Aaj ka Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 28 मार्च 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 28 मार्च 2023
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
👣 28 मार्च 2023 दिन मंगलवार को चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की बासन्तीय नवरात्रि का सातवाँ दिन है। आप सभी सनातनी बंधुओं को बासन्तीय नवरात्रा के सातवें दिन की माता चंडी की सातवीं स्वरूप माँ कालरात्रि के उपासना की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ। मातारानी से हमारी हार्दिक प्रार्थना यही है, कि आप सभी सनातनियों के सभी समस्याओं का समाधान कर उन्हें सुखद एवं आनंददायी जीवन प्रदान करें।।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर वसंत ऋतु
🌤️ मास – चैत्र मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – सप्तमी 20:28 PM बजे तक उपरान्त अष्टमी तिथि है।
✏️ तिथि स्वामी : इस प्रकार तिथियों का क्षय और वृद्धि स्वयं सूर्यनारायण ही करते हैं। अत: वे सबके स्वामी माने जाते हैं।
💫 नक्षत्र – मृगशिरा 19:02 PM तक उपरान्त आर्द्रा नक्षत्र है।
🪐 नक्षत्र स्वामी : नक्षत्र का स्वामी मंगल ग्रह है। चंद्रमा-देवता इस नक्षत्र के हिंदू देवता हैं जो अमर अमृत का प्रतीक हैं।
📢 योग – सौभाग्य 01:05 AM तक उपरान्त शोभन योग है।
⚡ प्रथम करण : वणिज – 07:02 पी एम तक
✨ द्वितीय करण :विष्टि – पूर्ण रात्रि तक
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का (अशुभ गुलिक) काल 12:26 पी एम से 01:59 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:00 बजे से 16:30 बजे तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 05:55:38
🌅 सूर्यास्त – सायं 18:05:32
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:43 ए एम से 05:30 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:06 ए एम से 06:16 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:02 पी एम से 12:51 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:19 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:35 पी एम से 06:59 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 06:37 पी एम से 07:46 पी एम
💧 अमृत काल : 07:58 ए एम से 09:43 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:03 ए एम, मार्च 29 से 12:49 ए एम, मार्च 29
🪷 द्विपुष्कर योग : 06:16 ए एम से 05:32 पी एम
🚓 यात्रा शकुन- दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏻 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-हनुमान मंदिर में सिंदूर का चोला चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – बासंती दुर्गापुजारंभ (बंगाल), (हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और स्वतन्त्रता सेनानी) बंशीलाल पुण्य तिथि, सिक्खों के दूसरे गुरु, गुरु अंगद देव स्मृति दिवस, भारतीय अभिनेत्री सोनिया अग्रवाल जन्म दिवस, प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, भाऊसाहेब रानाडे शहीद दिवस, राष्ट्रीय नौवहन दिवस
✍🏼 विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है।
🌷 Vastu Tips 🌸
वास्तु शास्त्र में आज आचार्य श्री गोपी राम से जानिए दक्षिण-पश्चिम, यानी कि दिशा के बारे में। दक्षिण-पश्चिम दिशा को भारी सामान रखने के लिए सबसे उचित दिशा माना जाता है। घर बनाते समय ध्यान रखना चाहिए कि वहां के दक्षिण-पश्चिम हिस्से को ऊंचा रखना चाहिए। साथ ही इस दिशा की दिवारों को अन्य दिशाओं की दिवारों से मोटा बनाया जाना चाहिए। अगर आपके घर में सीढ़ियां बनायी जानी है, तो वो भी घर की इसी दिशा में बनवाएं। आप चाहें तो इस दिशा में एक स्टोर रूम भी बनवा सकते हैं, जिसे भारी सामान रखने के लिए उपयोग में लाना चाहिए।
इस दिशा को भारी सामान रखने के लिये क्यों उपयोग में लाना चाहिए, इसके पीछे एक साइंटिफिक फैक्ट भी है। दरअसल पृथ्वी जब सूर्य की परिक्रमा दक्षिण दिशा में करती है तो पृथ्वी एक विशेष कोणीय स्थिति में होती है, लेकिन इस दिशा में भार रखने से वह संतुलन में आ जाती है। साथ ही इस दिशा में गर्मियों में ठंडक जबकि सर्दी के मौसम में गर्माहट रहती है, जिसके चलते भारी सामान की ऊर्जा में भी संतुलन बना रहता है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
चिंता, चिडचिडापन व तनाव कम करने हेतु
जो व्यक्ति स्नान करते समय पानी में ( 5 मि.ली.) गुलाबजल मिलाकर ‘ॐ ह्रीं गंगायै ॐ ह्रीं स्वाहा |’ यह मंत्र बोलते हुए सर पर जल डालता है, उसे गंगा-स्नान का पुण्य होता है तथा साथ ही मानसिक चिंताओं में कमी आती है और तनाव धीरे-धीरे दूर होने लगता है, विचारों का शोधन होने लगता है, चिडचिडापन कम होता है तथा वह अपने – आपको तरोताजा अनुभव करता है |
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
आंखों की जलन को दूर करेंगे ये उपाय
ठंडे पानी का इस्तेमाल: आंखों में अगर जलन या थकान हो तो आप आंखों में पानी के छींटे डालें। इससे आंखों में ठंडक पहुंचेगी और आप बेहतर महसूस करेंगे। आप हाइड्रेशन का भी ख्याल रखें और भरपूर पानी पिएं। इससे शरीर डिटॉक्स होगा और परेशानी घटेगी।
खीरा का इस्तेमाल: आप खीरे की मदद से भी आंखों की जलन और थकान को दूर कर सकते हैं। खीरे की पतली स्लाइस काट लें और इसे फ्रिज में रख दें। जब भी आंखों में जलन हो आप इन स्लाइस को आंखों के ऊपर रखें। 10 से 15 मिनट तक आंखों को बंद कर आराम करें। आंखों को ठंडक मिलती है।
आलू का इस्तेमाल: खीरे की तरह आलू की स्लाइस भी आंखों पर रखे जा सकते हैं और यह भी भरपूर आराम देगा। आलू के रस को आंख पर लगाया जा सकता है और इससे भी जलन और दर्द में राहत मिल सकती है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
जगतजननी, जगत्कल्याणि, जगन्माता श्री दुर्गा का सप्तम रूप माता श्री कालरात्रि हैं। ये काल का नाश करने वाली हैं, इसलिए कालरात्रि कहलाती हैं। नवरात्रि के सप्तम दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है। इस दिन साधक को अपना चित्त सहस्रार चक्र में स्थिर कर साधना करनी चाहिए। संसार में काल का नाश करने वाली देवी “माता कालरात्री” ही हैं।
भक्तों की सामान्य पूजा मात्र से ही उनके सभी दु:ख-संताप आदि माता भगवती हर लेती हैं। दुश्मनों का नाश करने वाली तथा मनोवांछित फल देकर अपने भक्तों को संतुष्ट करती हैं। दुर्गा पूजा का सातवां दिन आश्विन शुक्ल सप्तमी माता कालरात्रि की उपासना का विधान है। मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है। इनका वर्ण अंधकार की भाँति काला है।
इनके केश बिखरे हुए हैं, कंठ में विद्युत की कान्ति बिखेरनेवाली माला तथा तीन नेत्र ब्रह्माण्ड की तरह विशाल एवं गोल हैं। जिनमें से बिजली की भाँति किरणें निकलती रहती हैं। इनकी नासिका से निकलनेवाली श्वास-प्रश्वास से जैसे अग्नि की भयंकर ज्वालायें निकलती रहती हैं। माँ का यह भय उत्पन्न करने वाला स्वरूप केवल पापियों का नाश करने के लिये ही है।
माँ कालरात्रि अपने भक्तों को सदैव शुभ फल प्रदान करने वाली हैं। माता कालरात्रि को शुभंकरी भी कहा जाता है। क्योंकि ये अपने भक्तों का सदा ही शुभ ही करती हैं। दुर्गा पूजा के सप्तम दिन साधक का मन “सहस्रार” चक्र में स्थित होता है। मधु कैटभ नामक महापराक्रमी असुर से अपने भक्तों के जीवन की रक्षा हेतु भगवान विष्णु को निंद्रा से जगाने के लिए ब्रह्मा जी ने मां की स्तुति की थी।
यह देवी कालरात्रि ही महामाया हैं और भगवान विष्णु की योगनिद्रा हैं। इन्होंने ही सृष्टि को एक दूसरे से जोड़ रखा है। देवी काल-रात्रि का वर्ण काजल के समान काले रंग का है जो अमावस्या की रात्रि से भी अधिक काला है। मां कालरात्रि के तीन बड़े-बड़े उभरे हुए नेत्र हैं जिनसे मां अपने भक्तों पर कृपा दृष्टि रखती हैं। माता कालरात्रि देवी की चार भुजाएं हैं। दायीं ओर की उपरी भुजा से महामाया भक्तों को वरदान देती हैं और नीचे की भुजा से अभय का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
बायीं भुजा में क्रमश: तलवार और खड्ग धारण किया है। बाल खुले और हवा में लहराते देवी कालरात्रि गर्दभ पर सवार होती हैं। मां का वर्ण काला होने पर भी कांतिमय और अद्भुत दिखाई देता है। देवी कालरात्रि का यह विचित्र रूप भक्तों के लिए अत्यंत शुभ है। अत: देवी को शुभंकरी भी कहा गया है। हर प्रकार की ऋद्धि-सिद्धि देनेवाली माता कालरात्रि का यह सातवां दिन तांत्रिक क्रिया की साधना करने वाले भक्तों के लिए अति महत्वपूर्ण होता है।
सप्तमी पूजा के दिन तंत्र साधना करने वाले साधक मध्य रात्रि में देवी की तांत्रिक विधि से पूजा करते हैं। ऐसी मान्यता है, कि इस दिन मां की आंखें खुलती हैं। इसके लिए तन्त्र साधना करनेवाले भक्त षष्ठी को ही बिल्ववृक्ष से किसी एक पत्र को आमंत्रित करके आते हैं और उसे आज तोड़कर लाते है। उसी बिल्वपत्र से माता की आँखें बनाई जाती है और उसी को माता को प्रत्यक्षदर्शी मानकर उनकी उपस्थिति में साधना करके मन्त्र-तन्त्रों की सिद्धि की जाती है।
दुर्गा पूजा में सप्तमी तिथि का काफी महत्व होता है। इस दिन से भक्तों के लिए देवी मां का दरवाज़ा खुल जाता है। भक्तगण पूजा स्थलों पर देवी के दर्शन-पूजन के लिए भारी मात्रा में आने लगते हैं। लगभग सभी देवी माता के प्रमुख स्थलों पर सप्तमी की पूजा भी सुबह में अन्य दिनों की तरह ही होती है। परंतु रात्रि में विशेष विधान के साथ देवी की पूजा की जाती है।
इस दिन अनेक प्रकार के मिष्टान्न एवं कहीं-कहीं तांत्रिक विधि से पूजा होने पर मदिरा भी देवी को अर्पित कि जाती है। सप्तमी की रात्रि “सिद्धियों” की रात्री भी कही जाती है। इसलिये कुण्डलिनी जागरण हेतु जो साधक साधना में लगे होते हैं आज सहस्त्रसार चक्र का भेदन करते हैं। पूजा विधान में शास्त्रों में जैसा वर्णित हैं। उसके अनुसार पहले कलश की पूजा, नवग्रह, दशदिक्पाल, देवी के परिवार में उपस्थित देवी देवता की पूजा करनी चाहिए। फिर मां कालरात्रि की पूजा करनी चाहिए।
साधक के लिए सभी सिद्धियों का द्वार आज की साधना से खुलने लगता है। इस दिन सामान्य पूजा परन्तु मन की एकाग्रता से भक्तों को माता के साक्षात्कार का भी अवसर मिलता है। आज की पूजा-साधना से मिलने वाले पुण्य एवं नव दिनों के उपवास से भक्त इसका अधिकारी होता है। इस दिन की पूजा से भक्तों की समस्त विघ्न बाधाओं और पापों का नाश हो जाता है। और उसे अक्षय पुण्य लोक की प्राप्ति होती है।
●●●●●★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●●●●●
⚜️ सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।
शास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म सप्तमी तिथि में होता है, वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। इस तिथि में जन्म लेनेवाला जातक गुणवान और प्रतिभाशाली होता है। ये अपने मोहक व्यक्तित्व से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने की योग्यता रखते हैं। इनके बच्चे भी गुणवान और योग्य होते हैं। धन धान्य के मामले में भी यह व्यक्ति काफी भाग्यशाली होते हैं। ये संतोषी स्वभाव के होते हैं और इन्हें जितना मिलता है उतने से ही संतुष्ट रहते है।

