मध्य प्रदेश

एक सप्ताह में प्रसव के दौरान दो नवजात शिशुओं की हुई मौत

ढीमरखेड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का मामला, परिजनों ने स्वास्थ्य कर्मियों पर लापरवाही का लगाया आरोप, अस्पताल प्रबंधन पर उठाए सवाल, सीएम हेल्पलाइन पर किया शिकायत
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान ।
ढीमरखेड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य में एक सप्ताह के भीतर प्रसव के दौरान दो शिशुओं की मौत होने की घटना सामने आई है। दोनों मामले झिंना पिपरिया गांव के ही हैं। ग्रामीणों ने स्टॉप नर्सों सहित स्वास्थ्य कर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए वरिष्ठ अधिकारियों और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर शिकायत दर्ज कराई है। रविवार को जननी वाहन में झिंना पिपरिया से गर्भवती अनीता बाई चौधरी ढीमरखेड़ा प्राथमिक अस्पताल पहुचीं। महिला जननी वाहन से नीचे नहीं उतर पाई और वाहन में ही प्रसव हो गया। स्टॉप नर्स मौके पर पहुचीं और प्रसव कराकर महिला को अस्पताल में भर्ती कराया। इस बीच नवजात शिशु की मौत हो गई। वहीं इसके पहले 19 सितम्बर को भी झिंना पिपरिया गांव की गर्भवती महिला किरण पटेल सुबह प्रसव के लिए ढीमरखेड़ा पहुँची। परिजन रेफर की मांग करते रहे, लेकिन नर्सों ने रेफर नहीं किया। रात को प्रसव हुआ और नवजात शिशु की मौत हो गई। महिला के परिजनों ने भी स्वास्थ्य विभाग के स्टॉप पर गंभीर आरोप लगाते हुए अधिकारियों से शिकायत किया है।बावजूद अधिकारियों द्वारा लापरवाही स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं किया है। वहीं ग्रामीणों ने बताया कि ढीमरखेड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में आयुष डॉ. जितेन्द्र बंसल द्वारा होम्योपैथिक इलाज किया जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि आयुष डॉक्टर से कोई भी संबंधित जानकारी लेता है तो डॉक्टर द्वारा किसी भी झूठे मामले में फसा देने की धमकियां दी जाती है। इस संबंध में एसडीएम नदिमा शीरी का कहना है कि बीएमओ से मामले की जांच कराई जाएगी। आयुष डॉक्टर होम्योपैथिक इलाज नहीं कर सकता है। वहीं बीएमओ डॉ. बीके प्रसाद का कहना है कि इस संबंध में जानकारी मिली है। जिसकी जांच की जाएगी। आयुष डॉक्टर के अस्पताल में बैठने को लेकर कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराकर अस्पताल से हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

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