15 अगस्त से लापता तहसीलदार का नहीं चला पता, कर्मचारियों में रोष
पटवारी का शव मिलने के बाद पुलिस ने पार्वती नदी तक सर्चिंग शुरू की
सीहोर। 15 अगस्त की रात को फार्म हाउस से पार्टी कर लौट रहे तहसीलदार नरेन्द्रसिंह ठाकुर एवं पटवारी महेन्द्र रजक अपनी चार पहिया गाड़ी सहित करबला पुल पर तेज बहाव में कार सहित बह गये थे। परिजनों द्वारा पुलिस को गुमशुदगी दर्ज कराने के बाद पुलिस उन्हें खोजने में जुटी हुई थी। पुलिस ने खोजबीन चालू की तो करबला पुल की नदी में तीन किलोमीटर दूर पटवारी का शव बुधवार 17 अगस्त को बरामद हो गया था और कार भी मिल गई थी, लेकिन तहसीलदार नरेन्द्र ठाकुर का अभी तक पता नहीं चल सका है। तहसीलदार की तलाश के लिये पुलिस और राजस्व के दर्जनों कर्मचारी दिनरात मेहनत करने के बाद अभी तक सफल नहीं हुए हैं। प्रशासन ने तलाशी तेज करने के लिये होशंगाबाद से एनडीआरएफ की टीम को भी इस काम में लगा दिया है। अब नदी में जांच का दायरा भी बढ़ा दिया है, जो पार्वती नदी तक पहुंच गया है। लापता तहसीलदार की तलाश में चार जिलों के टीमें रेक्सयू आपरेशन चला रही हैं। सीहोर, शाजापुर, रायसेन और भोपाल की टीम पार्वती नदी और आसपास के खेतों में तहसीलदार की तलाश में लगे हुए हैं। उल्लेखनीय है कि गुरुवार को चैथे दिन पार्वती नदी में रेक्सयू टीमों ने सर्च आपरेशन चलाया। इसमें एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, होमगार्ड के जवान स्थानीय तैराक, राजस्व और पुलिस अमला मौजूद है। करीब 150 से अधिक कर्मचारी और अधिकारी लापता तहसीलदार की तलाश में जुटे हुए हैं जो नदी नालों से लेकर खेतों में भी तलाश कर रहे हैं। सर्चिंग के लिए गुरुवार को एनडीआरएफ की 30 सदस्यीय टीम होशंगाबाद से बुलवाई गई। वहीं नदी में बोट और गोताखोरों के माध्यम से दल सर्चिंग कार्य में जुटा हुआ है। गौरतलब है कि तहसीलदार और पटवारी जिस कार में सवार थे वह कार सीवन नदी के करबला पुल से करीब तीन किलोमीटर दूर मिली थी। तहसीलदार नरेन्द्र ठाकुर वर्तमान में शाजापुर जिले के मोहनपुर बड़ोदिया में पदस्थ हैं, लेकिन उनका गृह नगर सीहोर है। उनके लापता होने की खबर के बाद से ही बड़ी सं या में उनके रिश्तेदार, इष्टमित्र सीहोर आए हुए हैं। उनका अभी तक पता नही चलने से सभी का धैर्य टूट रहा है।
तहसीलदार, पटवारी नदी में कार सहित बहे, तहसीलदार की लाश मिली, पटवारी लापता



