Aaj ka Panchang आज का पंचांग रविवार, 30 जुलाई 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 30 जुलाई 2023
30 जुलाई 2023 दिन रविवार को अधिक श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी उपरान्त त्रयोदशी तिथि है। आज रविवार का प्रदोष व्रत है। आज सर्वार्थसिद्धियोग एवं रवियोग भी है। आप सभी सनातनियों को रविवार के प्रदोष व्रत की हार्दिक शुभकामनायें।।
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
⛈️ मास – श्रावण मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – श्रावण मास शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि 10:34 AM तक उपरांत त्रयोदशी
🖍️ तिथि स्वामी – द्वादशी इस तिथि के स्वामी श्री हरि विष्णु जी हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र मूल 09:32 PM तक उपरांत पूर्वाषाढ़ा
🪐 नक्षत्र स्वामी – मूल नक्षत्र का स्वामी ग्रह केतु है।नक्षत्र का स्वामी केतु है और राशि के स्वामी देवताओं के गुरु बृहस्पति हैं।
📣 योग – इन्द्र योग 06:33 AM तक, उसके बाद वैधृति योग 03:01 AM तक, उसके बाद विष्कुम्भ योग
⚡ प्रथम करण : बालव – 10:34 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : कौलव – 09:04 पी एम तक
🔥 गुलिक काल : रविवार का शुभ (गलिक काल) 03:37 पी एम से 05:16 पी एम
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सायं – 4:30 से 6:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:18 ए एम से 04:59 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:38 ए एम से 05:41 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:00 पी एम से 12:54 पी एम
🪯 विजय मुहूर्त : 02:43 पी एम से 03:37 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:14 पी एम से 07:35 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:14 पी एम से 08:16 पी एम
💧 अमृत काल : 03:41 पी एम से 05:09 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:07 ए एम, जुलाई 31 से 12:49 ए एम, जुलाई 31
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 05:41 ए एम से 09:32 पी एम
❄️ रवि योग : 09:32 पी एम से 05:42 ए एम, जुलाई 31
🚕 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शिव मंदिर में गुड़ चढ़ाएं।
🪴 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि योग/प्रदोष व्रत/मूल समाप्त, सौंदर्यशास्त्री गोविन्द चन्द्र पाण्डे जन्मोत्सव, मुख्य चुनाव आयुक्त नवीन चावला जयन्ती, प्रसिद्ध (क्रांतिकारी एवं स्वतंत्रता सेनानी) सत्येंद्रनाथ बोस जयन्ती, भारतीय औषध विज्ञानी सर्जन बिष्णुपद मुखर्जी पुण्य तिथि, वानुअतु स्वतंत्रता दिवस, विश्व मानव तस्करी निरोधक दिवस, मित्रता का अंतरराष्ट्रीय दिवस, मानव तस्करी के खिलाफ विश्व दिवस, अंतर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस
✍🏼 विशेष – द्वादशी के दिन तुलसी तोड़ना निषिद्ध है। द्वादशी के दिन यात्रा नहीं करनी चाहिए, इस दिन यात्रा करने से धन हानि एवं असफलता की सम्भावना रहती है। द्वादशी के दिन मसूर का सेवन वर्जित है।
🛕 Vastu Tips 🏚️
वास्तु शास्त्र में आज आचार्य श्री गोपी राम से जानिए पर्स के बारे में। आपके पर्स में पैसों के अलावा भी बहुत-सी चीजें रखी होती हैं, जिनमें से कई तो बहुत समय से इस्तेमाल में नहीं आ रही होती। वास्तु शास्त्र के अनुसार इनमें से कुछ चीजों को तो पर्स से बाहर ही कर देना चाहिए क्योंकि इन चीजों से आस-पास निगेटिव ऊर्जा बढ़ती है।
साथ ही आपको पैसों के मामले में नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। लेकिन कुछ ऐसी चीजें भी होती हैं जिन्हें पर्स में रखने से शुभ फल प्राप्त होते हैं और बरकत आती है। पर्स के अंदर कटे-फटे नोट, कोई फोटो या खराब कागज नहीं रखने चाहिए। इससे पैसों की आवक में कमी आती है। पर्स जितना साफ-सुथरा होगा और उसके अंदर रखी चीज़ें जितने सलीके से होंगी उतना ही अच्छा रहता है।
पर्स में एक लक्ष्मी माता की कागज की फोटो जरूर रखें और समय-समय पर इसे चेंज करते रहें। इससे आपका पर्स कभी खाली नहीं रहेगा। इसके अलावा आप एक श्रीयंत्र भी रख सकते हैं क्योंकि यह लक्ष्मी का ही एक रूप है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
ज्योतिष शास्त्र में ऐसी कौन सी चीजें हैं जिनका दान करने से हमें नुकसान हो सकता है, ताकि आप अगली बार दान करते समय इन्हें ध्यान में रखें।
कई बार लोग स्टील के बर्तन भी दान में देते हैं। हालांकि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार स्टील के बर्तनों का दान करना हमारे घर के लिए अशुभ हो सकता है। ऐसा माना जाता है कि स्टील के बर्तन दान करने से परिवार की सुख-शांति भंग होती है और झगड़े बढ़ते हैं इसलिए स्टील के बर्तन दान करने से बचना चाहिए।
इन चीजों का दान कभी न करें
झाड़ू
खराब तेल
नुकीली चीजें (जैसें- चाकू, कैंची और तलवार)
स्टील के अलावा प्लास्टिक कांच और एल्युमिनियम के बर्तन
फटे-पुराने और गंदे कपड़ें
बासी या खराब भोजन
इन चीजों का दान करना होता है बेहद शुभ
घी
अनाज
नए और स्वच्छ वस्त्र
तिल
गुड़
🧆 आरोग्य संजीवनी 🍶
वैरिकोज वेन्स की समस्या में नीली पड़ती नसों पर लगाएं ये लेप वैरिकोज वेन्स की समस्या में नीली पड़ती नसों पर आप ये लेप लगा सकते हैं। आपको करना ये है कि आप थोड़ा सा पिप्पली और कच्ची हल्दी लें और इसे पीसकर इसमें सरसों का तेल मिला लें। अब इस लेप को अपनी वैरिकोज वेन्स वाली नीली नसों पर लगाएं। जब तक चाहें आप इसे रख सकते हैं और फिर गर्म पानी से धो लें। दूसरा, आप हल्दी, अदरक और एलोवेरा को पीसकर थोड़ी सी मिट्टी में मिला लें। अब इसे अपनी नसों पर लगाएं। ये तीनों तीन तरीके से काम करते हैं। हल्दी सूजन कम करता है, अदरक दर्द में कमी लाता है और एलोवेरा इन नसों में हाइड्रेशन बढ़ाता है। मिट्टी नसों की बेचैनी को कम करने में मदद कर सकता है।
वैरिकोज वेन्स में इस लेप को लगाने के फायदे वैरिकोज वेन्स की समस्या में इस लेप को लगाने के कई फायदे हैं। पहले तो ये आपकी नसों की बेचैनी को कम करते हुए दर्द में कमी लाता है। दूसरा, ये आपकी नसों में सूजन को कम करता है और नीलेपन में कमी लाता है। इसके अलावा ये लेप आपकी नसों को खोलने में मददगार है। इसके अलावा ये नसों में खून के प्रेशर को कम कर देता है जिससे इस समस्या में आप थोड़ी राहत महसूस कर सकते हैं।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
हमारी चिंताएं हमारे मन में रहती हैं और जब हम भगवान के घर के सामने सिर झुकाकर माथा टेकते हैं तो वह चिंताएं हमारे मन से गिरकर भगवान के चरणों में पहुंच जाती हैं और हम चिंताओं के बोझ से मुक्त हो जाते हैं। इसके अलावा मंदिर में घंटी बजाने से पहले भी सभी भक्त उसके प्रवेश द्वार पर या सीढ़ियों पर माथा टेकते हैं। जिन धार्मिक स्थानों या मंदिरों में प्रतिदिन घंटियों की ध्वनि सुनाई देती है, ऐसे मंदिरों को जागृत देव स्थान या जागृत मंदिर कहा जाता है।
ऐसे स्थानों पर या ऐसे मंदिरों के प्रवेश द्वार पर घंटी बजाने से भगवान की असीम कृपा प्राप्त होती है। यही प्रक्रिया हम अपने घरों के पूजा स्थलों यानी मंदिरों में पूजा के बाद भी करते हैं। इसे सिर्फ अंधविश्वास या मान्यता न समझें। बल्कि यह वैज्ञानिक और आध्यात्मिक रूप से सिद्ध प्रक्रिया है और प्राचीन काल से चली आ रही है और हर भक्त इसका पालन करता आ रहा है।
👉🏽 इन बातों का रखें खास ख्याल
पूजा करते समय कभी भी भगवान को एक हाथ से प्रणाम नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से व्यक्ति को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए भगवान को प्रणाम हमेशा दोनों हाथ जोड़कर करना चाहिए।
इसके अलावा शास्त्रों में यह बताया गया है कि अपने पिता और बड़े भाई को हमेशा लेटकर प्रणाम करना चाहिए और माता के सामने झुककर प्रणाम करना चाहिए।
पूजा करते समय मन को हमेशा पवित्र रखें। कहा जाता है कि पूजा के दौरान मन में बुरे ख्याल रखने से पूजा का फल नहीं मिलता है।
पूजा करने से पहले हमेशा पहले संकल्प लें और फिर पूजन शुरू करें।
स्त्री हो या फिर पुरुष पूजा के समय दोनों को ही सिर ढककर ही पूजा करनी चाहिए। पूजा करते समय अपना चेहरा पूर्व और उत्तर में से किसी भी दिशा में रखें।
वहीं पूजा के समय घंटी, धूप और दीप दाएं हाथ पर रखें होने चाहिए।
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⚜️ द्वादशी तिथि का नाम यशोबला भी है, क्योंकि इस दिन भगवान श्री विष्णु जी / भगवान श्रीकृष्ण जी का आंवले, इलाइची, पीले फूलो से पूजन करने से यश, बल और साहस की प्राप्ति होती है।
द्वादशी को श्री विष्णु जी की पूजा , अर्चना करने से मनुष्य को समस्त भौतिक सुखो और ऐश्वर्यों की प्राप्ति होती है, उसे समाज में सर्वत्र आदर मिलता है, उसकी समस्त मनोकामनाएं निश्चय ही पूर्ण होती है।
द्वादशी तिथि के दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना अत्यन्त श्रेयकर होता है। द्वादशी के दिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करें ।
भगवान विष्णु के भक्त बुध ग्रह का जन्म भी द्वादशी तिथि के दिन माना जाता है। इस दिन विष्णु भगवान के पूजन से बुध ग्रह भी मजबूत होता है ।
यदि द्वादशी तिथि सोमवार और शुक्रवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। द्वादशी यदि रविवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, यह अशुभ माना जाता है, इसमें भी शुभ कार्य करना मना किया गया हैं।


