प्रभु नागर की कथा के अंतिम दिन उमड़ा जनसैलाब, भगवान शिव को बाघाम्बर पसंद है आडंबर नहीं : प्रभु नागर
ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । ज्ञान गंगा यज्ञ समिति द्वारा उत्कृष्ट स्कूल के मैदान में स्वर्गीय उदयराम राय एवं स्वर्गीय श्रीमती कुँवर बाई राय की स्मृति मैं उनके बेटे संतोष राय ठेकेदार के द्वारा आयोजित कथा में संत प्रभु नगर ने कहा की दुनिया ने भगवान के मंदिर को भी व्यापार बना डाला। भगवान शिव को बाघाम्बर पसंद है आडंबर पसंद नही है । किसी वस्तु के बदले में भगवान से कुछ मांगना भक्ति नही व्यापार है । क्योंकि जब भगवान देता है तो कहीं नही जाना पड़ता घर बैठे मिलता है।
उन्होंने कहा कि कर्मो के फल तो व्यक्ति को भोगना ही पड़ेंगे । भगवान खुद उचित समय आने पर भक्तो को उनके मनोभिलाषित फल प्रदान करते है । पाप पल भर के कटेंगे लाखों योनियों में, इसलिए दान धर्म पुन्य करो खुले हाथ से करो लेकिन किसी स्वार्थ से मत करो, फल की इच्छा मत करो। स्वार्थ से करोंगे तो भगवान से जुड़ोगे नहीं बल्कि दूर हो जाओगे। हम सत्यवादी है लेकिन हम जो कुछ झूठ बोलते हैं वह कुछ निमित्त होता है, सत्य आजीवन बोल सकते हो लेकिन झूठ 24 घंटे नहीं चल सकता। झूठ कभी नहीं छिपता,एक झूठ को छिपाने के लिए कितने झूठ बोलोगे, लेकिन झूठ को आसमान में नहीं छिपाया जा सकता। श्री नागर ने अस्वथामां हाथी मारा गया के प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया और कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि आप मकान बनाते हो यदि कहीं से कोई गैप रह जाता है तो कोई कीड़ा अंदर आ सकता है, उसी तरह कलयुग है जो उसका असर है वह तो अपना असर दिखाएगा इसलिए अपने घर में ग्रंथ, तुलसी, गाय आदि रखना जिससे कोई गैप न छूटे ताकि कलिकाल प्रवेश न कर सके। हमेशा अच्छे कार्य करो तिकि धर्म में कोई गैप न रह सके। जब भी गैप आया है तो उसने व्यक्ति, देश ही नहीं धर्म का भी नुकसान किया है।
उन्होंने उपस्थित विशाल जनसमुदाय से कहा कि भगवान की भक्ति करो और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः जपो , सभी भगवान इस मंत्र में समाए हुए हैं। भगवान की शरणागति हो जाओ ये आपके हाथ है । भगवान आपको कोन सी गति दे परमगति दे दिव्यगति दे ये उसके हाथ में है।
उन्होंने लोगों को जीवन की सीख देते हुए कहा कि सूर्यनारायण तेजस्वी है। जिनकी गर्मी से सब सूख जाता है। दो चीज ऐसी हैं, जिसे सूर्यनारायण नहीं सुखा सकते हैं, आंखों के आंसू और मेहनत का पसीना। इसलिए कभी अपने मां-बाप, दीन-हीन और मजलूम की आंखों में आंसू मत आने देना। मजदूर का पसीना सूखने से पहले उसे मजदूरी दे देनी चाहिए।पं. नागर ने कहा कि कथा सुनने के बाद घर जाकर चिंतन करना चाहिए। जैसे पोहे बनाने के बाद अगर आप उसे गर्म पानी के भाप में नहीं रखोगे, तो थोड़ी देर में वो चामठे हो जाते हैं। वैसे ही अगर आप कथा सुनकर उसे चिंतन नहीं करेंगे तो वो निष्फल हो जाते हैं, बीमारी पहले मन में आती है, फिर तन में आती है। अच्छा सोचोगे तो अच्छा ही होगा। भोजन करते समय अच्छी वस्तु को हम आखरी में खांते हैं, जिससे मुंह का टेस्ट बना रहे। वैसे ही जीवन के अंतिम समय गीता के ज्ञान स्वरूप को याद करना तो अगले जन्म में फिर इसी काया में जन्म मिलेगा और कथा सुनने का मौका भी मिलेगा।
कथा के समापन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता भारी संख्या में उपस्थित हुए विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री ठाकुर रामपाल सिंह राजपूत, पूर्व विधायक देवेंद्र पटेल, पूर्व नप अध्यक्ष प्रतिनिधि मलखान सिंह जाट, प्रदेश कांग्रेस महामंत्री राजेंद्र सिंह तोमर,नपा अध्यक्ष संदीप लोधी, जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि पुष्पेंद्र सिंह ठाकुर, जिला पंचायत सदस्य मोहित लोधी, हिंदू उत्सव समिति अध्यक्ष संजय राय, राकेश राय, बसंत शर्मा, बबलू यादव, पार्षद राजेश यादव , सुरेश ताम्रकार , पार्षद ओमकार यादव, जनपद सदस्य वीरू यादव, लोकेंद्र लोधी, पूर्व हिंदू उत्सव समिति अध्यक्ष उपेंद्र ठाकुर, अवधेश गौर, संदीप विश्वकर्मा समेत मुख्य यजमान हरिकेश राय संतोष राय ने व्यासपीठ की आरती उतारी और प्रसादी का वितरण किया।
कार्यक्रम को व्यवस्थित करने के लिए प्रशासनिक एवं पुलिस आमला निरंतर अपनी सेवाएं देता रहा विभिन्न समाज सेवी ग्रुप नगर रक्षा समिति के सदस्य, नपा के सफाई कर्मी, बिजली कर्मचारी भी अपनी सेवाएं देते रहे, आयोजक संतोष राय ठेकेदार द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया।


