निजीकरण के दौर में भी चल रही हैं एक्सपायर जानलेवा खटारा बसें, यात्री हो रहे हैं परेशान
रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर । यात्रियों की सुविधा हेतु मध्यप्रदेश शासन द्वारा पूर्व में यहां संचालित मध्यप्रदेश राज्य परिवहन निगम की बसों को बंद कर उसके स्थान पर निजीकरण करते हुए निजी बस मालिकों को शासकीय परमिट पर नई व आराम देह बसें संचालित करने के अवसर प्रदान किए गए हैं । निजीकरण में बस मालिकों द्वारा नियमित टाइमिंग बसों में नई आरामदेह बसों को संचालित करने का आश्वासन दिया गया था नई बसें चली तो लेकिन देखा जा रहा है कि शुरू में जो बसें संचालित की गई थी वह अभी भी सड़कों पर उम्रदराज एवं एक्सपायर हो जाने के बाद भी जानलेवा बनी सड़कों पर दौड़ रही हैं शासन प्रशासन पुलिस आरटीओ द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिए जाने से यात्रियों को आरामदेह यात्रा के स्थान पर कष्टप्रद यात्रा करने को मजबूर होना पड़ रहा है यात्री व जनहित में बस मामलों को लेकर आरटीओ की भूमिका संदिग्ध एवं नगण्य प्रतीत हो रही है यह सब भारतीय लोकतंत्र में अफसरों की अफसरशाही किस कदर बढ़ गई है व आम प्रचलन में देखी जा रही है इससे नहीं लगता कि वह जनहित को सर्वोपरि मानकर काम हो रहे हैं। मनमानी तानाशाही लालफीताशाही के चलते आरटीओ विभाग अपने कार्यालयों में सिमट कर रह गया है उसे जमीनी हकीकत से कोई सरोकार नहीं रह गया है उसे तो परमिट प्रदान करने के बाद यह देखने की फुर्सत ही नहीं है कि बस उस परमिट पर चल भी रही है कि नहीं, निजीकरण के इस दौर में यदि खटारा बसें चलाई जाती हैं या चल रही है तो यह बेहद दुखद और बेहद चिंता का विषय है देखा जाता है कि बस मालिक नई नई बसें लेकर बैठे हुए हैं और आरटीओ पुरानी बसें बदलने को तैयार नहीं है । यात्रियों ने मांग की है कि सड़कों पर शासकीय परमिट पर चलने वाली बसें जो खटारा व एक्सपायर हो चुकी हैं उन्हें तत्काल हटाकर उनके स्थान पर नई बसों को परमिट दिए जाएं जिससे यात्रियों को हो रही परेशानी व दुखद यात्रा से निजात मिल सके।



