आज का पंचाग शनिवार 10 सितम्बर 2022
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 10 सितम्बर 2022
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
। श्री हरि आप सभी का कल्याण करें ।
👣 10 सितम्बर 2022 दिन शनिवार को स्नान-दान की पुर्णिमा भी है। आज उमामहेश्वर व्रत के साथ ही लोकपालों की पूजा का भी चलन है। अपरान्ह के उपरान्त नान्दीमातामहश्राद्ध (पार्वणवदस्यविधि) भी आरंभ हो जायेगी। आज ओणम व्रत (दक्षिण भारतीय व्रत) का चतुर्थ दिवस है। आज महावीरी झण्डा मेला (सीतामढ़ी) का प्रसिद्ध मेला होता है। आज श्रीनारायणगुरुजयंती केरला में मनाया जाता है।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात शनिवार को पीपल वृक्ष में मिश्री मिश्रित दूध से अर्घ्य देने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। पीपल के नीचे सायंकालीन समय में एक चतुर्मुख दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी ग्रह दोषों की निवृति हो जाती है।
पुराणों में वर्णित है कि पिप्पलाद ऋषि ने अपने बचपन में माता पिता के वियोग का कारण शनि देव को जानकर उनपर ब्रह्म दंड से प्रहार कर दिया, जिससे शनि देव घायल हो गए। देवताओं की प्रार्थना पर पिप्पलाद ऋषि ने शनि देव को इस बात पर क्षमा किया कि शनि जन्म से लेकर 16 साल तक की आयु तक एवं उनके भक्तो को किसी को भी कष्ट नहीं देंगे। तभी से पिप्पलाद का स्मरण करने से ही शनि देव के प्रकोप से मुक्ति मिल जाती है।
शिवपुराण के अनुसार शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि की पीड़ा शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – आश्र्विन माह प्रारम्भ
🌝 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथिः- पूर्णिमा तिथि 15:29:00 तक तदोपरान्त प्रतिपदा तिथि
✏️ तिथि स्वामीः- पूर्णिमा तिथि के स्वामी चन्द्र देव हैं तथा प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव हैं।
💫 नक्षत्रः- शतभिषा 09:37:00 तक तदोपरान्त पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र
🪐 नक्षत्र स्वामीः- शतभिषा नक्षत्र के स्वामी राहु हैं तदोपरान्त पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र के स्वामी गुरु हैं।
🔊 योगः- धृति 14:54:00 तक तदोपरान्त शूल
⚡ प्रथम करण : बव – 03:28 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बालव – 02:17 ए एम, सितम्बर 11 तक कौलव
🔥 गुलिक कालः- शुभ गुलिक काल 06:03:00 A.M से 07:36:00 A.M तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से अदरक खाकर जायें।
🤖 *राहुकालः- आज का राहु काल 09:08:00 से 10:44:00 तक राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया हैं।
🌞 *सूर्योदय – प्रातः 05:37:29*
🌅 सूर्यास्त – सायं 18:00:12
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:31 ए एम से 05:17 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 04:54 ए एम से 06:03 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:53 ए एम से 12:43 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:23 पी एम से 03:13 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:20 पी एम से 06:44 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:32 पी एम से 07:42 पी एम
💧 अमृत काल : 12:34 ए एम, सितम्बर 11 से 02:03 ए एम, सितम्बर 11
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:55 पी एम से 12:41 ए एम, सितम्बर 11
💥 धृति योग – आज दोपहर 2 बजकर 55 मिनट तक
☄️ शतभिषा नक्षत्र – आज सुबह 9 बजकर 37 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में काले तिल चढाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – शनिवार – महालया श्राद्धारम्भ, विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस, हरियाणा राज्य का दर्जा दिवस राष्ट्रीय दिवस, पंजाब राज्य का दर्जा दिवस, राष्ट्रीय दिवस, आचार्य भिक्षु निर्वाण दिवस, राष्ट्रीय दिवस,पं. गोविन्दवल्लभ पंत जन्म दिवस, पितृ तर्पण प्रारंभ, पंचक जारी
✍🏽 विशेष – पूर्णिमा को घी एवं प्रतिपदा को कुष्मांड खाना एवं दान करना दोनों वर्जित बताया गया है। पूर्णिमा तिथि एक सौम्य और पुष्टिदा तिथि मानी जाती है। इसके देवता चन्द्रमा हैं तथा यह पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह शुक्ल पक्ष में ही होती है और पूर्ण शुभ फलदायी मानी गयी है।
🗽 Vastu tips 🛕
पानी की निकासी की दिशा – घर का जितना भी जल घर से बाहर निकलता है उसके लिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि पूरा जल केवल पूर्व या उत्तर दिशा से ही निकले. इससे न केवल धन की बर्बादी रूकती है बल्कि आमदनी के साधन भी बढ़ते हैं
धन संचय की जगह – कहते है तिजोरी हो या अलमारी उसे इस तरह घर में रखना चाहिए कि इनका दरवाजा उत्तर दिशा की तरफ खुले. ऐसा होने से आर्थिक स्थिति कभी नहीं डगमगाती. उत्तर दिशा ही धन की दिशा है
तुलसी का पौधा सूखा तो नहीं – हमारे यहां हर घर में तुलसी का पौधा जरूर होता है. लेकिन तुलसी का पौधा खिला खिला और हरा भरा होना भी जरूरी है. अगर तुलसी सूख गई है तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए. ऐसा न करके हम घर में आर्थिक तंगी को बुलावा देते हैं
घर में न हो टूटा हुआ शीशा – टूटा हुआ शीशा हमेशा ही अशुभ माना जाता है. ये न केवल नकारात्मकता का संकेत है बल्कि इससे आर्थिक संकट का सामना भी करना पड़ सकता है।
⏺️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
गर्भ धारण करने के लिए उपाय
अगर आपको किसी कारणवश गर्भ धारण नहीं हो रहा हो तो मंगलवार के दिन कुम्हार के घर आएं और उसमें प्रार्थना कर मिट्टी के बर्तन वाला डोरा ले आएं। उसे किसी गिलास में जल भरकर दाल दें। कुछ समय पश्चात डोरे को निकाल लें और वह पानी पति-पत्नी दोनों पी लें। यह क्रिया केवल मंगलवार को ही करनी है अगर संभव हो तो उस दिन पति-पत्नी अवश्य ही रमण करें। गर्भ की स्थिति बनते ही उस डोरे को हनुमानजी के चरणों में रख दें।
आखिर क्यों मूली सिरहाने रखे
लाल किताब में बताया गया है कि जब जन्मपत्री में राहु कुण्डली के पांचवें घर में हो और संतान सुख में कठिनाई आ रही है। ऐसी स्थिति में राहु दोष को दूर करने के लिए घर के मुख्य दरवाजे के नीचे चांदी का पत्तर रखना चाहिए।
अगर आप यह काम नहीं कर पाते हैं 40 दिनों तक पांच मूली पत्नी के सिरहाने रखें और सुबह मूली को शिव मंदिर में रख आएं। इससे संतान प्राप्ति की संभावना बढ़ेगी।
🫄🏻 गर्भधारण कैसे
अगर आपको किसी कारणवश गर्भ धारण नहीं हो रहा हो तो मंगलवार के दिन कुम्हार के घर आएं और उसमें प्रार्थना कर मिट्टी के बर्तन वाला डोरा ले आएं। उसे किसी गिलास में जल भरकर दाल दें। कुछ समय पश्चात डोरे को निकाल लें और वह पानी पति-पत्नी दोनों पी लें। यह क्रिया केवल मंगलवार को ही करनी है अगर संभव हो तो उस दिन पति-पत्नी अवश्य ही रमण करें। गर्भ की स्थिति बनते ही उस डोरे को हनुमानजी के चरणों में रख दें।
🫕 आरोग्य संजीवनी 🍶
💥उड़द दाल क्या है
उड़द काली तथा हरी आदि कई तरह की होती है। सब प्रकार के उड़दों में काले रंग की उड़द उत्तम मानी जाती है। वैद्यक ग्रन्थों में अनेक पौष्टिक प्रयोगों में उड़द की प्रशंसा की गई है। वास्तव में आमिष भोजियों के लिए जिस प्रकार मांस पुष्टिदायक माना जाता है, उसी प्रकार या उससे बढ़कर निरामिष भोजियों के लिए माष अर्थात् उड़द मांसवर्धक और पुष्टिकर होता है।
उड़द दाल के फायदों के बारे में जितना बोले कम होगा, क्योंकि इसमें कैल्शियम, पोटाशियम, आयरन, फैट, जिंक जैसे अनेक पौष्टिक तत्व हैं जो न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है बल्कि यौन स्वास्थ्य के परेशानियों को सुधारने में भी मदद करते हैं।
उड़द प्रकृति से मधुर, गर्म तासीर की होती है। 👉✅➖उड़द की दाल वात कम करने वाली, शक्तिवर्द्धक, खाने में रुची बढ़ाने वाली, 👉➕कफपित्तवर्धक, शुक्राणु बढ़ाने वाली, वजन बढ़ाने वाली,रक्तपित्त के प्रकोप को कम करने वाली, मूत्र संबंधी समस्या में फायदेमंद, तथा परिश्रम करने वालों के लिए उपयुक्त आहार होता है। इसका प्रयोग पाइल्स, सांस की परेशानी में लाभप्रद होता है। इसके अलावा उड़द की जड़ अनिद्रा की बीमारी में बहुत फायदेमंद होती है क्योंकि इसके सेवन से नींद आती है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
नित्य वंदना के आवश्यक अंगो में संध्या प्रमुख अंग है। कुछ विद्वानों का मत है कि पंचमहाभौतिक शरीर का शुद्धिकरण मात्र ही संध्या है, लेकिन संध्या का उदेश्य यही नही है बल्कि मानव शरीर के अन्नमय, प्राणमय एवं वासनामय आदि सभी कोशों को शुद्ध करके मोक्ष प्राप्ति का प्रमुख साधन है। संध्या का फल बताते हुए मनु ने कहा है कि दीर्घ संध्या करके दीर्घायु बनें।
संध्या वंदन जितने अधिक समय तक हो, आयु उतनी ही अधिक होती है। संध्या के तीन काल कहा है कि दीर्घ संध्या करके दीर्घायु बनें। संध्या वंदन जितने अधिक समय तक हो, आयु उतनी ही अधिक होती है।
🎑 संध्या के तीन काल कहे गए है – उत्तम, मध्यम एवं कनिष्ठा।
इनके विषय में सूत्र ग्रंथो में इस प्रकार उल्लेख मिलता है- उत्तमा तारकोपेता, मध्यमा लुप्त तारका और कनिष्ठा सूर्य संहिता सायं संध्या त्रिधा स्मृता।। अर्थात् सूर्यास्त के पहले की गई संध्या उत्तम, सूर्यास्त के बाद परंतु तारे निकलने से पूर्व की गई संध्या मध्यम एवं तारों के उदय होने के बाद की गई संध्या कनिष्ठ होती हैं।
संध्या की योजना और रचना करते समय ही ऋषि-मुनियो ने मानव देहांतर्गत चयापचयों का विचार किया था। हर रोज पूजा-पाठ करने पर शरीर में संजीवनी का संचार होता है। संध्या मे प्राणायाम, शरीर शुद्धि, मन शुद्धि, गायत्री उपासना, आसन जप, देवता वंदन, दिग्बंधन तथा मोचन आदि कई बातों अंतर्भाव रहता है। संध्या करने से दिन भर आई थकावट समाप्त हो जाती हैं अलग-अलग धर्माें, पंथों और संप्रदायों के अनुसार संध्या करने के भेद भले ही अलग-अलग हों लेकिन सबका उदेश्य एक ही है और वह है नित्य दैनिक क्रियाओं के लिए स्वयं को शारिरीक एवं मानसिक रूप से तैयार करना ।
संध्या के प्रमुख अंग ? प्रमुख रूप से संध्या के 14 अंग है; आचमन, प्राणायाम, आसन, लघु, मार्जन, मंत्राचमन, दीर्घ मार्जन, अधम घर्षण, अघ्र्यदान, जप (न्यास, ध्यान), उपस्थान, दिक्प्रमाण, गुरूवंदन, देव-ब्रह्मण वंदन एवं द्विराचमन। इनमें से आचमन, प्राणायाम, अध्र्यदान, जप तथा द्विराचमन नितांत महत्वपूर्ण अंग हैं।
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⚜️ सनातन धर्म में हर मास की पूर्णिमा को कोई-न-कोई व्रत-त्यौहार होता ही है। जिनकी कुण्डली में चन्द्रमा की दशा चल रही हो उसे पूर्णिमा के दिन उपवास रखना अर्थात व्रत करना चाहिये। जिनके बच्चे कफ रोगी हों अर्थात सर्दी, जुकाम, खाँसी और निमोनियाँ समय-समय पर होती रहती हो उनकी माँ को वर्षपर्यन्त पूर्णिमा का व्रत करना और चन्द्रोदय के बाद चंद्रार्घ्य देकर व्रत तोड़ना चाहिये।
पूर्णिमा माता लक्ष्मी को विशेष प्रिय होती है। इसलिये आज के दिन महालक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से मनोवान्छित कामनाओं की सिद्धि होती है। पूर्णिमा को शिवलिंग पर शहद, कच्चा दूध, बिल्वपत्र, शमीपत्र, फुल तथा फलादि चढ़ाकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। पूर्णिमा को शिव पूजन में सफ़ेद चन्दन में केशर घिसकर शिवलिंग पर चढ़ाने से घर के पारिवारिक एवं आन्तरिक कलह और अशान्ति दूर होती है।
जिस व्यक्ति का जन्म पूर्णिमा तिथि को होता है, वह व्यक्ति पूर्ण चन्द्र की तरह आकर्षक और मोहक व्यक्तित्व का स्वामी होता है। इनकी बुद्धि उच्च स्तर की होती है। ऐसे जातक अच्छे खान पान के शौकीन होते हैं तथा ये सदा ही अपने कर्म में जुटे रहते हैं। ऐसे लोग अत्यधिक परिश्रमी होते हैं और इसी वजह से धनवान भी होते हैं। परन्तु इनमें एक बहुत बड़ी कमी ये होती है, कि ये सदैव परायी स्त्रियों पर मोहित रहते हैं

