Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
⚜❀┈┉☆…हरि ॐ…☆┉┈❀⚜
🔮 10 जून 2024 : ज्येष्ठ विनायक चतुर्थी व्रत कब? जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा महत्व
⭕ HIGHLIGHTS
🔹 विनायक चतुर्थी का दिन बेहद महत्वपूर्ण और शुभ होता है।
🔹 इस दिन भगवान गणेश की पूजा होती है।
🔹 इस माह यह व्रत 10 जून, 2024 को रखा जाएगा।
🔹 विनायक चतुर्थी का व्रत बेहद कल्याणकारी माना जाता है।
🔹 यह दिन बुद्धि, ज्ञान और समृद्धि के देवता भगवान गणेश को समर्पित है।
सनातन धर्म में भगवान गणेश को प्रथम देवता के रूप में पूजा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति प्रत्येक दिन भगवान गणेश की उपासना करता है, उन्हें सभी प्रकार की सुख-सुविधाओं की प्राप्ति होती है. धर्म शास्त्रों के अनुसार, भगवान गणेश की उपासना के लिए चतुर्थी व्रत को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि विनायक चतुर्थी व्रत रखा जाएगा. आइए जानते हैं, आचार्य श्री गोपी राम से तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा महत्व.
💁🏻 विनायक चतुर्थी कब है ?
🧾 पंचांग के अनुसार, 9 जून 2024 को दोपहर 03 बजकर 44 मिनट से विनायक चतुर्थी आरंभ होगी और अगले दिन यानी 10 जून 2024 को शाम 04 बजकर 14 मिनट पर समाप्त होगी। इसलिए उदयातिथि के अनुसार, इस साल 10 जून 2024 को विनायक चतुर्थी मनाई जाएगी।
⚛️ पूजा का शुभ मुहूर्त : इस दिन यानी 10 जून 2024 को सुबह 10 बजकर 26 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 06 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त बन रहा है।
🌙 चंद्रोदय का समय : 10 जून को रात 08 बजकर 40 मिनट पर चंद्रोदय होगा और रात 10 बजकर 54 मिनट पर चंद्रास्त होगा। कुल 2 घंटे और 47 मिनट तक चंद्रदेव को जल अर्घ्य देने का समय रहेगा।
💮 विनायक चतुर्थी शुभ योग
ज्येष्ठ विनायक चतुर्थी पर कई शुभ योग का निर्माण हो रहा है। आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, ध्रुव योग और पुष्य नक्षत्र का अद्भुत संयोग बन रहा है, जो बहुत ही खास मौके पर देखने को मिलता है। बता दें, ध्रुव योग भोर से शाम 04 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। वहीं, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग सुबह 05 बजकर 23 मिनट से रात्रि 09 बजकर 40 मिनट तक रहेगा।
इसके अलावा पुष्य नक्षत्र सुबह से रात्रि 09 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दौरान किसी भी प्रकार के शुभ व नए कार्य किए जा सकते हैं।
🍱 भगवान गणेश की पूजन विधि
सुबह के समय जल्दी उठकर स्नान आदि करके लाल रंग के वस्त्र धारण करें और सूर्य भगवान को तांबे के लोटे से अर्घ्य दें. उसके बाद भगवान गणेश के मंदिर में एक जटा वाला नारियल और मोदक प्रसाद के रूप में लेकर जाएं. उन्हें गुलाब के फूल और दूर्वा अर्पण करें तथा ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का 27 बार जाप करें और धूप दीप अर्पण करें. दोपहर पूजन के समय अपने घर मे अपनी सामर्थ्य के अनुसार पीतल, तांबा, मिट्टी अथवा सोने या चांदी से निर्मित गणेश प्रतिमा स्थापित करें. संकल्प के बाद पूजन कर श्री गणेश की आरती करें और मोदक बच्चों के बाट दें.
💁🏻♀️ विनायक चतुर्थी व्रत का क्या है महत्व
धर्म शास्त्रों में गया है कि चतुर्थी तिथि के दिन भगवान गणेश की विधिवत उपासना करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और व्यक्ति को बल, बुद्धि, विद्या और धन की प्राप्ति होती है. साथ ही जो व्यक्ति विधि-विधान से गणपति महाराज की उपासना करता है, उन्हें सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिल जाती है. भगवान गणेश ज्ञान के देवता हैं, इसलिए मान्यता है कि विशेष रूप से छात्रों को चतुर्थी व्रत के दिन भगवान गणेश की उपासना करनी चाहिए. इससे उन्हें विद्या अर्जित करने में अधिक लाभ मिलेगा.
🗣️ विनायक चतुर्थी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव और माता पार्वती नर्मदा नदी के तट पर बैठकर चौपड़ खेल रहे थे। शिव जी ने खेल में हार-जीत का फैसला करने के लिए एक पुतले का निर्माण किया और उसकी प्रतिष्ठा कर दी। भगवान महादेव ने उस बालक से कहा कि वह जीतने के बाद विजेता का फैसला करेगा। महादेव और देवी पार्वती खेलने लगे और देवी पार्वती जीत गईं। अंत में बालक ने महादेव को विजेता घोषित किया। यह सुनकर देवी पार्वती क्रोधित हो गईं और उन्होंने बालक को विकलांग बने रहने का श्राप दे दिया।
इसके बाद बालक ने देवी पार्वती से माफी मांगी और कहा कि यह गलती से हो गया, जिसके बाद देवी पार्वती ने कहा कि श्राप को वापस नहीं किया जा सकता, लेकिन एक समाधान है। देवी पार्वती ने कहा कि नाग कन्याएं भगवान गणेश की पूजा करने आएंगी और तुम्हें उनके बताए अनुसार व्रत करना होगा, जिससे तुम श्राप से मुक्त हो जाओगे। बालक कई वर्षों तक श्राप से पीड़ित रहा और एक दिन नाग कन्याएं भगवान गणेश की पूजा करने आईं। बालक ने उनसे गणेश जी की व्रत की विधि पूछी। बालक ने सच्चे मन से भगवान गणेश के निमित्त व्रत किया, जिससे भगवान गणेश प्रसन्न हुए और उससे वरदान मांगने को कहा।
बालक ने भगवान गणेश से प्रार्थना की और कहा कि हे विनायक, मुझे इतनी शक्ति दें कि मैं कैलाश पर्वत तक पैदल चल सकूं। भगवान गणेश ने बालक को आशीर्वाद दिया। बाद में बालक ने श्राप से मुक्त होने की कथा कैलाश पर्वत पर महादेव को सुनाई। चौपड़ के दिनों से ही माता पार्वती भगवान शिव से रुष्ट हो गई थीं। बालक की सलाह के अनुसार, भगवान शिव ने भी 21 दिनों तक भगवान गणेश के लिए व्रत रखा। व्रत के प्रभाव से माता पार्वती का महादेव के प्रति क्रोध समाप्त हो गया।



