बच्चों को सुनने की जांच कराना अतिआवश्यक 50 बच्चों को नि:शुल्क हेरिगेट दिये गये
थेरेपी के बाद बच्चे सुनने और बोलने में हुये सक्षम
रिपोर्टर : तारकेश्वर शर्मा
भोपाल । नवजात शिशु जन्म से ही सुरक्षित रहे, उसे किसी प्रकार की बीमारी या शारीरिक परेशानी न हो इसके लिये सरकार द्वारा टीके, दवाईयों से सुरक्षित तो करती ही है, इसके अलावा भी योजनाओं से शिशुओं को लाभ पहुंचाने का कार्य करती है। शून्य से लेकर 18 वर्ष के बच्चों की देखरेख और इलाज के लिये सरकार द्वारा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम भी चला रही है।
जिला चिकित्सालय के ऑडियो लाजिस्ट एण्ड स्पीच थेरेपी के पद पर कार्यरत संदीप पटेल बताते हैं डी.ई.आई.सी. केन्द्र का मुख्य उद्देश्य है कि जन्म जात बच्चों की जल्द से जल्द सुनने की जांच की जाये और यदि बच्चों में सुनने से संबंधित समस्या पाई जाती है तो जल्द से जल्द उपचार किया जाये, जिससे बच्चे समय पर सुन सकें और समय से बोल सके। कुछ बच्चो के परिजन यहां पर लेकर नहीं आ पाते है तो आर.बी.एस.के. की टीम फील्ड पर रहती है, वह आंगनबाड़ी केन्द्रों और स्कूलो में जाकर बच्चो की पहचान करती है।
यदि टीम को बच्चों में सुनने या समझने से संबंधित समस्या लगती है तो उन बच्चों को दमोह डी.ई.आई.सी. केन्द्र पर लाया जाता है, यहां पर नाक, कान, गले के विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा बच्चों का चेकअप किया जाता है। यदि बच्चों किसी प्रकार की समस्या पाई जाती है, तो उन्हें ऑडियो लाजिस्ट एण्ड स्पीच थेरेपिस्ट के पास भेजा जाता है, यहां पर उनकी जांच की जाती है, यदि समस्या होती है तो बच्चे की स्पीच थेरेपी या कान में सुनने की मशीन लगनी है, यह तय किया जाता है। इन थेरेपी के बाद बच्चे सुनने और बोलने में सक्षम हो पाते है।
संदीप पटेल ने कहा लोगो का मानना है की सुनने की समस्या सिर्फ बुजुर्गो में होती है पर ऐसा नहीं है, बच्चे सुनने और बोलने की समस्या के साथ पैदा हो सकते है। इसके लिये बच्चों को सुनने की जांच कराना अतिआवश्यक है। ऑटो इकोस्टिक इमिशन (ओ.ई. मशीन) से टेस्ट किया जाता है, इससे जन्म के 24 घंटे के बाद बच्चे की हेयरिंग स्क्रिडिंग की जा सकती है जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि बच्चों में सुनने की समस्या है या नहीं है। यदि बच्चो मे सुनने की समस्या पाई जाती है तो उसका डिटेल असिस्मेंट आगे किया जाता है।
अभी तक शून्य से 05 वर्ष के 25 बच्चे ऐसे है जिनमे सुनने और बोलने की समस्या पाई गई थी, फिर उनका कोक्लियरम प्लांट करवाया गया जिससे बच्चों के सुनने की शक्ति काफी हद तक वापिस आ गई है, बच्चे सुनने लगे है और बोलने भी लगे है। कुछ बच्चे स्कूलो में जाकर पढ़ने भी लगे है।
संदीप पटेल बताते हैं कोक्लियरम प्लांट उन बच्चों का होता है जिन्हें हेरिगेट से फायदा नहीं होता है। यहां से लगभग 50 बच्चों को नि:शुल्क हेरिगेट दिये गये है।



