बाइकों की साइलेंसरो से निकल रही अजीब अजीब आवाजों से लोग भ्रर्मित
ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । शहर में स्टाइलिश व पर्सनालिटी बाइक के रूप में बुलेट का उपयोग तेजी से बढ़ा है और आज सड़कों पर नई पुरानी कई सारी बुलेट दौड़ रही है। खास बात यह है कि इनमें अलग अलग तरह का साइलेंसर का उपयोग करके धमाका व रिवाल्वर के फायर जैसे साउड का तेजी से ट्रेड चल रहा है। लेकिन युवाओं का यह शौक लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है कई बीमार किस्म के लोग इन आवाजों को कुछ और समझ लेते है जिससे उनका ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है।
शहर में इस तरह के अनेक वाहन साइलेंसर की तेज आवाज के चलते अनेक लोगो को भ्रमित कर उनकी बीमारी में इजाफा कर रहे है। वही यह ध्वनि प्रदूषण के लिए भी एक बड़ा खतरा बन गए है। जिम्मेदार अधिकारी इन पर कोई ध्यान नहीं दे रहे है।
ऐसे हो जाते हैं हादसे:- दरअसल युवाओं की पसंद बन चुकी बुलेट की तेज रफ्तार से साइलेंसर में गैस एकत्रित होती है और इसके लिए वाहन में लगे स्विच को ऑफ ऑन मोड पर करने से वाहन में भरी गैस पटाखे या रिवाल्वर से हुए फायर की तरह साउंड करती है। इस आवाज से सड़क पर चल रहे अन्य दो पहिया वाहन चालक डर कर गिर जाते है। वहीं बच्चे और महिलाए जो इस आवाज से अंजान होती है वह घबरा जाते है जिससे भी हादसे की स्थिती बन जाती है।
तय है ध्वनि प्रदूषण नियम:- इन हालातों को देखते हुए 14 फरवरी 2000 को केन्द्र सरकार ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत सार्वजनिक स्थलों में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को नियंत्रित करने ध्वनि प्रदूषण विनिनियम और नियंत्रण नियम 2000 को अधिनियमित किया था। वर्ष 2010 में नियम 5 में संशोधन किया गया और इसके तहत ध्वनि पैदा करने वाले उपकरण के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया और इन सभी के उपयोग के लिए अनुमति जरूरी होती है।
इन साइलेंसर्स की है डिमाड:- बुलेट व अन्य भारी वाहनों के साथ युवाओ को उसके साइलेंसर का भी एक अलग क्रेज देखा जा रहा है।
और इसके चलते मैकेनिक व युवाओं के बीच कई साइलेंसर अजीबो गरीग नामों से बिक रहे हैं। छोटा पजाब–यह साइलेंसर आम युवाओं की खास पसद बना हुआ है। अन्य साइलेंसरों की तुलना में यह सस्ता होता ही है वहीं इसकी आवाज भी तेज होती है। वर्तमान में इसकी बाजार में कीमत आठ सो से एक हजार रूपए के बीच है।
बड़ा पंजाब – युवाओ के लिए बुलेट वाहन के लिए यह भी एक काफी पापुलर साइलेंसर है। छोटे पंजाब के मुकाबले इसकी आवाज ज्यादा तेज होती है। इसमे धमक भी तेज होती हैं। वर्तमान में इसकी कीमत एक हजार से 15 सो रूपए के बीच बताई जा रही है।
कोबरा – इस नाम के साइलेंसर को इसके बेहतर स्टाइल और साउड की वजह से युवाओं द्वारा पसंद किया जाता है इसके ज्यादा बेस वाला साउड निकलता है जो युवाओं को लुभाता है। वर्तमान में इसकी बाजार कीमत तीन से 6 हजार रूपए है।
डबल बैरल – आवाज के साथ अपने वाहन को अलग दिखाने के लिए यह साइलेंसर भी युवाओं के बीच खासा लोकप्रिय है। इसमें एक की जगह दो एग्जास्ट पाइप लगे होते है। जिससे यह ज्यादा स्टाइल देता है इसकी कीमत 27 सो से 42 सो रूपए बताई जा रही है। इसके अलावा ट्रेल गनर, डॉल्फिन, बैरल एग्जास्ट नाम के साइलेंसर भी बाजार में उपलब्ध है जो उक्त कीमतों में मिल रहे है।
इनका कहना है – डॉ. सदीप यादव का कहना है कि साइलेंसरो से निकलने वाली धमाके वाली आवाज अचानक किसी ह्रदय रोगी के पास होती है तो उसे हार्ट अटैक आने का खतरा रहता है। 5 से 20 डेसीबल साउंड सेफ माना जाता है। इससे अधिक साउड ठीक नही होता अगर कोई तेज आवाज अचानक आती है तो इससे क्षणिक बहरापन भी हो सकता है।
वरिष्ठ मेडिकल ऑफिसर डॉ. विजयलक्ष्मी नागवंशी का कहना है कि कानों के पास तेज आवाज होती है तो नसे पूरी तरह से खराब भी हो सकती है इसी तरह बच्चों सहित गर्भवति महिलाओं के लिए भी तेज साउंड से खतरा होता है इससे सुनने और समझने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता हैं वही यह चिड़ चिड़ापन पैदा करती है।
एडव्होकेट जहाज़ेब खान ने बताया कि कंपनी द्वारा दिए गए वाहन के आकार में परिवर्तन नहीं कर सकते। इसके साथ शोर के मानक से ज्यादा साउंड का उपयोग नहीं किया जा सकता। प्रशासन को कार्रवाई करना चाहिए। हालांकि इसमें जुर्माना होता है पर सजा का प्रावधान नहीं है।
इस संबंध मे एसडीओपी सुनील कुमार वरकड़े का कहना है कि ऐसे वाहन जो अपने मूल ढांचे में परिवर्तन करते है उनमें मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 39/192 में यातायात पुलिस द्वारा कार्रवाई की जाती है और उस पर न्यायालय द्वारा जुर्माना किया जाता है। पुलिस द्वारा वाहन चेकिंग की जाती है और ऐसे वाहनों के विरूद्ध कार्रवाई की भी जा रही है। यदि इस तरह की और भी शिकायतें आ रही हैं तो उन् पर भी तत्काल कार्रवाई की जाएगी।



