24 जुलाई 2023: सावन महीने का तीसरा और अधिक मास का पहला सोमवार
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
–—••●☆सब शिव है☆●••–—
🔮 24 जुलाई 2023: सावन महीने का तीसरा और अधिक मास का पहला सोमवार व्रत 24 जुलाई 2023 को रखा जाएगा. यह व्रत कई मायनों में खास होगा, क्योंकि इस दिन कई शुभ योग बनेंगे
🥏 *महत्वपूर्ण जानकारी सोमवार व्रत*
सोमवार व्रत हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण दिन होता है यह दिन भगवान शिव को सपर्पित होता है। इस दिन भगवान शिव की कृपा पाने के लिए शिव भक्त पूरे दिन का व्रत करते है। पूरे दिन का उपवास करके दिन श्याम के समय भोजन करना चाहिए अर्थात् पूरे दिन में एक बार भोजन कर सकते हैं।
सावन व श्रावण मास के सोमवार के व्रत का महत्व और भी ज्यादा होता है। सावन व श्रावण का महींना भगवान शिव को अति प्रिय होता है। इस मास के दौरान भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा होती है।
⚛️ अधिक मास के पहले सोमवार पर 3 शुभ योग
24 जुलाई को सावन के तीसरे और अधिक मास के पहले सोमवार पर रवि योग, शिव योग और सिद्ध योग का अद्भुत योग बन रहा है. शिव योग को शिवजी की पूजा और रुद्राभिषेक के बहुत शुभ माना जाता है. रवि योग में अशुभ स्थिति भी शुभता में बदल जाती है और सिद्ध योग को भी शुभ माना जाता है. इस योग में किए पूजा का फल प्राप्त होता है.
🔱 शिव योग: 23 जुलाई दोपहर 02:17 से शुरू होकर 24 जुलाई दोपहर 02:52 पर समाप्त होगा.
❄️ रवि योग: 24 जुलाई सुबह 05:38 से रात 10:12 तक
💮 अधिकमास के पहले सोमवार रुद्राभिषेक का मुहूर्त
24 जुलाई को अधिकमास के पहले सोमवार पर रुद्राभिषेक के लिए शिववास सुबह से ही है. इस दिन शिववास नंदी पर है. आप इस दिन दोपहर 01:42 तक रुद्राभिषेक कर सकते हैं. इसके बाद शिववास भोजन में है, जिसमें रुद्राभिषेक नहीं करना चाहिए।
🤷🏻♂️ सोमवार व्रत की पूजा कैसे करें
🔹 सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में सोकर उठें और स्नानादि से निवृत्त हो जाएं।
🔹 गंगा जल या पवित्र जल पूरे घर में छिड़कें।
🔹 घर में ही किसी पवित्र स्थान पर भगवान शिव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
🔹 अगर आप घर में शिव लिंग स्थापित है तो अभिषेक के साथ पूजा प्रारंभ करनी चाहिए।
🔹 अभिषेक के बाद बेलपत्र, समीपत्र, दूब, कुशा, कमल, नीलकमल, जंवाफूल कनेर, राई फूल आदि से शिवजी को प्रसन्न किया जाता है।
🔹 भगवान शिव का ध्यान करें।
🔹 ध्यान के पश्चात ’ॐ नमः शिवाय’ से शिवजी का तथा ’ ॐ शिवाय नमः ’ से पार्वतीजी का षोडशोपचार पूजन करें। पूजन के पश्चात व्रत कथा सुनें। उसके बाद आरती कर प्रसाद वितरण करें।
🗣️ *_सोमवार व्रत कथा_*
किसी नगर में एक साहूकार रहता था। उसके घर में धन की कोई कमी नहीं थी लेकिन उसकी कोई संतान नहीं थी जिस वजह से वह बेहद दुखी था। पुत्र प्राप्ति के लिए वह भगवान शिव प्रत्येक सोमवार व्रत र था और पूरी श्रद्धा के साथ शिवालय में जाकर भगवान शिव और पार्वती जी की पूजा करता था। उसकी भक्ति देखकर मां पार्वती प्रसन्न हो गई और भगवान शिव से उस साहूकार की मनोकामना पूर्ण करने का निवेदन किया। पार्वती जी की इच्छा सुनकर भगवान शिव ने कहा कि “हे पार्वती। इस संसार में हर प्राणी को उसके कर्मों के अनुसार फल मिलता है और जिसके भाग्य में जो हो उसे भोगना ही पड़ता है।” लेकिन पार्वती जी ने साहूकार की भक्ति का मान रखने के लिए उसकी मनोकामना पूर्ण करने की इच्छा जताई। माता पार्वती के आग्रह पर शिवजी ने साहूकार को पुत्र-प्राप्ति का वरदान तो दिया लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उसके बालक की आयु केवल बारह वर्ष होगी।
माता पार्वती और भगवान शिव की इस बातचीत को साहूकार सुन रहा था। उसे ना तो इस बात की खुशी थी और ना ही गम। वह पहले की भांति शिवजी की पूजा करता रहा। कुछ समय उपरांत साहूकार के घर एक पुत्र का जन्म हुआ। जब वह बालक ग्यारह वर्ष का हुआ तो उसे पढ़ने के लिए काशी भेज दिया गया।
साहूकार ने पुत्र के मामा को बुलाकर उसे बहुत सारा धन दिया और कहा कि तुम इस बालक को काशी विद्या प्राप्ति के लिए ले जाओ और मार्ग में यज्ञ कराओ। जहां भी यज्ञ कराओ वहीं पर ब्राह्मणों को भोजन कराते और दक्षिणा देते हुए जाना।
दोनों मामा-भांजे इसी तरह यज्ञ कराते और ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देते काशी की ओर चल पड़े। राते में एक नगर पड़ा जहां नगर के राजा की कन्या का विवाह था। लेकिन जिस राजकुमार से उसका विवाह होने वाला था वह एक आंख से काना था। राजकुमार के पिता ने अपने पुत्र के काना होने की बात को छुपाने के लिए एक चाल सोची। साहूकार के पुत्र को देखकर उसके मन में एक विचार आया। उसने सोचा क्यों न इस लड़के को दूल्हा बनाकर राजकुमारी से विवाह करा दूं। विवाह के बाद इसको धन देकर विदा कर दूंगा और राजकुमारी को अपने नगर ले जाऊंगा।
लड़के को दूल्हे का वस्त्र पहनाकर राजकुमारी से विवाह कर दिया गया। लेकिन साहूकार का पुत्र एक ईमानदार शख्स था। उसे यह बात न्यायसंगत नहीं लगी। उसने अवसर पाकर राजकुमारी की चुन्नी के पल्ले पर लिखा कि “तुम्हारा विवाह मेरे साथ हुआ है लेकिन जिस राजकुमार के संग तुम्हें भेजा जाएगा वह एक आंख से काना है। मैं तो काशी पढ़ने जा रहा हूं।”
जब राजकुमारी ने चुन्नी पर लिखी बातें पढ़ी तो उसने अपने माता-पिता को यह बात बताई। राजा ने अपनी पुत्री को विदा नहीं किया जिससे बारात वापस चली गई। दूसरी ओर साहूकार का लड़का और उसका मामा काशी पहुंचे और वहां जाकर उन्होंने यज्ञ किया। जिस दिन लड़के की आयु 12 साल की हुई उसी दिन यज्ञ रखा गया। लड़के ने अपने मामा से कहा कि मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं है। मामा ने कहा कि तुम अन्दर जाकर सो जाओ।
शिवजी के वरदानुसार कुछ ही क्षणों में उस बालक के प्राण निकल गए। मृत भांजे को देख उसके मामा ने विलाप शुरू किया। संयोगवश उसी समय शिवजी और माता पार्वती उधर से जा रहे थे। पार्वती ने भगवान से कहा- प्राणनाथ, मुझे इसके रोने के स्वर सहन नहीं हो रहा। आप इस व्यक्ति के कष्ट को अवश्य दूर करें| जब शिवजी मृत बालक के समीप गए तो वह बोले कि यह उसी साहूकार का पुत्र है, जिसे मैंने 12 वर्ष की आयु का वरदान दिया। अब इसकी आयु पूरी हो चुकी है। लेकिन मातृ भाव से विभोर माता पार्वती ने कहा कि हे महादेव आप इस बालक को और आयु देने की कृपा करें अन्यथा इसके वियोग में इसके माता-पिता भी तड़प-तड़प कर मर जाएंगे। माता पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव ने उस लड़के को जीवित होने का वरदान दिया| शिवजी की कृपा से वह लड़का जीवित हो गया। शिक्षा समाप्त करके लड़का मामा के साथ अपने नगर की ओर चल दिए। दोनों चलते हुए उसी नगर में पहुंचे, जहां उसका विवाह हुआ था। उस नगर में भी उन्होंने यज्ञ का आयोजन किया। उस लड़के के ससुर ने उसे पहचान लिया और महल में ले जाकर उसकी आवभगत की और अपनी पुत्री को विदा किया।
इधर भूखे-प्यासे रहकर साहूकार और उसकी पत्नी बेटे की प्रतीक्षा कर रहे थे। उन्होंने प्रण कर रखा था कि यदि उन्हें अपने बेटे की मृत्यु का समाचार मिला तो वह भी प्राण त्याग देंगे परंतु अपने बेटे के जीवित होने का समाचार पाकर वह बेहद प्रसन्न हुए। उसी रात भगवान शिव ने व्यापारी के स्वप्न में आकर कहा- हे श्रेष्ठी, मैंने तेरे सोमवार के व्रत करने और व्रतकथा सुनने से प्रसन्न होकर तेरे पुत्र को लम्बी आयु प्रदान की है।



