मध्य प्रदेश
CM MadhyPradesh आर्थिक सर्वे के प्रमुख बिंदु, आर्थिक अवलोकन, सार्वजनिक वित्त एवं बैंकिंग पर मुख्यमंत्री ने मीडिया को बताया
ब्यूरो चीफ : मनीष श्रीवास
भोपाल। भारत के प्रधानमंत्री द्वारा भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के संकल्प में मध्यप्रदेश द्वारा 550 बिलियन डॉलर का योगदान देने का लक्ष्य तय किया है एवं प्रदेश इस ओर तेजी से बढ़ रहा है। स्थिर कीमतों पर, इस वर्ष 2022-23 (अ.अ.) पर आधारित प्रदेश का GSDP 7.06% से बढ़ा है। स्थिर कीमतों पर, प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2011-12 में 38,497 रुपये से बढ़कर 2022-23 के अग्रिम अनुमान के अनुसार रु. 65,023 हो गई, जो इस अवधि के दौरान 70 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। प्रति व्यक्ति आय में विगत वर्ष की तुलना में इस वर्ष 5.67% की वृद्धि हुई है।
- मध्य प्रदेश सरकार के बजट का आकार वर्ष 2001 में रु. 16,393 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2023 में रु. 2,47,715 करोड़ हो चुका है। बजट में यह वृद्धि वर्ष 2001 की तुलना में लगभग 15 गुना है। प्रदेश का व्यय बजट विगत वर्ष में रु. 2,17,313 करोड़ (पू.अ.) 14% से बढ़कर रु. 2,47,715 (ब.अ.) करोड़ हुआ है। राज्य ने राजकोषीय अनुशासन का निरंतर पालन किया है। ऋण-जीएसडीपी का अनुपात जो कि वर्ष 2005 में 39.5 प्रतिशत था, वह घटकर 2020 में 22.6
प्रतिशत हो गया। राज्य शासन का पूंजीगत व्यय रु. 37,089 करोड़ (पू.अ.)
23.18% से बढ़कर रु. 45,685 (ब.अ.) करोड़ हुआ है। - वर्ष 2018-19 से 2021-22 के बीच, राज्य का अपना राजस्व 7.94 प्रतिशत सीएजीआर से बढ़ा, जबकि केंद्रीय करों में हिस्सेदारी केवल 0.59 प्रतिशत बढ़ी। 2022-23 (BE) में राज्य की अपनी राजस्व वृद्धि दर 13.32 प्रतिशत रही, जबकि केंद्रीय करों में हिस्सेदारी पिछले वर्ष की तुलना में 9.81 प्रतिशत बढ़ी। यह राजस्व प्राप्तियों में सुधार की शुरुआत को दर्शाता है, जिससे राजकोषीय समेकन (Fiscal Consolidation) का मार्ग प्रशस्त होता है।
- सरकारी बैंकिंग व्यवसाय के क्षेत्र में डिजिटलीकरण की ओर बढ़ते हुए विगत दिसम्बर 2022 को मध्य प्रदेश राज्य सरकार के एकीकृत वित्तीय प्रबंधन सूचना प्रणाली (IFMIS) का भारतीय रिजर्व बैंक के कोर बैंकिंग सोल्यूशन ‘ई-कुबेर’ के साथ एकीकरण को क्रियान्वित किया गया। इस व्यवस्था के अंतर्गत भारतीय रिजर्व बैंक में मध्य प्रदेश राज्य के समस्त 54 कोषालयों के आहरण खाते खोले जा चुके हैं एवं सफलतापूर्वक परिचालित हो रहे हैं।
- अर्थव्यवस्था के आकार में वृद्धि को दृष्टिगत रखते हुए राज्य में वर्ष 2005-06 से 2022-23 की अवधि में प्राथमिकता क्षेत्र को ऋण (Priority Sector Lending) का विस्तार 15.45 प्रतिशत CAGR की दर से हुआ है। इसका मान 9,437 करोड़ रुपए से बढ़कर रु. 2,15,427 करोड़ हो गया है। इसी क्रम में कृषि ऋण में 13.41 प्रतिशत की वृद्धि हुई और एम. एस.एम.ई. में 30.22 प्रतिशत की वृद्धि हुई
- राज्य में कुल अग्रिम (Advances) का 59.41 प्रतिशत ऋण प्राथमिकता क्षेत्र को दिया गया जो 40 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत लक्ष्य से अधिक है। जबकि कृषि को कुल ऋण का 32.2 प्रतिशत प्राप्त हुआ जो 18 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत लक्ष्य से अधिक है।
वित्तीय समावेशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री जन धन योजना के अंतर्गत प्रदेश में अब तक कुल 3.85 करोड़ बैंक खाते खोले गए हैं। 10. डिजिटल जिला कार्यक्रम के अंतर्गत तीन जिलों बैतूल, इंदौर और विदिशा ने - 100 प्रतिशत वित्तीय समावेशन डिजिटल जिले का दर्जा हासिल किया है। 11. मध्यप्रदेश में स्व सहायता समूहों द्वारा अर्थव्यवस्था में अभूतपूर्व योगदान दिया जा रहा है, उल्लेखनीय है की इसमे महिलाओं की बड़ी संख्या कार्यरत है। मध्यप्रदेश में वर्ष 2012-13 में 19,151 स्व सहायता समूह बने थे जिसमें 2,34,312 परिवार सम्मिलित थे, जो कि दिसंबर 2022 (वर्ष 2022-23) के अंत तक बढ़कर 4,20,838 हो गए हैं जिसमें 47,02, 311 परिवार सम्मिलित हुए हैं । महिला स्व सहायता समूहों को दिसंबर 2022 तक आरएफ (Revolving Funds), सीआरएफ (Community Revolving Fund), सीसीएल (Cash Credit Limit), स्टार्टअप फंड के माध्यम से रु. 6178.26 करोड़ का कुल वित्तीय सहयोग प्रदान किया गया है।



