मध्य प्रदेश

ज्यादा दाम में धड़ल्ले से बेची जा रही शराब

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान l प्रदेश सरकार ने सभी शराब दुकानों से शराब बिक्री होने पर बिल देना अनिवार्य कर दिया है। शासन ने भोपाल मुख्यालय से इस संबंध में आदेश भी जारी किए हैं। बावजूद इसके ग्रामीण क्षेत्र की शराब दुकानों में शासन के आदेश को लागू कराने के प्रयास में ढीमरखेड़ा थाना प्रभारी एवं सिलौड़ी चौकी प्रभारी के पसीना छूट रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों की शराब दुकानों में न तो रेट लिस्ट लगी है और न ही बिल दिया जा रहा है। ढीमरखेड़ा, सिलौड़ी एवं खमतरा शराब दुकान से आज भी एमआरपी से 50 से 100 रुपये अधिक कीमत पर शराब बेची जा रही है।
शिकायतों का असर नहीं
ग्रामीण बताते हैं कि प्रदेश सरकार ने वाहवाही लूटने के लिए शराब दुकानों में बिल अनिवार्य का आदेश तो जारी कर दिया, लेकिन इसे जमीनी स्तर पर लागू करवाने में ढीमरखेड़ा थाना प्रभारी एवं सिलौड़ी चौकी प्रभारी नाकाम हैं। प्रतिदिन सैकड़ों शिकायत होने के बाद भी ढीमरखेड़ा थाना प्रभारी एवं सिलौड़ी चौकी प्रभारी अंजान बने हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में शराब पीने वालों को हर ब्रांड की बोतल, हाफ-क्वार्टर खरीदने के लिए 50 से 100 रुपये अधिक देना पड़ रहा है। शराब माफियाओं के सामने प्रशासनिक अधिकारी ही बेबस हैं, तो ग्राहक किससे शिकायत करे? शराब दुकान के कर्मचारी बिल ही नहीं देते हैं मांगने पर कहते हैं कि ऊपर से बिल नहीं आ रहे हैं। परन्तु सवाल यह है की अधिकारी कुंभकरण निद्रा में सो रहे हैं।अधिकारियों को जांच करने का समय ही नहीं हैं।ढीमरखेड़ा,सिलौड़ी एवं खमतरा दुकान में रेट लिस्ट नहीं लगी।
जनप्रतिनिधियों की शिकायत के बाद भी जांच पड़ी सस्ते- बस्ते में
लगातार क्षेत्र में अवैध शराब पैकारियों की शिकायत जनपद,विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल प्रखण्ड अध्यक्ष पंकज तिवारी,मुरवारी उपसरपंच अज्जू लोधी के द्वारा लगातार शिकायत की गई पर जांच पड़ी सस्ते-बस्ते में। जनपद अध्यक्ष सुनीता संतोष दुबे ने कलेक्टर साहब का भी पत्राचार करके ध्यान आकर्षित कराया था। जांच ना होने के कारण शराब माफियाओं के हौसले बुलंद होते नजर आ रहे हैं।अवैध पैकारिया बंद न होने के कारण क्षेत्र में जनप्रतिनिधियों की भी किरकिरी हो रही है।

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