मध्य प्रदेश

साईंखेड़ा में किसानों का रास्ता बंद करने का आरोप तहसील कार्यालय पहुंचे किसान

शासकीय मेढ़ और कृषि मार्ग से अतिक्रमण हटाने की मांग रास्ता बंद होने से बुवाई प्रभावित किसानों ने सौंपा ज्ञापन
सिलवानी । तहसील के ग्राम साईंखेड़ा में पाला रोड के बीच स्थित कृषि भूमि तक पहुंचने वाले रास्ते पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया है। रास्ता बंद होने से परेशान किसानों ने गुरुवार को तहसील कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और संबंधित अधिकारियों से मौके की जांच कराकर अतिक्रमण हटाने तथा खेतों तक आवागमन बहाल कराने की मांग की।
किसानों ने ज्ञापन में बताया कि ग्राम साईंखेड़ा में उनकी कृषि भूमि खसरा नंबर 555/1/1, 569/1/1, 555/1/2, 555/2/1, 555/2/2 एवं 597/1/1/1/1/1/1/1/1/1/1 सहित अन्य खेतों तक पहुंचने के लिए लंबे समय से मेढ़ से लगे रास्ते का उपयोग किया जाता रहा है। किसानों के अनुसार, वे और उनके पूर्वज इसी रास्ते से खेतों तक पहुंचकर खेती-किसानी का काम करते आए हैं।
चना की फसल बोने और तार फेंसिंग करने से रास्ता बंद होने का आरोप
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि रास्ते पर अतिक्रमण कर चने की फसल बो दी गई है तथा तार फेंसिंग करके आवागमन बंद कर दिया गया है। किसानों ने रामकुमार रघुवंशी पिता रामरतन सिंह रघुवंशी और जसमन गौर पिता पूरन सिंह गौर पटेल पर रास्ते पर कब्जा करने का आरोप लगाया है। किसानों का कहना है कि रास्ता बंद होने के कारण वे अपने खेतों तक कृषि उपकरण बीज और अन्य जरूरी सामान नहीं ले जा पा रहे हैं। इससे बुवाई जुताई और अन्य कृषि कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
*खेत खाली पड़े नुकसान की आशंका*
किसानों ने बताया कि रास्ता अवरुद्ध होने के कारण अंदर की ओर स्थित कई खेतों में समय पर फसल की बुवाई नहीं हो पा रही है। कुछ भूमि पर बुवाई नहीं होने से खेत खाली पड़े हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। उन्होंने यह भी कहा कि रास्ते और भूमि को लेकर विवाद की स्थिति बन रही है, इसलिए समय रहते प्रशासनिक हस्तक्षेप जरूरी है।
*मौके की जांच कर रास्ता खुलवाने की मांग*
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की तत्काल जांच कराई जाए। यदि शासकीय मेढ़ अथवा रास्ते पर अतिक्रमण पाया जाता है, तो नियमानुसार उसे हटाकर किसानों के खेतों तक आवागमन की व्यवस्था बहाल की जाए, ताकि वे बिना परेशानी के कृषि कार्य कर सकें।ज्ञापन सौंपने वालों में केदार सिंह रघुवंशी, नंदन साहू, नारायण सिंह, मदन सिंह, पुष्पेंद्र, रूपेश, राधेलाल, केशव सहित अन्य किसान शामिल रहे। अब किसानों को प्रशासन की जांच और कार्रवाई का इंतजार है।

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