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सुबह शाम काटती है मादा एनॉफिलीज मलेरिया के मरीज बढ़े

व्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । मलेरिया रोग का तेजी से फैलने का कारण एनॉफिलीज मच्छर होता हैं उसमें भी मादा एनॉफिलीज मच्छर ही मलेरिया फैलाती है। नर एनॉफिलीज मच्छर के काटने से मलेरिया नहीं फैलता । मादा एनॉफिलीज की खासियत यह है कि यह सूरज की रोशनी में सुबह शाम ही काटती है। दिन के समय लगभग निष्क्रिय रहती है। इस साल नए किस्म के मच्छर पैदा हुए है जो छोटे और पतले साइज में है जिन पर मच्छर मार अगरबत्तीयों का असर भी कम ही हो रहा है। अगरबत्ती जलती रहती है और मच्छर थोड़ी दूरी पर अपना काम करते रहते है। स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया से जुड़ी जानकारी जारी कर लोगों को मच्छरों से बचाव के तरीके बताए है जिनमें कई रोचक जानकारियों दी गई है। साथ ही इसमें मलेरिया व बचाव और रोकथाम व इलाज के उपाय भी बताए जा रहे है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता गांव गांव लोगो को जानकारी उपलब्ध कराए इसको लेकर बाकायदा चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय लक्ष्मी नागवंशी ने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओ को प्रशिक्षण देकर बताया कि मलेरिया फैलाने का मुख्य कारण मादा एनॉफिलीज मच्छर होता है यह सुबह शाम ही काटता है दिन के समय यह निष्क्रिय रहता है। हालांकि यह भी कहा जाता है कि मादा एनॉफिलीज रात के समय ही काटता है। मादा एनॉफिलीज मच्छर के शरीर में प्लाजमोडियम नामक परजीवी पाया जाता है।
जब यह मच्छर किसी इंसान को काटता है तो मलेरिया फैलाने वाला यह परजीवी ब्लड सर्कूलेशन के साथ व्यक्ति के लीवर तक पहुंच जाता है यहां पर यह अपनी संख्या को बढ़ाने में लगा रहता हैं इससे शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं डेमेज होने लगती हैं। प्रतिकूल प्रभाव के कारण व्यक्ति को तेज बुखार आने लगता है अन्य लक्षण भी नजर आने लगते हैं।
मलेरिया से बचाव के उपाय:- मच्छर सबसे ज्यादा ठहरे पानी में कूलर, एसी, के आसपास सबसे ज्यादा होते है गंदे नाले ठसा ठस भरी नालियों में भी ये खूब पनपते है जहां कही भी पानी का ठहराव हो गंदापानी एकत्रित हो उसे निकालते रहें, कूलर का पानी दो तीन दिन में बदलते रहें। लंबे समय से रूके पानी में हल्का सा केरोसनि या पेट्रोल या जला हुआ ऑयल डाला जा सकता है इससे मच्छर का लार्वा नष्ट हो जाता है।
बचाव ही एक तरीका- मलेरिया, डेंगू जैसी बीमारियों से बचने का सबसे बेहतर उपाय मच्छरों से बचाव करना है। जहां कभी भी मच्छर हो उन्हें नष्ट करना चाहिए। रूके या गंदे पानी को निकालना चाहिए। बुखार आने पर या लक्षण नजर आएं तो डॉक्टर को दिखएं व मलेरिया की जांच कराना चाहिए। प्रत्येक गांव स्तर पर इलाज की व्यवस्था की गई है। मच्छरदानी का उपयोग करें शासन ने गत वर्षो निःशुल्क मच्छरदानियां उपलब्ध कराई हैं जिन पर मच्छर ही नहीं बैठता है।

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