मध्य प्रदेश

18 करोड खर्च करने के बाद भी नलों में पानी की जगह गोबर और मरे चूहे की सप्लाई, एक माह से नर्मदा जल की सप्लाई बंद

जल शोधन संयंत्र में नहीं टेक्नीशिन, बिना टेस्टिंग की सप्लाई से बीमारियों की आशंका
नागरिकों से नगर परिषद वसूल करती है जलकर, फिर भी उपलब्ध नहीं करा रही शुद्व पेयजल

सिलवानी। नगर में लगभग 6 वर्ष पहले 18 करोड़ की लागत से मुख्यमंत्री शहरीय पेयजल योजना के तहत नर्मदा जल को सिलवानी लाने की योजना स्वीकृत की गई थी। योजना स्वीकृति के बाद निर्माण हुआ और जल की सप्लाई भी शुरु हो गई लेकिन इस सप्लाई में नागरिकों को मरे हुए चुहे और गंदगी घर घर परसी जा रही है। यही नहीं स्थानीय नागरिकों की शिकायत के बाद भी अफसरों की अनदेखी समझ से परे हैं। नगर परिषद द्वारा सप्लाई किया जाने वाला पानी न केवल दूषित है बल्कि एक धीमा जहर बना हुआ है। इस पानी के पीने से बीमारियों की आशंका तो है ही साथ ही मौत भी हो सकती है। नागरिकों ने नगर परिषद के जनप्रतिनिधियों व अफसरों पर सवाल उठाया कि 18 करोड़ खर्च करने के बाद भी अभी तक नागरिकों को टेस्टेड शुद्ध जल नहीं मिल पा रहा है।
न लेब टैक्निशयन न हो रही जांच
उल्लेखनीय है कि 6 साल पहले 18 करोड़ की योजना से 18 माह में लोगों को घर-घर जल उपलब्ध करवाने का जिम्मा गुजरात की पीसी स्नेहिल कंस्ट्रक्शन कंपनी ने लिया था, लेकिन 6 साल बाद भी नागरिकों को न तो शुद्ध और पर्याप्त पेयजल मुहैया हो पाया है न ही पाइप लाइन ने के लिए खोदी गई सड़कों की मरम्मत हो पाई है, जिसके चलते जगह-जगह खुदी पड़ी सड़कों से नागरिकों को आवागमन करने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार नागरिकों को उनके घर पर ही पर्याप्त व शुद्ध जल मुहैया कराना चाहती है। इस काम के लिए करोड़ों रुपए का बजट उपलब्ध कराया गया। अफसरों की अनदेखी और संरक्षण के कारण ठेकेदार राशि आहरण करने के बाद भी समय सीमा में पूरा काम नहीं कर सके, यही नहीं नलजल योजना के लिए खोदे गए मार्गों का दंश भी नागरिकों को परेशानी के रूप में झेलना पड़ रहा है। इतनी बड़ी अनियमितता को लेकर अब तक आला प्रशासनिक अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की है। हालांकि नगर परिषद कार्रवाई के नाम पर अब तक दो दर्जन से अधिक नोटिस निर्माण कंपनी को थमा चुकी है, बावजूद इसके ठेकेदार ने इन नोटिसों को तवज्जो नहीं दी न ही इनका जवाब दिया।
यह है जल सप्लाई की हकीकत
वर्तमान में करीब एक माह से बोरास से नर्मदा जल की सप्लाई बंद है जिससे नगर में पुराने नल जल योजना के नलकूपों से जल सप्लाई की जा रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में उक्त योजना का संचालन और रखरखाव पीसी स्नेहिल कंपनी को करना है। और जल शोधन संयत्र में एक लेब टेक्नीशियन की देखरेख में पानी का सेॅपल लेकर टेस्टिंग की जाना चाहिए ।लेकिन लेब में धूल जम रही है और केमिकल की वाॅटले खाली पड़ी हुई है। वही इस संयंत्र की बिल्डिंग में एलम से पानी की शुद्धता के लिए तीन चैम्बर एवं मशीन लगाई गई जो जंग खा रही है, एलम चैम्बर में जाले लगे हुए है। उक्त परिसर में जो एलम पहली बार आया था वह वैसा ही रखा हुआ है कभी कभार ज्यादा गंदा पानी आने पर एक एलम को कुआं में डाल दिया जाता है जबकि नर्मदा जल के पानी को एलम से शुद्ध करके सप्लाई करने का प्रावधान है। बताया जाता है कि बरसात मेे पानी को शुद्ध करने के लिए ब्लीचिंग पावडर भी नहीं डाला जा रहा है। कुल मिलाकर नगर परिषद द्वारा शुद्ध जल के नाम गंदा पानी पिलाया जा रहा है। जो नागरिकों के साथ धोखा है।
ऋण लेकर किया भुगतान
जानकारी के अनुसार कागजों में 12 कर्मचारियों को दर्शाया 8 कर्मचारियों से कार्य कराया जा रहा है। उक्त योजना को भुगतान करने के लिए नगर परिषद ने बैंक से ऋृण लेकर भुगतान किया है। और इस तरह नागरिकों के टेक्स के पैसों को ब्याज, किस्त में देने के बावजूद भी नागरिकों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा है। उपभोक्ताओं ने बताया कि अभी नलों में मटमेला पानी, तो कई में गोबर और आज तो हद हो गई पाइप लाइन में मरे हुये चूहे के अवशेष नल जल योजना की सप्लाई में आया।
सीएमओ सुनील जैन से सीधी बात
रिपोर्टर: मुख्यमंत्री शहरीय पेयजल योजना में एक माह से अधिक से समय से संयंत्र बंद है?
सीएमओ: बरसात की वजह से गंदा पानी आने की शिकायत आ रही थी इस कारण अभी बंद कर दिया है।
रिपोर्टर: एलम के द्वारा पानी की शुद्धता नहीं की जा रही है, मशीनों में जंग एवं धूल जमी है ?
सीएमओ: पुरानी जानकारी मुझे नहीं है, अभी सफाई चल रही है।
रिपोर्टर: पानी की टेस्टिंग नहीं की जा रही है, लेब टेक्नीशियन ही नहीं है?
सीएमओ: अभी हमने टोटल बंद करके रखा है, अभी सफाई चल रही है।
रिपोर्टर: एक साल से कोई टेक्नीशियन ही नहीं है ?
सीएमओ: उनके कर्मचारी है। जब तक साफ पानी नहीं आएगा तब तक उसे बंद रखा जावेगा।

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