है विकट संकष्टी चतुर्थी, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
संकष्ट चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। भगवान गणेश की पूजा अर्चना करने से व्यक्ति को ज्ञान और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में आ रही सभी समस्याओं से निजात मिलता है। ऐसे में आइए जानते हैं संकष्टी चतुर्थी का व्रत कब रखा जाएगा और इसकी पूजा विधि क्या है।
🐁 कब है संकष्टी चतुर्थी 2023 ?
पंचांग के अनुसार, हर महीने दो चतुर्दशी आती है। अब जल्द ही ज्येष्ठ माह की संकष्टी चतुर्थी आने वाली है। चतुर्थी तिथि का व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन उपवास करने और भगवान गणेश की पूजा अर्चना करने से व्यक्ति को ज्ञान और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में आ रही समस्याओं से छुटकारा मिलता है। आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि कब है। जानते हैं चतुर्थी तिथि का महत्व और तारीख।
⚛️ संकष्ट चतुर्थी पूजा मुहूर्त
ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 8 मई 2023 की शाम 6 बजकर 18 मिनट से होगी और 9 मई शाम में 4 बजकर 7 मिनट तक चतुर्थी तिथि रहेगी। ऐसे में संकष्टी चतुर्थी का व्रत 8 मई को रखा जाएगा। इस दिन शाम के समय यानी चंद्रमा निकलने के बाद पूजा की जाती है। ऐसे में चतुर्थी तिथि 8 मई को शाम तक रहेगी इसलिए इस दिन संकष्टी चतुर्थी व्रत रखना उत्तम रहेगा।
🤷🏻♀️ संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व
संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान श्री गणेश जी की पूजा करने से भक्तो की सभी मनोकामनाएं पुर्ण होती हैं और विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश उनके जीवन के सभी दुख और संकटो को दूर कर देते हैं. इस दौरान भगवान श्री गणेश जी की पुजा, आरती, उनके मंत्रो और चालीसा का पाठ पूरी श्रद्धा के साथ करने से शुभ फल प्राप्त होता है. इस दिन भगवान श्री गणेश की पूजा करने से अधिक फल और आशीर्वाद प्राप्त होता है. संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत रखने से भक्तों के सभी प्रकारके दुख दूर हो जाते हैं।
💁🏻♀️ संकष्ट चतुर्थी व्रत की पूजा विधि
संकष्ट चतुर्थी पर सूर्योदय से पहले तिल के पानी से स्नान करें और फिर उत्तर दिशा की ओर मुंह करके भगवान गणेश की पूजा करें. गणेशजी को तिल, गुड़, लड्डू, दुर्वा और चंदन अर्पित करें. साथ ही मोदक का भोग लगाएं. इस व्रत में तिल का खास महत्व है इसलिए जल में तिल मिलाकर अर्घ्य देने का विधान है. पूरे दिन व्रत करने के बाद शाम को सूर्यास्त के बाद पुन: गणेशजी की पूजा करें और उसके बाद चंद्रोदय की प्रतीक्षा करें. चंद्रोदय के बाद चांद को तिल, गुड़ आदि से अर्घ्य देना चाहिए. इस अर्घ्य के बाद ही व्रती को अपना व्रत खोलना चाहिए. गणेशजी की पूजा के बाद तिल का प्रसाद खाना चाहिए. जो लोग व्रत नहीं रखते हैं उन्हें भी गणेशजी की पूजा अर्चना करके संध्या के समय तिल से बनी चीजें खानी चाहिए।
🪶 संकष्टी चतुर्थी का महत्व
संकष्टी चतुर्थी का अर्थ संकटों का हरण करने वाली चतुर्थी होता है. इस व्रत को करने से गणेशजी प्रसन्न होकर हमारे सभी संकट दूर करते हैं और संतान को दीघार्यु का आशीर्वाद देते हैं. यह भी मान्यता है कि इसी दिन पौराणिक काल में भगवान शिव ने गणेशजी को हाथी का सिर लगाकर उनके संकट दूर किए थे, तब से इस दिन को संकष्टी चतुर्थी के रूप में पूजा जाने लगा. इस दिन व्रत में भी भगवान गणेश की पूजा के साथ उपवास रखा जाता है और कथा सुनाई जाती है।


