मध्य प्रदेशहेल्थ

फाइलेरिया जैसी बीमारियो से बचने के लिए घर घर वितरित की जा रही दवा

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान l उमरियापान में फाइलेरिया बीमारी से बचाव के लिए दवा खिलाई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की एएनएम कांता मिश्रा ने फाइलेरिया से बचने के उपाय बताएं। साथ ही दवा से होने वाले फायदों को भी बताया। फाइलेरिया दुनिया भर में विकलांगता और विरूपता बढ़ाने वाला सबसे बड़ा रोग है इसे एक संक्रमण के रूप में भी देखा जाता है। यह एक पैरासाइट डिजिट है जो कि धागे के समान दिखाई देने वाले निमेटोड कीड़ों के शरीर में प्रवेश करने की वजह से होती है। दुनिया भर में फाइलेरिया मुख्य रूप से गरीब लोगों और उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अधिक पाया जाता है। फाइलेरिया को फीलपाँव, श्लीपद के नाम से जाना जाता है। भारत में इसे सामान्य तौर पर हाथी पाँव के नाम से जाना जाता है, क्योंकि इस रोग में व्यक्ति का पाँव हाथी के पाँव की तरह हो जाता है। भारत सरकार का भारतीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, इस रोग से लड़ने वालों के लिए मुफ्त उपचार प्रदान करता हैं। अकेले भारत में ही करोड़ों लोगों को फाइलेरिया होने का जोखिम हैं। हाथी पाँव यानि फाइलेरिया रोग कई तरह से गंभीर है पहला यह कि इसका कोई इलाज मौजूद नहीं है, और दूसरा इसके प्रकार। लेकिन अगर फाइलेरिया रोग के सबसे गंभीर रूप को देखा जाए तो वह निश्चित ही इससे होने वाली कुरूपता है। इस रोग की वजह से व्यक्ति के पाँव और अन्य प्रभावित अंग काफी कुरूप हो जाते हैं, जिसकी वजह से व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक दोनों समस्याओं का सामना करना पड़ता है। रोगी समाज से कटना शुरू हो जाता है और लोगों से मिलना झुलना बंद कर देता है, क्योंकि लोग उन्हें किसी कलंक के रूप में देखते हैं। वहीं, भारत के कई क्षेत्रों में इसे ईश्वरीय प्रकोप के रूप में भी परिभाषित किया जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण है, कम जानकारी। सबसे अच्छी बात है कि स्वास्थ्य विभाग के द्वारा बहुत अच्छी पहल चलाकर लोगों को फाइलेरिया के बारे में जागरूक किया जा रहा है साथ ही साथ फाइलेरिया मुक्त की दवा भी वितरित की जा रही है।

Related Articles

Back to top button