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19 नवम्बर 2023 : छट पूजा कब, क्यों और कैसे मनाया जाता है छठ पर्व? शुभ मुहूर्त, महत्व, कथा और पूजा विधि

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री लक्ष्मी
🔮 19 नवम्बर 2023 : छट पूजा कब, क्यों और कैसे मनाया जाता है छठ पर्व? शुभ मुहूर्त, महत्व, कथा और पूजा विधि
HIGHLIGHTS
🔹 शहर से लेकर गांवों तक बजने लगे छठी मईया के गीत, पूजा की तैयारी में जुटे लोग
🔸 छठ पर्व को लेकर प्रारंभ हुई खरीदारी, बढ़ रही बाजारों में भीड़
🔹 छठमय होने लगा शहरी इलाके से लेकर गांवों का वातावरण
🪔 दिवाली, भाई दूज के बाद छठ पूजा का इंतजार बेसब्री से होने लगा है. छठ पर्व का हिंदू धर्म विशेष महत्व है. बिहार, झारखंड, और उत्तर प्रदेश की कई जगहों पर छठ का पर्व घूमधाम से मनाया जाता है. आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार कार्तिक छठ पूजा की शुरूआत 17 नंवबर 2023, शुक्रवार से होगी, सोमवार को कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की षष्ठी यानी छठी तिथि से आरंभ होगा. छठ का पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है. छठ का पर्व दिवाली के 6 दिन बाद मनाया जाता है. छठ की शुरूआत नहाय-खाय के साथ होती है. छठ के दूसरे दिन को खरना कहते हैं. इस दिन व्रती को पूरे दिन व्रत रखना होगा. शाम को व्रती महिलाएं मिट्टी के चूल्हे पर गुड़वाली खीर का प्रसाद बनाती हैं. छठ व्रत के तीसरे दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है. इस दिन महिलाएं शाम के समय तालाब या नदी में जाकर सूर्य भगवान को अर्घ्य देती है. चौथे दिन सूर्य देव को जल देकर छठ का समापन किया जाता है. तो चलिए जानते हैं छठ की कथा और छठ पूजा में बनाई जाने वाली गुड़ की खीर
🤷🏻‍♀️ छठ पूजा कब है 2023 में? (शुभ मुहूर्त और अरग देने का समय)
छठ पर्व कार्तिक माह की शुक्लपक्ष की षष्टी तिथि को मनाया जाता है, इस साल कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि 18 नवम्बर 2023, सुबह 09:18 बजे से प्रारंभ हो रही है जो 19 नवम्बर, सुबह 07:23 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार 2023 में छठ पूजा रविवार, 19 नवम्बर को मनाई जा रही है।
अरग देने का समय 2023: छठ पूजा पर संध्या अर्घ्य 19 नवंबर को शाम 5:26 बजे और उषा अर्घ्य 20 नवंबर को सुबह 6:47 बजे से दिया जाएगा।
छठ पर्व तिथि:- 19 नवम्बर 2023, रविवार
छठ के दिन सूर्यास्त (संध्या अर्घ्य):- 19 नवम्बर, शाम 05 बजकर 26 मिनट
छठ के दिन सूर्योदय (उषा अर्घ्य):- 20 नवम्बर, सुबह 06 बजकर 47 मिनट
🍛 छठ पूजा स्पेशल गुड़ की खीर
छठ पूजा के अवसर पर इस खीर को बनाया जाता है. गुड़ की खीर सभी जगह बहुत प्रसिद्ध है. गुड़ की खीर खाने में बहुत ही स्वादिष्ट होती है. इसे बिहार में रसिया और उत्तर प्रदेश में रसखीर के नाम से भी जाना जाता है.
🍱 छठ पूजा विधि
छठ पूजा के लिए कुछ जरूरी सामग्रियों की आवश्यकता होती है जिससे छठी मैया की विधि विधान से पूजा और सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जा सके यह सामग्री निम्नलिखित है:
बांस के तीन सूप, तीन बड़ी टोकरिया, चावल, दीया, हल्दी, दूध, शकरकंदी, सुथनी, सब्जी, सिंदूर, नारियल, गन्ना, साबुत, सुपारी, कपूर, नाशपाती, नींबू, शहद, पान और चंदन आदि।
प्रसाद भी काफी स्वच्छता और पवित्र तरीके से तैयार किया जाता है, जिसमें ठेकुआ, सूजी का हलवा, चावल के बने लड्डू तथा मालपुआ एवं खीर-पूरी आदि शामिल होता है।
अरग देते समय सभी सामग्रियों को बांस की टोकरी में रखे एवं प्रसाद को सूप में रखकर इस पर एक दिया जलाएं और फिर नदी के पानी में उतर कर सूर्य देव की पूजा कर अर्घ्य दें।
🤷🏻‍♀️ छठ पूजा का महत्व
छठ पूजा का महत्व वैदिक काल से चला आ रहा है। इस पर्व में शुद्धता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है। संपूर्ण विधि-विधान और पवित्रता के साथ छठ पूजा करने से रोग-दोष दूर होते हैं, संपन्नता आती है और पति की उम्र लंबी होती है। साथ ही संतान प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
छठ पर्व में महिलाएं 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखती हैं और संतान की सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना के लिए छठी मैया की पूजा करती हैं।
🗣️ छठ पूजा व्रत कथा
कहा जाता है कि छठ पूजा की शुरूआत रामायण काल में हुई थी। रावण का वध कर जब भगवान श्री राम और माता सीता वनवास काटकर अयोध्या लौटे तब उन्होंने इस उपवास का पालन किया था।
एक अन्य कथा महाभारत काल से भी जुड़ी हुई है। मान्यता है कि कर्ण सूर्यदेव के पुत्र होने के साथ उनके परम भक्त भी थे और वह पानी में कई घंटों तक खड़े रहकर उनको अर्घ्य देते थे और उनका पूजन करते थे।
पांडवों के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए द्रौपदी भी सूर्यदेव की उपासना किया करती थी। कहते हैं कि उनकी इस श्रद्धा ने पांडवों को उनका राजपाट वापस दिलाने में मदद की थी।

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