धर्म की स्थापना करने पृथ्वी पर अवतरित होते हैं भगवान : संत ब्रह्मानंद

जिले की ग्राम पौड़ी में बह रही भागवत रूपी अमृत मई गंगा
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत |अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् | धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे जी हा ऐसी ही भागवत रूपी अमृत मई गंगा जिले के ग्राम पौड़ी में प्रवाहित हो रही है विगत दिवस शुक्रवार को चतुर्थ दिवस की कथा में कथा व्यास बाल ब्रम्हचारी संत शिरोमणि ब्रह्मानंद दास जी महराज ने मन्वंतरों की कथा गज मगर की कथा भक्त प्रहलाद की कथा सहित अंत में महराज श्री ने भगवान श्री कृष्ण के जन्म की कथा पर प्रकाश डालामहराज श्री ने बताया कि जब जब धर्म का पतन होने लगता है तब तब भगवान धर्म की स्थापना करने के लिए पृथ्वी में अवतरित होते है साथ ही महराज जी ने कहा कि द्वापर में मथुरा देश के दो भाग थे तथा दोनों भाग पर दो वंशों के राजाओं का राज था । पहले बिष्टवंश में दो भाई देवक व उग्रसेन हुए जिसमे देवक बड़े थे जिनके इकलौती पुत्री देवकी थी जो राजपाट छोटे भाई उग्रसेन को सौंपकर भगवान की पूजा करने चले गए उग्रसेन को एक पुत्र कंस हुआ जो आताताई था। जिसने अपने पिता को जेल में डाल कर खुद राजा बन गया महराज श्री ने बताया कि वासुदेव जी का अठारहवां विवाह कंस की बहिन देवकी से हुआ विदाई के बाद कंस अपनी बहिन को छोड़ने जा रहा था तभी आकाशवाणी हुई कि रे कंस तू जिस बहिन को छोड़ने जा रहा है उसका सातवां पुत्र तेरा काल होगा ये सुनकर कंस ने देवकी और वासुदेव दोनों को कारागार में डाल दिया। दुराचारी कंस ने देवकी वासुदेव के 7 पुत्रों को मार दिया आठवें गर्भ में भगवान स्वयं गर्भ में आए भादोमास की अंधियारी रात को अष्टमी के दिन कंस के मथुरा जेल में अचानक अलौकिक प्रकाश फैलने लगा और माता देवकी के गर्भ से श्री कृष्ण का प्राकट्य हुआ। वहां के समस्त बंदी मूर्छित हो गए जेल के दरवाजे खुल गए आकाशवाणी हुई जिसे सुनकर वासुदेव नन्हे बालक रूप में लेकर यमुनापार गोकुल नंद के घर पहुंचकर वहां से नवजात कन्या को लेकर वापस आए । सुबह होते ही गोकुल में नंद बाबा के घर बालक जन्म होने की बात पता चलते ही उत्सव मनाया जाने लगा कथा पंडाल में भी भगवान जन्म का खूब उत्सव मनाया गया भजनों की धुन में भक्त जन खूब झूमे भगवान जन्म की कथा श्रवण करने के लिए भक्तों का जन सैलाब उमड़ा।

