मध्य प्रदेश

मंत्री विजय शाह के खिलाफ सेना का अपमान व देशद्रोह की FIR

देश की अखंडता – महिला के अपमान करने का भी आरोप
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । जिला कांग्रेस कटनी ने आरोप लगाया है कि मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह द्वारा बयान दिया गया जिसमें उन्होंने सेना की महिला अधिकारी की ओर इंगित करते हुए जिसे उन्हाने बाद में जारी अन्य बयान में कर्नल सोफिया कुरैशी का नाम लिया है। जिन्हें पहलगाव हमले में आतंकियों द्वारा किए गए नृशंस हत्याकांड होने के पश्चात सेना में महिला अधिकारी कर्नल सौफिया कुरैशी को प्रवक्ता के रूप में जिम्मेदारी दी गई है उन्हें आतंकवादियों की बहन कहते हुए उनके प्रति अपशब्दों का प्रयोग किया, सेना की अधिकारी को आतंकवादियों के साथ जोड़ा गया, एक वर्ग विशेष के विरूद्ध अपशब्दों का प्रयोग किया गया तथा देश की एकता, अखंडता को बिगाड़ने का कृत्य किया गया है जिससे सभी देशवासी दुःखी एवं आक्रोशित हैं। मंत्री विजय शाह द्वारा किए गए कृत्य भारतीय न्याय संहिता की धारा 351, 352, 353, 78 एवं धारा 152 के अन्तर्गत गंभीर अपराध की परिधि में आता है।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष करण सिंह चौहान, पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष मिथलेश जैन, जिला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष अमित शुक्ला, कार्यवाहक अध्यक्ष राजा जगवनी, पूर्व जनपद अध्यक्ष जहरा बेगम, जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष रजनी वर्मा, जिला सेवादल अध्यक्ष पंकज गौतम, जिला कांग्रेस सचिव रॉबिन पीटर, महामंत्री अजय जैसवानी, पूर्व पार्षद मंजू निषाद, प्रदेश महिला कांग्रेस महामंत्री माया चौधरी, प्रदेश सचिव मुमताज बानो, शोभा मंगलानी, कल्पना पाठक, हुसैन जहां बेगम, वहीद बेगम, शशि यादव, सरिता कटारे, विक्रम पुरुष वाणी, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष ईश्वर बहरानी आदि कांग्रेस जन कटनी कोतवाली पहुंचे।
मंत्री विजय शाह द्वारा संविधान की शपथ लेकर देश की सेना एवं उसके अधिकारी के विरूद्ध अपशब्दों का प्रयोग कर देश में वर्तमान समय में संवैदनशील स्थिति को प्रभावित कर माहौल बिगाड़ने का कृत्य किया है जो कि देशद्रोह की परिधि में आता है तथा महिला अधिकारी कर्नल सौफिया कुरैशी जो कि देश की सेना में जिम्मेदार पद पर रहते हुए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही है उनको आतंकवादियों से जोड़कर सेना के अधिकारियों एवं महिलाओं का अपमान किया है।
मंत्री विजय शाह के विरूद्ध भारतीय न्याय संहिता के अन्तर्गत अपराध कायम कर उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया जावे जिससे कि उनके विरूद्ध दंडात्मक कार्यवाही हो।

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